एमजीयूजी के स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में पुस्तक का विमोचन करते उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
गोरखपुर, 28 अगस्त 2026। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) के पांचवें स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर तथा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में युवाओं की प्रतिभा और क्षमता को अवसरों में बदलने के लिए डबल इंजन सरकार ने एक मजबूत ईको सिस्टम तैयार किया है। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक युवा को उसकी योग्यता, रुचि और क्षमता के अनुरूप सीखने, कौशल विकसित करने, रोजगार पाने, उद्यम शुरू करने और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों।
विश्वविद्यालय के प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में शिक्षा और कौशल विकास से लेकर इन्फ्रास्ट्रक्चर, निवेश, स्टार्टअप, एमएसएमई और इंडस्ट्री तक व्यापक स्तर पर बदलाव किए गए हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य युवाओं की क्षमता को अवसर, अवसर को रोजगार और रोजगार को आर्थिक समृद्धि में बदलना है।
सरकारी नौकरी तक सीमित नहीं हैं युवाओं के अवसर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विद्यार्थियों से कहा कि आज युवाओं के सामने आगे बढ़ने के अवसर केवल सरकारी नौकरी तक सीमित नहीं हैं। शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता, स्टार्टअप, एमएसएमई, इंडस्ट्री, डिजिटल इकोनॉमी तथा रिसर्च एंड इनोवेशन जैसे अनेक क्षेत्र युवाओं के लिए नए अवसर उपलब्ध करा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी व्यवस्था विकसित कर रही है जिसमें युवा केवल नौकरी तलाशने वाला न बने, बल्कि नए विचारों, समाधान और उद्यमों को विकसित करने वाला बने। युवाओं को सीखने, प्रयोग करने, उद्यम शुरू करने और अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।
उत्तर प्रदेश में संभावनाओं की नहीं है कमी
सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास पोटेंशियल की कोई कमी नहीं है। प्रदेश के पास विशाल युवा शक्ति, कृषि शक्ति, उद्यमिता, प्राकृतिक संसाधन और समृद्ध ज्ञान परंपरा मौजूद है। आवश्यकता इन सभी क्षमताओं को एक दिशा, मजबूत ईको सिस्टम और नए अवसरों से जोड़ने की है।
उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में बदलाव की मजबूत नींव तैयार हुई है। बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर से कनेक्टिविटी बढ़ी है और कनेक्टिविटी के विस्तार से निवेश के अवसर बढ़े हैं। निवेश आने से उद्योग और रोजगार के अवसरों में वृद्धि हुई है। वहीं डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर ने इन अवसरों को प्रदेश के अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंचाने की क्षमता विकसित की है।
एमएसएमई और ओडीओपी से स्थानीय प्रतिभाओं को मिला मंच
मुख्यमंत्री ने कहा कि एमएसएमई और ओडीओपी के माध्यम से स्थानीय उत्पादों, कारीगरों और हस्तशिल्पियों को बेहतर प्लेटफार्म उपलब्ध हुआ है। वहीं स्टार्टअप ईको सिस्टम ने युवाओं के सामने नौकरी खोजने के बजाय नए समाधान और नए उद्यम स्थापित करने के अवसर खोले हैं।
उन्होंने कहा कि एजुकेशन, स्किल और हेल्थकेयर में बढ़ता इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रदेश में मजबूत ह्यूमन कैपिटल तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश आए और प्रदेश का युवा उन निवेशों, उद्योगों और अवसरों का सक्रिय हिस्सा बने।
शिक्षा की यात्रा केवल डिग्री तक सीमित न रहे
सीएम योगी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं होना चाहिए। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो युवाओं को अपने ज्ञान और कौशल के माध्यम से अवसर पैदा करने में सक्षम बनाए। विद्यार्थी केवल परीक्षा पास करने के लिए अध्ययन न करें, बल्कि वास्तविक जीवन की समस्याओं को समझें और उनके समाधान खोजने की क्षमता विकसित करें।
उन्होंने कहा कि क्लासरूम का ज्ञान समाज की जरूरतों और इंडस्ट्री की आवश्यकताओं से जुड़ना चाहिए। विद्यार्थियों में जॉब क्रिएटर, इनोवेटर और इंटरप्रेन्योर बनने की क्षमता विकसित करनी होगी।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा से आर्थिक विकास तक की यात्रा को रेखांकित करते हुए कहा कि व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें एजुकेशन से स्किल, स्किल से कैपेबिलिटी, कैपेबिलिटी से अपॉर्चुनिटी, अपॉर्चुनिटी से इनोवेशन, इनोवेशन से इंटरप्रेन्योरशिप, इंटरप्रेन्योरशिप से एंप्लॉयमेंट और एंप्लॉयमेंट से इकोनॉमिक ग्रोथ की यात्रा पूरी हो सके।
आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़ी जा रही ज्ञान की विरासत
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के पास हजारों वर्षों की ऋषि परंपरा और ज्ञान की समृद्ध विरासत है। इस ज्ञान को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़कर नई दिशा देने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि योग, आयुर्वेद, नेचुरोपैथी, मेडिसिनल प्लांट और पारंपरिक कृषि ज्ञान के क्षेत्र में भारत के पास हजारों वर्षों का अनुभव मौजूद है। रिसर्च और टेक्नोलॉजी के साथ इस ज्ञान को जोड़कर भविष्य के इनोवेशन, नए अवसर और नई अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला तैयार की जा सकती है।
ट्रेडिशनल नॉलेज को किताबों तक सीमित रखने की जरूरत नहीं
सीएम योगी ने कहा कि पारंपरिक ज्ञान को केवल पुस्तकों और परंपराओं तक सीमित नहीं रखना है। इसे रिसर्च और प्रयोगशालाओं से जोड़ने के साथ नई पीढ़ी तक पहुंचाना होगा।
उन्होंने आयुर्वेद को आधुनिक डायग्नोस्टिक, क्लीनिकल रिसर्च और नई मेडिकल टेक्नोलॉजी से जोड़ने पर जोर दिया। मेडिसिनल प्लांट को आधुनिक कृषि, बायोटेक्नोलॉजी और फार्मास्यूटिकल रिसर्च से जोड़कर नई वैल्यू चेन तैयार की जा सकती है। इसी तरह योग और वैलनेस को प्रिवेंटिव हेल्थकेयर तथा आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों से जोड़ने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि भारत के चिकित्सा ज्ञान को वैज्ञानिक वैलिडेशन और क्वालिटी स्टैंडर्ड के साथ जोड़कर वैश्विक स्तर तक पहुंचाया जा सकता है।
ज्ञान की अलग-अलग विधाओं के संगम से निकलेगा भविष्य का समाधान
मुख्यमंत्री ने महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय में संचालित विभिन्न ज्ञान विधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ट्रेडिशनल मेडिसिन, मॉडर्न मेडिसिन, नर्सिंग, फार्मेसी और एग्रीकल्चर को अलग-अलग विषयों के रूप में देखने के बजाय एक इंटीग्रेटेड नॉलेज एंड इनोवेशन ईको सिस्टम के रूप में देखने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि भविष्य की बड़ी समस्याओं का समाधान किसी एक विषय की सीमा में नहीं, बल्कि अलग-अलग ज्ञान विधाओं के संगम से निकलेगा। जब विभिन्न डिसिप्लिन एक साथ काम करेंगे तो बेहतर प्रोफेशनल्स के साथ नई रिसर्च, इनोवेशन, स्टार्टअप और रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
मानव जीवन की समस्याओं का सरल समाधान देना टेक्नोलॉजी का उद्देश्य
सीएम योगी ने कहा कि टेक्नोलॉजी का वास्तविक उद्देश्य मानव जीवन की समस्याओं का बेहतर और सरल समाधान उपलब्ध कराना है। उन्होंने एआई आधारित डायग्नोसिस, टेलीमेडिसिन, डिजिटल हेल्थ, मेडिकल डिवाइसेज, बायोटेक्नोलॉजी और जीनोमिक्स जैसे क्षेत्रों की संभावनाओं का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि टेलीमेडिसिन के माध्यम से विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं दूर-दराज के गांवों तक पहुंचाई जा सकती हैं। डिजिटल हेल्थ मरीजों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में सहायक हो सकती है। वहीं मेडिकल डिवाइसेज बेहतर डायग्नोसिस और उपचार के लिए उन्नत तकनीक उपलब्ध करा सकते हैं।
आधुनिक तकनीक से कृषि क्षेत्र में भी आएगा बड़ा बदलाव
मुख्यमंत्री ने कृषि के क्षेत्र में तकनीक की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रेसिजन फार्मिंग के माध्यम से कम संसाधनों का वैज्ञानिक और अधिकतम उपयोग किया जा सकता है। ड्रोन टेक्नोलॉजी से फसलों की निगरानी, सटीक छिड़काव और फसल का आकलन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
सॉयल टेक्नोलॉजी से मिट्टी की गुणवत्ता और पोषक तत्वों का वैज्ञानिक आकलन किया जा सकता है। स्मार्ट इरिगेशन के माध्यम से फसल की आवश्यकता के अनुरूप सिंचाई कर पानी की बचत और उत्पादकता में सुधार किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि एग्री प्रोसेसिंग के माध्यम से किसान की उपज में वैल्यू एडिशन कर उसकी बाजार कीमत और आय बढ़ाई जा सकती है। क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप खेती की नई तकनीकों को अपनाने में मदद कर सकता है।
गोरखपुर को विकसित किया जा सकता है रीजनल नॉलेज और इकोनॉमिक हब के रूप में
सीएम योगी ने कहा कि गोरखपुर केवल धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान वाला शहर नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की संभावनाओं का द्वार है। गोरखपुर को एजुकेशन, हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर और इनोवेशन के बड़े रीजनल नॉलेज एवं इकोनॉमिक हब के रूप में विकसित किया जा सकता है।
