रघुनाथ गर्ग पीजी कॉलेज में आयोजित सावन और लोकगीत कार्यक्रम में छात्राओं ने दी रंगारंग प्रस्तुति
रघुनाथ गर्ल्स पीजी कॉलेज में ‘सावन और लोकगीत’ कार्यक्रम का आयोजन
मेरठ । रघुनाथ गर्ल्स पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, मेरठ में बुधवार को ‘सावन और लोकगीत : भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपरा’ विषय पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. निवेदिता कुमारी के संरक्षण में संगीत विभाग, रवीन्द्रनाथ टैगोर सांस्कृतिक क्लब एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का आयोजन संगीत समाज म्यूजिक कॉलेज के साथ हुए एमओयू के अंतर्गत किया गया।
लोक संगीत भावनाओं और परंपराओं के संरक्षण का माध्यम : प्राचार्या
कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. निवेदिता कुमारी ने छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में लोक संगीत का विशेष महत्व है। लोक संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह लोगों की भावनाओं, सामाजिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। उन्होंने छात्राओं से भारतीय लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का आह्वान किया। इस अवसर पर रवीन्द्रनाथ टैगोर सांस्कृतिक क्लब की अध्यक्ष प्रो. अर्चना रानी तथा भारतीय ज्ञान परंपरा की अध्यक्षा डॉ. उपासना सिंह भी उपस्थित रहीं।
दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ
संगीत समाज म्यूजिक कॉलेज की प्राचार्या श्रीमती रुचिका सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने छात्राओं को भारतीय संस्कृति की विशेषताओं से परिचित कराते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की प्राचीनतम और समृद्ध संस्कृतियों में से एक है। उन्होंने कहा कि समय के साथ बदलावों के बावजूद भारतीय संस्कृति अपने मूल स्वरूप और मूल्यों के साथ आज भी जीवंत बनी हुई है।

सावन के लोकगीतों में प्रेम, विरह और प्रकृति का वर्णन
संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. किरन शर्मा ने सावन के महीने में लोकगीतों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सावन से जुड़े लोकगीतों में प्रेम और विरह के भावों के साथ-साथ पारिवारिक रिश्तों, वर्षा की सुंदरता और प्रकृति के मनोहारी स्वरूप का वर्णन मिलता है। इन गीतों के माध्यम से लोक जीवन की भावनाओं और परंपराओं की अभिव्यक्ति होती है। कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. स्वाति शर्मा ने कहा कि सावन भारतीय संस्कृति और लोक जीवन का महत्वपूर्ण महीना है। सावन के साथ कजरी, झूला और मल्हार जैसे लोकगीतों की परंपरा विशेष रूप से जुड़ी हुई है। इन लोकगीतों में ग्रामीण जीवन, ऋतु परिवर्तन, प्रकृति और मानवीय भावनाओं की सुंदर अभिव्यक्ति देखने को मिलती है।

तबला वादन और लोकगीतों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
संगीत विभाग के तबला वादक श्री हेमन्त शुक्ला ने लोकगीतों में प्रयुक्त होने वाली विभिन्न तालों के संबंध में छात्राओं को महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने लोक संगीत में ताल और लय की भूमिका को समझाया। कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय की छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विभिन्न लोकगीतों की प्रस्तुतियां दीं। नैना, वंशिका, प्रिया विश्वास, रियांशी, गौरी साहनी और गौरी पंजगोत्रा आदि छात्राओं ने लोकगीतों की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया। वहीं भूमिका, आनंदिता, यादवी और वंशिका ने नृत्य की शानदार प्रस्तुति देकर उपस्थित लोगों की सराहना प्राप्त की।
शिक्षिकाओं एवं सहयोगी टीम का रहा योगदान
कार्यक्रम को सफल बनाने में संगीत विभाग की शिक्षिकाओं डॉ. सुमन सिंह, रुकैय्या, श्रीमती कविता तथा सिम्मी सैनी का विशेष योगदान रहा। इसके अलावा संगीत समाज म्यूजिक कॉलेज की ओर से श्री रूपम शर्मा, स्वाति नौटियाल एवं भव्या उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को भारतीय लोक संगीत, सावन की सांस्कृतिक परंपराओं और लोक जीवन से जुड़े गीत-संगीत की विरासत को समझने का अवसर मिला