15 साल पुराने वाहनों पर परिवहन विभाग का शिकंजा
मेरठ। शहर की सड़कों पर निर्धारित अवधि पूरी कर चुके पुराने वाहनों के खिलाफ परिवहन विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। मंगलवार सुबह एआरटीओ सुधांशु रंजन के नेतृत्व में परिवहन विभाग की टीम ने अभियान शुरू किया। कार्रवाई के दौरान करीब एक दर्जन क्रेन को सड़कों पर उतारा गया। टीम ने मेरठ के प्रमुख मार्गों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में ऐसे वाहनों की जांच की, जिनकी निर्धारित वैध अवधि पूरी हो चुकी है।
परिवहन विभाग के इस अभियान का मुख्य उद्देश्य निर्धारित अवधि पूरी कर चुके पुराने वाहनों को सड़क से हटाने के साथ-साथ यातायात व्यवस्था और सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाना है। अधिकारियों का कहना है कि पुराने वाहनों की स्थिति और उनके दस्तावेजों की वैधता की जांच की जा रही है तथा नियमों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
जागरूकता के बाद अब कार्रवाई का दौर
परिवहन विभाग की ओर से अब तक दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में 15 वर्ष और 10 वर्ष की निर्धारित अवधि पूरी करने वाले वाहनों के स्वामियों को जागरूक करने और स्वयं वाहन सरेंडर करने के लिए प्रेरित किया जा रहा था। वाहन स्वामियों से अपील की गई थी कि वे निर्धारित अवधि पूरी कर चुके वाहनों को स्वयं हटाकर प्रदूषण नियंत्रण और बेहतर यातायात व्यवस्था में सहयोग करें।
हालांकि, विभाग के अनुसार जागरूकता अभियान का अपेक्षित प्रभाव नहीं दिखाई देने के बाद अब सड़क पर कार्रवाई का सिलसिला शुरू किया गया है। मंगलवार को इसी क्रम में परिवहन विभाग की टीम ने विभिन्न स्थानों पर वाहनों की जांच की और निर्धारित अवधि पूरी कर चुके वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की।
आरसी, फिटनेस और प्रदूषण प्रमाणपत्र की जांच
अभियान के दौरान परिवहन विभाग की टीम ने वाहनों के दस्तावेज, पंजीकरण, वैधता, फिटनेस और प्रदूषण प्रमाणपत्र समेत जरूरी कागजात की जांच की। कार्रवाई का विशेष फोकस उन वाहनों पर रहा, जो निर्धारित 15 वर्ष की अवधि पूरी कर चुके हैं।
अधिकारियों ने वाहन स्वामियों से अपील की है कि वे अपने वाहनों की स्थिति और सभी जरूरी दस्तावेजों की वैधता पहले ही जांच लें। निर्धारित अवधि पूरी कर चुके वाहन को लेकर नियमों के अनुरूप प्रक्रिया पूरी करना वाहन स्वामी के लिए बेहतर होगा, ताकि सड़क पर वाहन चलाने के दौरान कार्रवाई का सामना न करना पड़े।
जरूरत पड़ने पर क्रेन से हटाए जाएंगे पुराने वाहन
परिवहन विभाग ने अभियान को प्रभावी बनाने के लिए करीब एक दर्जन क्रेन को कार्रवाई में लगाया है। जांच के दौरान जहां भी निर्धारित अवधि पूरी कर चुका वाहन पाया जा रहा है, वहां उसकी स्थिति और दस्तावेजों की जांच की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर क्रेन की मदद से वाहन को सड़क से हटाया जा रहा है।
विभाग की कार्रवाई केवल चालान तक सीमित नहीं रहने वाली है। नियमों के अनुसार निर्धारित अवधि पूरी कर चुके वाहनों के निस्तारण और अन्य वैधानिक प्रक्रिया को भी अपनाया जाएगा। इससे ऐसे वाहनों को दोबारा सड़क पर संचालित किए जाने की संभावना को कम करने में मदद मिलेगी।
वाहन स्वामियों के लिए स्क्रैप नीति में भी लाभ
पुराने वाहन को अधिकृत स्क्रैप सेंटर पर जमा कराने पर वाहन स्वामी को उसकी स्क्रैप वैल्यू मिल सकती है। इसके अलावा पात्र मामलों में पुराने वाहन को स्क्रैप कराने के बाद नया वाहन खरीदने पर मिलने वाले प्रोत्साहन या छूट का लाभ भी मिल सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ संबंधित राज्य के नियमों और वाहन डीलर की योजना पर निर्भर करेगा।
पुराने वाहनों के मामले में लगातार मरम्मत, पार्ट्स बदलने और रखरखाव का खर्च भी बढ़ सकता है। ऐसे में निर्धारित अवधि पूरी कर चुके वाहन का नियमानुसार निस्तारण करने से वाहन स्वामी को भविष्य में होने वाले अतिरिक्त खर्च और दस्तावेज संबंधी परेशानियों से भी राहत मिल सकती है।
पुराने वाहनों से प्रदूषण और सुरक्षा से जुड़ी चिंता
परिवहन विभाग के अभियान का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य प्रदूषण नियंत्रण भी है। पुराने वाहन अपेक्षाकृत अधिक प्रदूषण फैलाने वाले हो सकते हैं। ऐसे वाहनों को नियमानुसार सड़क से हटाने और निस्तारित करने से प्रदूषण संबंधी कार्रवाई की आशंका कम हो सकती है।
इसके साथ ही पुराने वाहनों में ब्रेक, टायर, स्टीयरिंग और अन्य तकनीकी हिस्सों से संबंधित खराबी का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे वाहनों की नियमित जांच और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सड़क से हटाने से यातायात सुरक्षा को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
अधिकृत स्क्रैप सेंटर से निस्तारण पर जोर
परिवहन विभाग की ओर से वाहन स्वामियों को सलाह दी जा रही है कि निर्धारित अवधि पूरी कर चुके वाहनों का निस्तारण नियमानुसार अधिकृत स्क्रैप सेंटर के माध्यम से ही कराया जाए। इससे वाहन के रिकॉर्ड को नियमों के अनुसार बंद कराने की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
वाहन का रिकॉर्ड नियमानुसार बंद होने से भविष्य में उस पुराने वाहन के गलत इस्तेमाल की आशंका को भी कम किया जा सकता है। इसलिए वाहन स्वामियों के लिए जरूरी है कि वे अपने वाहन की वैधता और दस्तावेजों की स्थिति को लेकर समय रहते आवश्यक प्रक्रिया पूरी करें।
एआरटीओ सुधांशु रंजन बोले – वाहन स्वामी भी दिखाएं जागरूकता
एआरटीओ सुधांशु रंजन ने कहा कि अब केवल परिवहन विभाग की कार्रवाई ही नहीं, बल्कि वाहन स्वामियों की जागरूकता भी जरूरी है। 15 वर्ष पुराने वाहन को सड़क से हटाने का उद्देश्य केवल कार्रवाई से बचना नहीं है, बल्कि यातायात सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण और नियमों का पालन सुनिश्चित करना भी है।
उन्होंने वाहन स्वामियों से अपील की कि वे अपने पुराने वाहनों की वैधता और दस्तावेजों की जांच करें तथा निर्धारित अवधि पूरी कर चुके वाहनों के संबंध में नियमानुसार निस्तारण की प्रक्रिया अपनाएं। परिवहन विभाग का यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।