उन्होंने महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय से इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आह्वान किया।
कैंपस का ज्ञान समाज की शक्ति बने
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं और शोध केंद्रों में पैदा होने वाला ज्ञान केवल कैंपस की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उसे गांवों, किसानों, अस्पतालों, उद्योगों और स्टार्टअप तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कृषि विद्यार्थियों की रिसर्च किसानों की आय और उत्पादकता बढ़ाने में मदद करे। मेडिकल विद्यार्थियों का शोध ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में उपयोगी हो। फार्मेसी रिसर्च नई दवाओं और हेल्थकेयर इनोवेशन को जन्म दे। टेक्नोलॉजी इन सभी क्षेत्रों को बड़े बाजार और नई अर्थव्यवस्था से जोड़ने का माध्यम बने।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब विश्वविद्यालय में पैदा हुआ ज्ञान किसान के खेत, मरीज के जीवन, उद्योग की जरूरत और युवा के उद्यम तक पहुंचेगा, तभी विश्वविद्यालय का ज्ञान समाज की शक्ति और देश की आर्थिक महाशक्ति का आधार बन सकेगा।
विद्यार्थियों को जॉब रेडी नहीं, फ्यूचर रेडी बनने का आह्वान
सीएम योगी ने विद्यार्थियों से कहा कि उन्हें केवल जॉब रेडी नहीं, बल्कि फ्यूचर रेडी बनना है। तेजी से बदलती दुनिया में केवल एक नौकरी के लिए तैयार होना पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को ऐसी स्किल, विजन और विल पॉवर विकसित करनी होगी, जिससे वे बदलती परिस्थितियों के साथ लगातार आगे बढ़ सकें।
उन्होंने विद्यार्थियों से यह भी कहा कि वे केवल यह सवाल न करें कि वे अपने लिए क्या कर सकते हैं, बल्कि यह सोचें कि अपने ज्ञान, प्रतिभा और क्षमता से समाज तथा देश के लिए क्या योगदान दे सकते हैं।
सरकार, विश्वविद्यालय, इंडस्ट्री और युवाओं की साझेदारी जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विकास के लिए गवर्नमेंट, यूनिवर्सिटी, इंडस्ट्री और यूथ—इन चारों की साझेदारी आवश्यक है।
सरकार ऐसा ईको सिस्टम तैयार करे, जिसमें शिक्षा, निवेश, रिसर्च, स्टार्टअप और रोजगार के अवसर पैदा हों। विश्वविद्यालय समाज और इंडस्ट्री की वास्तविक जरूरतों से जुड़ा ज्ञान और शोध तैयार करें। इंडस्ट्री युवाओं को बाजार, इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप, रोजगार, रिसर्च और उद्यम के अवसर उपलब्ध कराए।
उन्होंने कहा कि युवा इनोवेशन और इंटरप्राइज की शक्ति बनें और अपने ज्ञान को नए विचारों, नए समाधानों तथा नए उद्यमों में बदलें। इन चारों के एक साथ काम करने से नॉलेज को इनोवेशन, इनोवेशन को इंटरप्राइज, इंटरप्राइज को एम्प्लॉयमेंट और एम्प्लॉयमेंट को इकोनॉमिक ग्रोथ में बदला जा सकता है।
विश्वविद्यालय अपने आप में टापू न बनें
सीएम योगी ने कहा कि विश्वविद्यालय अपने आप में एक टापू न बनें, बल्कि समाज की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि ऐसा होने पर युवा जॉब सीकर के बजाय जॉब क्रिएटर बनने का आत्मविश्वास विकसित कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि गांव का युवा और किसान भी टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप के माध्यम से नई वैल्यू और नई आय पैदा कर सके, ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है।
महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद से विश्वविद्यालय तक की यात्रा को किया याद
मुख्यमंत्री ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना से लेकर महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के संचालन तक की यात्रा का भी स्मरण किया। उन्होंने कहा कि देश की पराधीनता के दौर में, जब भारत आजादी की ओर बढ़ रहा था, गोरक्षपीठ ने भावी पीढ़ी के निर्माण के लिए वर्ष 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना कर गोरखपुर में शिक्षा का बीजारोपण किया था।
उन्होंने कहा कि युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज ने शिक्षा परिषद की नींव रखी। आजाद भारत के पहले विश्वविद्यालय, गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए उन्होंने शिक्षा परिषद के दो महाविद्यालय दान स्वरूप दे दिए थे। पूर्वी उत्तर प्रदेश के पहले महिला महाविद्यालय की स्थापना और उत्तर प्रदेश के पहले टेक्निकल इंस्टीट्यूट महाराणा प्रताप पॉलिटेक्निक की शुरुआत का भी उन्होंने उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद 50 से अधिक शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थाओं तथा सेवा प्रकल्पों के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही है।
