मेरठ। सावन का पावन महीना अपने अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच चुका है। हरिद्वार से गंगाजल लेकर कांवड़ के साथ मेरठ पहुंच रहे शिवभक्त अब अपने आराध्य भगवान शिव के दरबार में जलाभिषेक की तैयारी में जुट गए हैं। मेरठ छावनी स्थित ऐतिहासिक बाबा औघड़नाथ मंदिर, जिसे काली पलटन मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, अगले दो दिनों में आस्था के सबसे बड़े केंद्र के रूप में नजर आएगा।
आज 10 अगस्त, सोमवार से बाबा औघड़नाथ मंदिर में कांवड़ियों के गंगाजल अर्पित करने का सिलसिला तेज हो जाएगा। मंदिर समिति के अनुसार सुबह आरती के बाद त्रयोदशी/प्रदोष का जल चढ़ाया जाएगा, जबकि 11 अगस्त, मंगलवार को सुबह करीब 4:15 बजे से चतुर्दशी का मुख्य कांवड़ जलाभिषेक शुरू होगा।
कांवड़ियों की भारी संख्या और जलाभिषेक की धार्मिक परंपरा को देखते हुए 10 से 12 अगस्त तक मंदिर रात में भी खुला रहेगा, ताकि दूर-दराज से आने वाले शिवभक्तों को जलाभिषेक के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े और श्रद्धालुओं की भीड़ को व्यवस्थित तरीके से मंदिर में प्रवेश कराया जा सके।
आज से शुरू होगा जलाभिषेक, कल मुख्य कांवड़ जल चढ़ेगा
औघड़नाथ मंदिर में जलाभिषेक को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। मंदिर समिति के अनुसार 10 अगस्त को त्रयोदशी/प्रदोष का जल चढ़ाया जाएगा।
इसके बाद मंगलवार 11 अगस्त को सुबह लगभग 4:15 बजे से चतुर्दशी का मुख्य कांवड़ जलाभिषेक शुरू होगा। हरिद्वार से गंगाजल लेकर कई दिनों की पैदल यात्रा करते हुए मेरठ पहुंचे कांवड़िए अपनी कांवड़ से गंगाजल निकालकर बाबा औघड़नाथ के शिवलिंग पर अर्पित करेंगे।
जल की पहली बूंद शिवलिंग पर पड़ते ही मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र ‘हर-हर महादेव’, ‘बोल बम’ और ‘जय भोलेनाथ’ के जयकारों से गूंज उठेगा।
हाजिरी के जल से मुख्य जलाभिषेक तक चलेगा आस्था का क्रम
कांवड़ यात्रा में हाजिरी का जल और मुख्य जलाभिषेक दोनों का अपना धार्मिक महत्व है। कई श्रद्धालु अपने आराध्य शिवालय में पहुंचने के बाद पहले हाजिरी का जल अर्पित करते हैं। इसके बाद निर्धारित तिथि एवं धार्मिक परंपरा के अनुसार मुख्य जलाभिषेक किया जाता है।
औघड़नाथ मंदिर में भी कांवड़ियों की भीड़ के मद्देनजर जलाभिषेक की प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं की गई हैं।
कांवड़िए मंदिर पहुंचकर निर्धारित स्थान पर अपनी कांवड़ रखते हैं। इसके बाद पूजा-अर्चना कर गंगाजल भगवान शिव को समर्पित करते हैं। इसके साथ बेलपत्र, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद लिया जाता है।
हरिद्वार से शुरू हुई यात्रा पहुंचेगी शिव के दरबार तक
कांवड़ यात्रा शिवभक्तों के लिए केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि आस्था, संकल्प और अनुशासन की परीक्षा भी मानी जाती है।
शिवभक्त हरिद्वार और अन्य गंगा तटों से गंगाजल भरकर कांवड़ में रखते हैं। इसके बाद वे पैदल यात्रा करते हुए अपने-अपने क्षेत्र के शिवालयों की ओर रवाना होते हैं।
मेरठ पहुंचने वाले कांवड़ियों में बड़ी संख्या ऐसे श्रद्धालुओं की है, जो कई दिनों की पैदल यात्रा पूरी कर यहां पहुंच रहे हैं। कांवड़ मार्गों पर बने सेवा शिविरों में उन्हें भोजन, पेयजल, चिकित्सा और विश्राम की सुविधाएं मिल रही हैं।
कांवड़ियों के जत्थे जैसे-जैसे मेरठ की ओर बढ़ते हैं, पूरा वातावरण ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से शिवमय हो जाता है।
10 से 12 अगस्त तक रात में भी खुलेगा मंदिर
