आचार्य हिमांशु गेरोला (श्रीमद्भागवत भागवत पुराण कथा व्यास)
पंचम दिवस भक्त प्रह्लाद, भगवान नृसिंह के प्राकट्य, राजा सगर के पितृ उद्धार और श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का हुआ भावपूर्ण वर्णन; पतिव्रता नारी की शक्ति और पूर्वजों के सम्मान पर भी दिया जोर
मेरठ । गढ़वाल सभा मेरठ के तत्वावधान में सामुदायिक केंद्र, पांडव नगर में आयोजित श्री पंच पुराण कथा महोत्सव के पंचम दिवस भक्ति और आध्यात्मिकता के साथ सामाजिक सरोकारों का संदेश दिया गया। विभिन्न पुराणों के कथा प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को अटूट भक्ति, सत्य, नारी शक्ति, पारिवारिक संस्कार, पूर्वजों के प्रति कर्तव्य और प्रकृति संरक्षण का महत्व समझाया गया। कथा स्थल पर दिनभर भक्तिमय वातावरण बना रहा और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया।
भक्त प्रह्लाद की कथा से मिला अटूट भक्ति और सत्य का संदेश
नरसिंह पुराण कथा व्यास आचार्य बृजेश जोशी ने भक्त प्रह्लाद की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जीवन में परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, जो व्यक्ति अटूट विश्वास के साथ भक्ति और सत्य के मार्ग पर चलता है, भगवान उसकी रक्षा करते हैं। भक्त प्रह्लाद के जीवन प्रसंग के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को धर्म और सत्य पर अडिग रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होती, बल्कि जीवन में सत्य, सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलना भी उसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।
भगवान नृसिंह के प्राकट्य का हुआ भावपूर्ण वर्णन
कथा व्यास आचार्य बृजेश जोशी ने भगवान नृसिंह के प्राकट्य का प्रसंग सुनाते हुए भक्त और भगवान के बीच अटूट विश्वास की महत्ता बताई। उन्होंने कहा कि भक्त प्रह्लाद की भगवान के प्रति अटूट आस्था इस बात का प्रतीक है कि विपरीत परिस्थितियों में भी मनुष्य को अपने विश्वास और सत्य के मार्ग से विचलित नहीं होना चाहिए। कथा के दौरान भगवान नृसिंह के प्राकट्य का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
नारी के त्याग, तप और संस्कार में निहित है अद्भुत शक्ति
आचार्य बृजेश जोशी ने पतिव्रता नारी की शक्ति का भी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को त्याग, तप, संकल्प, ममता और संस्कार की शक्ति के रूप में देखा गया है। परिवार और समाज के निर्माण में नारी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कथा प्रसंगों के माध्यम से बताया कि नारी की दृढ़ इच्छाशक्ति, संस्कार और समर्पण परिवार को कठिन परिस्थितियों में भी एकजुट रखने की सामर्थ्य रखते हैं। समाज को नारी के सम्मान और उसके योगदान के प्रति सदैव संवेदनशील रहना चाहिए।
राजा सगर की कथा से पूर्वजों के प्रति कर्तव्य का संदेश
हरिवंश पुराण कथा व्यास आचार्य कुशला प्रसाद सेमवाल ने सूर्यवंश के राजा सगर की कथा का वर्णन करते हुए उनके पितरों के उद्धार का प्रसंग श्रद्धालुओं को सुनाया। उन्होंने कहा कि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, सम्मान और अपने कर्तव्यों का निर्वहन सनातन परंपरा एवं पारिवारिक संस्कारों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी का दायित्व है कि वह अपनी संस्कृति, परंपराओं और पूर्वजों से प्राप्त संस्कारों को समझे तथा उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाए। आधुनिकता के साथ अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहना भी आवश्यक है।
श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं ने श्रद्धालुओं को किया भाव-विभोर
श्रीमद्भागवत महापुराण कथा व्यास आचार्य हिमांशु गैरोला ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का मनोहारी वर्णन किया। श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेम, भक्ति और ईश्वर के प्रति समर्पण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन मनुष्य को प्रेम, कर्तव्य, धर्म और प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने की प्रेरणा देता है। उनके जीवन के प्रत्येक प्रसंग में मानव समाज के लिए कोई न कोई महत्वपूर्ण शिक्षा छिपी हुई है।
गोवर्धन लीला से दिया प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कथा के दौरान गोवर्धन पर्वत और भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला का विशेष रूप से वर्णन किया गया। आचार्य हिमांशु गैरोला ने कहा कि प्रकृति मानव जीवन का आधार है और पर्वत, जल, वन तथा पर्यावरण का संरक्षण प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि गोवर्धन लीला मनुष्य को प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भाव रखने की प्रेरणा देती है। प्रकृति से केवल संसाधन प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी रक्षा करना और भावी पीढ़ियों के लिए पर्यावरण को सुरक्षित रखना भी हमारा कर्तव्य है। उन्होंने श्रद्धालुओं से जल संरक्षण, पेड़-पौधों की रक्षा और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने का संदेश दिया। कहा कि धार्मिक एवं आध्यात्मिक शिक्षाओं को दैनिक जीवन के व्यवहार में उतारकर ही उनके वास्तविक उद्देश्य को पूरा किया जा सकता है।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किया कथा श्रवण
पंचम दिवस के आयोजन में गढ़वाल सभा मेरठ के पदाधिकारी, आजीवन सदस्य और बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी श्रद्धालु उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने भक्त प्रह्लाद, भगवान नृसिंह, राजा सगर और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े प्रसंगों का श्रद्धापूर्वक श्रवण किया। पूरे आयोजन के दौरान कथा स्थल पर भक्ति और आध्यात्मिकता का वातावरण बना रहा। पंचम दिवस की कथाओं ने श्रद्धालुओं को धार्मिक प्रसंगों के साथ भक्ति, सत्य, नारी सम्मान, पारिवारिक संस्कार, पितरों के प्रति श्रद्धा और प्रकृति संरक्षण को अपने जीवन में अपनाने का संदेश दिया।