उन्होंने ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज के बाद लंबे समय तक गोरक्षपीठ के इस दायित्व का निर्वहन करने वाले ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज को भी स्मरण किया।
पांच वर्ष में 12 से बढ़कर 53 हुए पाठ्यक्रम
समारोह में स्वागत भाषण देते हुए एमजीयूजी के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. भूपेश कुमार गोयल ने कहा कि गोरक्षपीठ सदियों से मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रही है। शिक्षा का प्रसार और समाज का उत्थान गोरक्षपीठ का संकल्प रहा है।
उन्होंने कहा कि इसी संकल्प के तहत वर्ष 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना हुई और इसके बाद लगातार शिक्षण संस्थानों का विस्तार होता गया। इसी सेवा संकल्प को व्यापक रूप देने के क्रम में गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय की स्थापना की।
कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय की स्थापना के पांच वर्ष के भीतर ही यहां पाठ्यक्रमों की संख्या 12 से बढ़कर 53 हो गई है।
दो पुस्तकों का मुख्यमंत्री ने किया विमोचन
महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के पांचवें स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वविद्यालय की ओर से प्रकाशित दो पुस्तकों का विमोचन किया। इनमें अंग्रेजी प्रवक्ता डॉ. अनुकृति राज की पुस्तक ‘नेशन एंड एक्सप्रेशन’ तथा ‘अमृतकाल और राष्ट्रवाद’ शामिल हैं।
शैक्षणिक, शोध, खेल और सांस्कृतिक प्रतिभाओं का सम्मान
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने शैक्षणिक उत्कृष्टता, शोध कार्य, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया। इसके साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया।
बेस्ट हाउस का पुरस्कार ऑरेंज हाउस को मिला, जबकि सर्वश्रेष्ठ परफॉर्मर का पुरस्कार यलो हाउस की प्रियंका पुनिया को प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री ने श्रेष्ठतम परिचर के रूप में सूर्यदेव भारती, श्रेष्ठतम नर्स के रूप में सरिता कुमारी, श्रेष्ठतम कर्मचारी के रूप में शाम्भवी द्विवेदी, श्रेष्ठतम अधिकारी के रूप में उप कुलसचिव श्रीकांत तथा श्रेष्ठतम शिक्षक के रूप में डॉ. सुनील कुमार सिंह को सम्मानित किया।
इसके अलावा सीसीआरएस में चयनित आयुर्वेद के विद्यार्थियों रवि रंजन कुमार, विनीत सिंह, अरुण कुमार और प्रभाकर वर्मा को तथा आईसीएमआर रिसर्च के लिए चयनित एमबीबीएस विद्यार्थियों अक्षिता मिश्रा, ओम कुमार और सुयश कुमार सहाय को प्रशंसा पत्र प्रदान किए गए।
मेडिकल रिकॉर्ड के क्षेत्र में सराहनीय योगदान के लिए गरिमा पांडेय, आद्या प्रजापति, नीतू यादव और श्रद्धा को भी मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया।
रक्षाबंधन पर मुख्यमंत्री ने किया पौधरोपण
मंचीय कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इसके बाद स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ मां सरस्वती, भारत माता, भगवान श्रीगोरक्षनाथ, ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को स्मृतिचिह्न भेंट कर उनका अभिनंदन किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के सामूहिक गायन के साथ हुआ।
समारोह में जनप्रतिनिधियों और शिक्षाविदों की रही सहभागिता
कार्यक्रम में सांसद रविकिशन शुक्ल, विधायक महेंद्रपाल सिंह, भारत सरकार के पूर्व औषधि महानियंत्रक एवं उत्तर प्रदेश सरकार के सलाहकार डॉ. जीएन सिंह, यूपी सरकार के सलाहकार अवनीश अवस्थी, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. वी.एन. राजशेखरन पिल्लई, हेल्थ यूनिवर्सिटी पश्चिम बंगाल के पूर्व कुलपति डॉ. भवतोष विश्वास, कैलिफोर्निया अमेरिका के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय तिवारी, मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय मीरजापुर की कुलपति प्रो. शोभा गौड़, श्री गोरक्षनाथ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की प्राचार्य डॉ. वर्षा एम., एमजीयूजी के पूर्व कुलपति मेजर जनरल डॉ. अतुल वाजपेयी और कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव समेत अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।
कार्यक्रम का आभार ज्ञापन नर्सिंग कॉलेज की प्राचार्य डॉ. डीएस अजीथा ने किया।