लोकतंत्र सेनानी की 45 वीं पुण्यतिथि के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते पूर्व मंत्री पंडित सुनील भराला
मेरठ/नई दिल्ली। भारतीय जनसंघ के वरिष्ठ नेता, प्रखर लोकतंत्र सेनानी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वैचारिक परंपरा के समर्पित कार्यकर्ता तथा पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के निकट सहयोगी रहे श्रद्धेय मलखान सिंह भारद्वाज की 45वीं पुण्यतिथि पर उन्हें देशभर में भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर उनके सुपुत्र, उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व राज्यमंत्री एवं वरिष्ठ समाजसेवी पंडित सुनील भराला ने अपने पूज्य पिताश्री को नमन करते हुए उनके संघर्ष, राष्ट्रभक्ति, लोकतांत्रिक मूल्यों और सिद्धांतनिष्ठ जीवन को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
पंडित सुनील भराला ने कहा कि समय का प्रवाह भले ही निरंतर आगे बढ़ता रहता है, लेकिन माता-पिता के संस्कार, उनका स्नेह और उनके द्वारा दिए गए आदर्श कभी समाप्त नहीं होते। उन्होंने कहा कि आज पिताश्री के महाप्रयाण को 45 वर्ष पूरे हो चुके हैं, किंतु आज भी ऐसा प्रतीत होता है मानो उनका आशीर्वाद प्रत्येक कदम पर उनका मार्गदर्शन कर रहा हो। उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाली हर कठिन परिस्थिति में उन्हें अपने पिता की शिक्षाएं शक्ति प्रदान करती हैं और राष्ट्रसेवा के मार्ग पर दृढ़ बनाए रखती हैं।
उन्होंने कहा कि श्रद्धेय मलखान सिंह भारद्वाज का संपूर्ण जीवन राष्ट्रहित, संगठन और समाज की सेवा को समर्पित रहा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं से प्रारंभ हुई उनकी वैचारिक यात्रा भारतीय जनसंघ के संगठनात्मक विस्तार और बाद में भारतीय जनता पार्टी की मजबूत नींव तैयार करने तक निरंतर चलती रही। उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए अनेक संघर्ष किए और आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों की पुनर्स्थापना के लिए जेल भी गए। उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्रभक्ति, संगठन के प्रति निष्ठा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का जीवंत उदाहरण माना जाता है।
पंडित भराला ने कहा कि उनके पिता केवल एक राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं थे, बल्कि सिद्धांतों के ऐसे तपस्वी थे जिन्होंने अपने जीवन में कभी भी व्यक्तिगत स्वार्थ को महत्व नहीं दिया। उन्होंने हमेशा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा और अपने परिवार सहित प्रत्येक कार्यकर्ता को यही संदेश दिया कि व्यक्ति से बड़ा राष्ट्र होता है, पद से बड़ा कर्तव्य होता है और राजनीति का सर्वोच्च उद्देश्य सत्ता प्राप्त करना नहीं बल्कि समाज एवं राष्ट्र की निस्वार्थ सेवा करना है।
उन्होंने कहा कि पूज्य पिताश्री के जीवन का प्रत्येक अध्याय संघर्ष, त्याग और समर्पण से भरा हुआ था। कठिन परिस्थितियों, राजनीतिक चुनौतियों और वैचारिक संघर्षों के बीच भी उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उन्होंने सदैव सत्य, राष्ट्रवाद और लोकतंत्र के पक्ष में खड़े होकर समाज को यह संदेश दिया कि परिस्थितियां कैसी भी हों, यदि लक्ष्य राष्ट्रहित का हो तो व्यक्ति को कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
पंडित सुनील भराला ने भावुक होते हुए कहा कि उनके पिता का संपूर्ण जीवन उन्हें यह प्रेरणा देता है कि मनुष्य को कभी थकना नहीं चाहिए, कभी हार नहीं माननी चाहिए और कभी अपने सिद्धांतों से विचलित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके पिताश्री का जीवन आज भी उन्हें यही संदेश देता है— “ना थके, ना हारे, ना टूटे… बस राष्ट्रहित में निरंतर आगे बढ़ते रहो।”
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब सार्वजनिक जीवन में नैतिक मूल्यों और सिद्धांतों की चर्चा कम होती दिखाई देती है, तब ऐसे महापुरुषों का जीवन समाज को सही दिशा प्रदान करता है। श्रद्धेय मलखान सिंह भारद्वाज का व्यक्तित्व बताता है कि राजनीति तभी सार्थक होती है जब उसका उद्देश्य जनसेवा, राष्ट्रनिर्माण और लोकतंत्र को मजबूत करना हो।
पूर्व राज्यमंत्री ने कहा कि वे स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें ऐसे महान राष्ट्रभक्त और तपस्वी व्यक्तित्व का पुत्र होने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि यदि उनके भीतर समाजसेवा, गरीबों की सहायता और राष्ट्रहित के लिए कार्य करने का भाव है, तो वह केवल उनके पिता द्वारा दिए गए संस्कारों की अमूल्य धरोहर है। सार्वजनिक जीवन के प्रत्येक निर्णय में उन्हें अपने पिता की सीख और आदर्शों का मार्गदर्शन प्राप्त होता है।
उन्होंने यह भी कहा कि श्रद्धेय मलखान सिंह भारद्वाज ने अपने जीवन से यह सिद्ध कर दिया कि लोकतंत्र केवल एक व्यवस्था नहीं बल्कि जनभावनाओं, त्याग, संघर्ष और नैतिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प है। उन्होंने लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया और यही कारण है कि आज भी संगठन के कार्यकर्ता तथा राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े लोग उन्हें अत्यंत सम्मान और श्रद्धा के साथ स्मरण करते हैं।
पंडित सुनील भराला ने कहा कि उनके पिता और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के बीच केवल राजनीतिक संबंध नहीं थे, बल्कि दोनों राष्ट्रहित और संगठन के प्रति समान समर्पण की भावना से जुड़े हुए थे। राष्ट्र निर्माण की दिशा में किए गए उनके संयुक्त प्रयास आज भी राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।
श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने संकल्प व्यक्त किया कि वे जीवन के अंतिम क्षण तक अपने पिता के दिखाए हुए सत्य, सेवा, राष्ट्रवाद और संगठन के मार्ग पर चलते हुए समाज एवं राष्ट्र की सेवा करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि उनके लिए पिताश्री का आशीर्वाद ही सबसे बड़ी पूंजी है और उनके आदर्श ही जीवन का पाथेय हैं।
अपने संदेश के अंत में पंडित सुनील भराला ने श्रद्धेय मलखान सिंह भारद्वाज को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि यद्यपि वे आज भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, उनके आदर्श, उनका त्याग और उनका राष्ट्रप्रेम सदैव समाज को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि उन्हें अपने पिता द्वारा दिखाए गए राष्ट्रधर्म, सेवा और कर्तव्यनिष्ठा के मार्ग पर सदैव अडिग रहने की शक्ति प्रदान करें।
श्रद्धेय मलखान सिंह भारद्वाज की 45वीं पुण्यतिथि केवल एक स्मृति दिवस नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद, लोकतंत्र, संगठन और जनसेवा के उन अमर मूल्यों को पुनः स्मरण करने का अवसर है, जिनके लिए उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व आने वाली पीढ़ियों को सदैव राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता रहेगा ।