कांवड़ियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए बाबा औघड़नाथ मंदिर को 10, 11 और 12 अगस्त तक रात में भी खुला रखने की व्यवस्था की गई है।
मंदिर समिति के अध्यक्ष सतीश सिंघल के अनुसार मंदिर की व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए समिति के पदाधिकारियों के साथ लगभग 100 स्वयंसेवक अलग-अलग जिम्मेदारियों में लगाए जाएंगे।
मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था भी की गई है, ताकि रात के समय आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
रात्रिकालीन जलाभिषेक व्यवस्था का उद्देश्य श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करते हुए उन्हें व्यवस्थित तरीके से दर्शन और जल समर्पण का अवसर उपलब्ध कराना है।
काली पलटन क्षेत्र में दिखाई देगा आस्था का अद्भुत नजारा
जलाभिषेक के मुख्य दिनों में बाबा औघड़नाथ मंदिर और आसपास का काली पलटन क्षेत्र पूरी तरह शिवमय नजर आने की संभावना है।
भगवा वस्त्र पहने कांवड़िए, रंग-बिरंगी सजी हुई कांवड़, हर-हर महादेव के जयघोष और भजनों की धुन के बीच श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दिखाई देंगी।
हरिद्वार से लाए गए गंगाजल को शिवलिंग पर अर्पित करते समय श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहेगा। कई कांवड़िए अपने साथ परिवार और अन्य श्रद्धालुओं को भी लेकर मंदिर पहुंचेंगे।
ऐतिहासिक भी है बाबा औघड़नाथ मंदिर
मेरठ छावनी में स्थित बाबा औघड़नाथ मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ ऐतिहासिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह मंदिर काली पलटन मंदिर के नाम से भी प्रसिद्ध है।
मेरठ के इतिहास में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े संदर्भों के कारण औघड़नाथ मंदिर की विशेष पहचान है। सावन और कांवड़ यात्रा के दौरान इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम
कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा एवं यातायात के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
औघड़नाथ मंदिर के आसपास अस्थायी कांवड़ थाना, अस्थायी पुलिस चौकियां और सीसीटीवी कंट्रोल रूम की व्यवस्था की गई है। मंदिर एवं आसपास के प्रमुख क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य भीड़ नियंत्रण, श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही, यातायात प्रबंधन और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
सीसीटीवी से होगी लगातार निगरानी
मंदिर परिसर और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी की जा रही है। भीड़ के दबाव, प्रवेश एवं निकास व्यवस्था और संदिग्ध गतिविधियों पर पुलिस की नजर रहेगी।
श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने की स्थिति में पुलिस एवं प्रशासन द्वारा निर्धारित व्यवस्थाओं के अनुसार उन्हें व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
सेवा शिविर बने कांवड़ियों का सहारा
मेरठ में कांवड़ मार्गों पर जगह-जगह सेवा शिविर लगाए गए हैं। इन शिविरों में शिवभक्तों को भोजन, फल, पेयजल, शीतल पेय, चिकित्सा सुविधा और विश्राम की व्यवस्था उपलब्ध कराई जा रही है।
लंबी दूरी पैदल तय करके आने वाले कांवड़ियों के लिए ये सेवा शिविर राहत का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं।
कई स्थानों पर सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवकों द्वारा रात-दिन शिवभक्तों की सेवा की जा रही है। इससे मेरठ में कांवड़ यात्रा का सामाजिक और सेवा भाव वाला पक्ष भी सामने आ रहा है।
