रोबोटिक कार्यशाला में छात्र-छात्राओं को किया सम्मानित
मेरठ। शास्त्रीनगर स्थित बालेराम बृजभूषण सरस्वती शिशु मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में तकनीकी शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित एक सप्ताह की इलेक्ट्रॉनिक्स एवं रोबोटिक्स कार्यशाला का रविवार को सफल समापन हुआ। कार्यशाला के अंतिम दिन आयोजित नवाचार प्रतियोगिता में छात्रों ने अपनी प्रतिभा, तकनीकी समझ और रचनात्मक सोच का शानदार प्रदर्शन करते हुए कई उपयोगी मॉडल तैयार किए। कार्यक्रम के समापन पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली टीमों को ट्रॉफी, मेडल और प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
यह कार्यशाला अटल कम्युनिटी इनोवेशन सेंटर (ACIC) के तत्वावधान में आयोजित की गई थी। इसका उद्देश्य छात्रों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना तथा उनमें नवाचार और अनुसंधान की भावना विकसित करना था।
120 विद्यार्थियों ने सीखी आधुनिक तकनीक
विद्यालय में आयोजित इस साप्ताहिक कार्यशाला में कक्षा 6 से 12 तक के लगभग 120 विद्यार्थियों ने भाग लिया। पूरे सप्ताह विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने छात्रों को सर्किट डिजाइनिंग, सेंसर तकनीक, माइक्रो कंट्रोलर प्रोग्रामिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) तथा रोबोटिक्स की बुनियादी अवधारणाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।
प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण, प्रोग्रामिंग और वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान के लिए तकनीक के उपयोग को करीब से समझा।
इंस्टेंट इनोवेटिव प्रोजेक्ट प्रतियोगिता बनी मुख्य आकर्षण
कार्यशाला के अंतिम दिन ‘इंस्टेंट इनोवेटिव प्रोजेक्ट प्रतियोगिता’ आयोजित की गई। प्रतियोगिता की खास बात यह रही कि प्रतिभागियों को सीमित समय और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर एक कार्यशील मॉडल तैयार करना था।
छात्रों ने टीम भावना और रचनात्मक सोच का परिचय देते हुए कई उपयोगी और समाजोपयोगी प्रोजेक्ट तैयार किए, जिन्हें निर्णायक मंडल और उपस्थित अतिथियों ने खूब सराहा।
इनोवेटिव मॉडल ने जीता सभी का दिल
प्रतियोगिता में छात्रों द्वारा तैयार किए गए कई मॉडल आकर्षण का केंद्र रहे। इनमें सबसे अधिक चर्चा दो प्रोजेक्ट्स की रही।
ऑटोमैटिक एनिमल रिपेलेंट
इस मॉडल को खेतों और आवासीय क्षेत्रों में आवारा पशुओं की समस्या को ध्यान में रखकर विकसित किया गया। यह उपकरण मोशन सेंसर और ध्वनि सेंसर की सहायता से पशुओं की उपस्थिति का पता लगाकर उन्हें सुरक्षित तरीके से दूर भगाता है। इससे किसानों की फसलों की सुरक्षा में मदद मिल सकती है।
वाई-फाई वेदर इंडिकेटर
इस स्मार्ट मॉडल के माध्यम से तापमान, आर्द्रता और वर्षा की संभावना का रीयल-टाइम डेटा प्राप्त किया जा सकता है। यह जानकारी वाई-फाई के माध्यम से मोबाइल फोन तक भेजी जाती है, जिससे किसान और आम नागरिक मौसम की सटीक जानकारी समय पर प्राप्त कर सकते हैं।
इसके अतिरिक्त छात्रों ने स्मार्ट ट्रैफिक लाइट, वाटर लेवल अलार्म, ऑटोमैटिक स्ट्रीट लाइट और स्मार्ट वाटर कंजर्वेशन सिस्टम जैसे उपयोगी प्रोजेक्ट भी प्रस्तुत किए।
विजेता टीमों को किया गया सम्मानित
प्रतियोगिता में प्रस्तुत मॉडलों का मूल्यांकन उनकी मौलिकता, तकनीकी कार्यक्षमता, नवाचार और प्रस्तुति के आधार पर किया गया।
- प्रथम पुरस्कार – ऑटोमैटिक एनिमल रिपेलेंट टीम
- द्वितीय पुरस्कार – वाई-फाई वेदर इंडिकेटर टीम
- तृतीय पुरस्कार – स्मार्ट वाटर कंजर्वेशन सिस्टम टीम
विजेता टीमों को ट्रॉफी, मेडल और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। वहीं कार्यशाला में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों को सहभागिता प्रमाण-पत्र प्रदान कर उनके प्रयासों की सराहना की गई।
“बच्चों को समस्या समाधानकर्ता बनाना हमारा लक्ष्य” – प्रधानाचार्य
विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रभात कुमार गुप्ता ने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य केवल पाठ्य पुस्तकों तक सीमित शिक्षा देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की समस्याओं का समाधान खोजने के लिए तैयार करना है।
उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला ने छात्रों में आत्मविश्वास, वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा और नवाचार की भावना को मजबूत किया है। उन्होंने विद्यार्थियों की सराहना करते हुए कहा कि इतने कम समय में समाजोपयोगी तकनीकी मॉडल तैयार करना उनकी प्रतिभा और मेहनत का प्रमाण है।
भारत का तकनीकी भविष्य सुरक्षित हाथों में – वैभव शर्मा
अटल कम्युनिटी इनोवेशन सेंटर (ACIC) के प्रतिनिधि वैभव शर्मा ने कहा कि संस्था का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के युवाओं को ‘मेकर कल्चर’ से जोड़ना है, ताकि वे तकनीक के माध्यम से समाज की समस्याओं का समाधान खोज सकें।
उन्होंने कहा कि सरस्वती शिशु मंदिर के छात्रों की ऊर्जा, जिज्ञासा और नवाचार क्षमता को देखकर यह विश्वास और मजबूत होता है कि भारत का तकनीकी भविष्य सुरक्षित हाथों में है।
इस अवसर पर दिनेश कुमार ने भी विद्यार्थियों को स्टार्टअप, नवाचार और पेटेंट से जुड़ी संभावनाओं की जानकारी देते हुए भविष्य में तकनीकी उद्यमिता के लिए प्रेरित किया।
विज्ञान शिक्षिका रुद्राणी शर्मा ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम का सफल संचालन एवं संयोजन विद्यालय की विज्ञान शिक्षिका श्रीमती रुद्राणी शर्मा ने किया। उन्होंने बताया कि विद्यालय भविष्य में भी इस प्रकार की तकनीकी कार्यशालाओं का नियमित आयोजन करेगा, ताकि विद्यार्थियों को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से लगातार जोड़ा जा सके।
नवाचार को मिला प्रोत्साहन
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित अतिथियों, शिक्षकों और अभिभावकों ने विद्यार्थियों के नवाचार, तकनीकी कौशल और रचनात्मक सोच की मुक्त कंठ से सराहना की। सभी ने विद्यार्थियों को भविष्य में भी विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नए प्रयोग करने तथा देश के विकास में अपनी प्रतिभा का योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के साथ-साथ उन्हें भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए भी तैयार करती हैं। रोबोटिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों में शुरुआती स्तर पर दिया गया प्रशिक्षण आने वाले समय में छात्रों को उच्च शिक्षा, स्टार्टअप और नवाचार के क्षेत्र में नई संभावनाएं प्रदान करेगा।