परशुराम परिषद की बैठक को संबोधित करते पूर्व मंत्री पं सुनील भराला
हरिद्वार/मेरठ। देवभूमि उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित भारत माता मंदिर में राष्ट्रीय परशुराम परिषद की उत्तराखंड प्रदेश कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में संगठन विस्तार, सनातन संस्कृति के संरक्षण, आगामी कांवड़ यात्रा एवं हरिद्वार अर्धकुंभ की तैयारियों सहित विभिन्न सामाजिक और संगठनात्मक विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में राष्ट्रीय परशुराम परिषद के संस्थापक एवं उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री पंडित सुनील भराला मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि अध्यक्षता परिषद के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील दत्त शर्मा ने की। बैठक का आयोजन पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरि जी महाराज के सान्निध्य एवं आशीर्वाद में सम्पन्न हुआ।
बैठक में राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) विनय शर्मा, परशुराम स्वाभिमान सेना के उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड प्रभारी नमन भारद्वाज, प्रदेश, जिला एवं मंडल स्तर के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
संगठन विस्तार पर विशेष जोर
मुख्य अतिथि पंडित सुनील भराला ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय परशुराम परिषद भगवान परशुराम के आदर्शों, भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ देशभर में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले राज्य में संगठन की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से प्रत्येक जिले, नगर और गाँव तक संगठन का विस्तार करने तथा सदस्यता अभियान को तेज करने का आह्वान किया। साथ ही युवाओं, महिलाओं और समाज के सभी वर्गों को संगठन से जोड़ने पर बल दिया।
लव जिहाद और भूमि जिहाद पर जताई चिंता
अपने संबोधन में पंडित सुनील भराला ने लव जिहाद और भूमि जिहाद जैसे विषयों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इन मामलों में सरकार और प्रशासन को प्रभावी, निष्पक्ष तथा कानूनसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परशुराम परिषद समाज में जागरूकता फैलाने तथा सनातन समाज के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
कांवड़ यात्रा को लेकर रखे विचार
आगामी कांवड़ यात्रा और हरिद्वार अर्धकुंभ की तैयारियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा भगवान शिव की दिव्य बारात है, जिसमें देशभर से करोड़ों श्रद्धालु आस्था के साथ भाग लेते हैं।
उन्होंने कहा कि कांवड़ियों को अपनी धार्मिक परंपराओं, आस्था और धार्मिक अनुष्ठानों का निर्वहन बिना किसी अनावश्यक व्यवधान के करने दिया जाना चाहिए। साथ ही प्रशासन से सुरक्षा, यातायात, पेयजल, चिकित्सा, विश्राम स्थलों और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को समय रहते सुनिश्चित करने का आग्रह किया, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
सेवा शिविरों की बनेगी कार्ययोजना
बैठक में आगामी हरिद्वार अर्धकुंभ और कांवड़ यात्रा के दौरान राष्ट्रीय परशुराम परिषद की ओर से सेवा शिविर लगाने पर भी चर्चा हुई। प्रस्तावित योजना के तहत श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा, जनसहयोग, प्रशासन के साथ समन्वय और विभिन्न सेवा गतिविधियों का संचालन किया जाएगा।
संगठनात्मक गतिविधियों पर हुई चर्चा
बैठक में उत्तराखंड प्रदेश में संगठन के विस्तार, जिला एवं मंडल इकाइयों के सुदृढ़ीकरण, सदस्यता अभियान, संगठनात्मक प्रशिक्षण, आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा, सामाजिक समरसता, सनातन संस्कृति के संरक्षण और समाजहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। संगठन को प्रदेशभर में अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाने के लिए कई संगठनात्मक निर्णय भी लिए गए।
कार्यकर्ताओं ने लिया संकल्प
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील दत्त शर्मा ने कहा कि संगठन उत्तराखंड के प्रत्येक जिले, नगर, मंडल और गाँव तक अपनी पहुंच मजबूत करेगा तथा भगवान परशुराम के आदर्शों, भारतीय संस्कृति और सामाजिक समरसता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा।
बैठक के समापन पर उपस्थित सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने पूर्ण समर्पण, अनुशासन और सेवा-भाव के साथ संगठन की विचारधारा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने तथा भगवान परशुराम के आदर्शों, भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता और राष्ट्रहित के मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य करने का सामूहिक संकल्प लिया।
बैठक में उत्तराखंड प्रदेश के वरिष्ठ पदाधिकारी, जिला एवं मंडल अध्यक्ष, विभिन्न प्रकोष्ठों के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।