गंगाजल अर्पित करना संकल्प की पूर्णता का प्रतीक
कांवड़ यात्रा में गंगाजल को भगवान शिव को अर्पित करना श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है। कांवड़िए कई दिनों तक कांवड़ को कंधे पर लेकर पैदल यात्रा करते हैं और गंगाजल को सुरक्षित रखते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचाते हैं।
जब यही गंगाजल शिवलिंग पर अर्पित किया जाता है तो श्रद्धालु इसे अपने संकल्प की पूर्णता मानते हैं।
यात्रा की थकान, लंबी दूरी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद कांवड़ियों के उत्साह में कोई कमी दिखाई नहीं देती। मंदिर पहुंचते ही ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयघोष उनकी आस्था और ऊर्जा को और बढ़ा देते हैं।
प्रशासन की श्रद्धालुओं से अपील, व्यवस्था में सहयोग करें
कांवड़ यात्रा के अंतिम चरण में श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ने के कारण प्रशासन ने सभी शिवभक्तों से निर्धारित मार्गों और सुरक्षा व्यवस्था का पालन करने की अपील की है।
श्रद्धालुओं से कहा गया है कि वे भीड़ में धैर्य बनाए रखें, पुलिस एवं प्रशासन द्वारा दिए जा रहे निर्देशों का पालन करें और मंदिर परिसर में निर्धारित प्रवेश एवं निकास व्यवस्था के अनुसार ही आगे बढ़ें।
कांवड़ की मर्यादा बनाए रखने के साथ-साथ यातायात और सार्वजनिक व्यवस्था में सहयोग करने की भी अपील की गई है।
आस्था के साथ सेवा और सामाजिक सहभागिता का पर्व
मेरठ की कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं रह जाती। यह सेवा, सहयोग और सामाजिक सहभागिता का भी बड़ा उदाहरण बनती है।
एक ओर हरिद्वार से गंगाजल लेकर शिवभक्त मेरठ पहुंच रहे हैं, तो दूसरी ओर स्थानीय सामाजिक संगठन, व्यापारिक संस्थाएं, धार्मिक समितियां और स्वयंसेवक उनके स्वागत और सेवा में जुटे हुए हैं।
कहीं भोजन कराया जा रहा है, कहीं ठंडा पानी और शीतल पेय बांटे जा रहे हैं, तो कहीं चिकित्सा एवं विश्राम की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
आज और कल बाबा औघड़नाथ के दरबार में उमड़ेगा आस्था का सैलाब
10 अगस्त 2026 से औघड़नाथ मंदिर में जलाभिषेक का क्रम तेज होगा और 11 अगस्त को सुबह करीब 4:15 बजे से मुख्य कांवड़ जलाभिषेक शुरू होगा।
10 से 12 अगस्त तक रात में भी मंदिर खुले रहने की व्यवस्था के कारण श्रद्धालुओं को जलाभिषेक का अवसर मिलेगा। प्रशासन और मंदिर समिति द्वारा भीड़ को व्यवस्थित रखने तथा श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
हरिद्वार से कंधों पर कांवड़ उठाकर निकले शिवभक्तों की यात्रा अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। गंगाजल की वह बूंद, जिसे कई दिनों तक श्रद्धालुओं ने अपने कंधों पर संभालकर रखा, अब बाबा औघड़नाथ के शिवलिंग पर अर्पित होगी।
और उस क्षण पूरा काली पलटन क्षेत्र एक ही जयघोष से गूंजेगा—
“हर-हर महादेव… बोल बम!”
जलाभिषेक की प्रमुख तिथियां
- 10 अगस्त 2026, सोमवार: त्रयोदशी/प्रदोष का जलाभिषेक
- 11 अगस्त 2026, मंगलवार: सुबह करीब 4:15 बजे से चतुर्दशी का मुख्य कांवड़ जलाभिषेक
- 10 से 12 अगस्त: श्रद्धालुओं के लिए रात में भी मंदिर खुले रहने की व्यवस्था
- लगभग 100 स्वयंसेवक: मंदिर की विभिन्न व्यवस्थाओं में सहयोग करेंगे
- सुरक्षा: अस्थायी कांवड़ थाना, पुलिस चौकियां एवं सीसीटीवी निगरानी
- मुख्य आकर्षण: हरिद्वार से गंगाजल लेकर पहुंचते कांवड़िए, हाजिरी का जल, मुख्य जलाभिषेक और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष।