राजुद्दीन गादरे
800 किलोमीटर दूर न्याय व्यवस्था पर उठाए सवाल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग तेज
मेरठ । पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग एक बार फिर जोर पकड़ती दिखाई दे रही है। बहुजन मुक्ति पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं उत्तर प्रदेश और दिल्ली प्रदेश प्रभारी राजुद्दीन गादरे ने मेरठ में हाईकोर्ट बेंच स्थापित किए जाने की मांग को लेकर सरकार से ठोस निर्णय लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता पिछले कई दशकों से हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर संघर्ष कर रही है और अब इस मांग को केवल आश्वासनों तक सीमित नहीं रखा जा सकता।
800 किलोमीटर दूर न्याय क्यों?
राजुद्दीन गादरे ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा प्रदेश है और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़ी आबादी निवास करती है। इसके बावजूद इस क्षेत्र के लोगों को हाईकोर्ट से संबंधित मामलों के लिए प्रयागराज तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब न्याय जनता के दरवाजे तक आसानी से पहुंचना चाहिए, तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को न्याय के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर क्यों जाना पड़े? उनके अनुसार यह केवल भौगोलिक दूरी का विषय नहीं है, बल्कि न्याय तक समान, सुलभ और व्यावहारिक पहुंच का प्रश्न है।
प्रयागराज में मुख्य पीठ, लखनऊ में स्थायी बेंच
गादरे ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की प्रधान पीठ प्रयागराज में स्थित है, जबकि लखनऊ में स्थायी पीठ कार्यरत है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए लंबे समय से हाईकोर्ट बेंच की मांग उठती रही है, लेकिन अभी तक इस दिशा में ठोस निर्णय नहीं हो सका है।
उन्होंने कहा कि पश्चिमी यूपी के लोगों के लिए मेरठ में हाईकोर्ट बेंच स्थापित होने से न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच आसान हो सकती है और क्षेत्र के लोगों को लंबी दूरी की यात्राओं से राहत मिल सकती है।
पश्चिमी यूपी के मामलों का बड़ा हिस्सा होने का दावा
राजुद्दीन गादरे ने विभिन्न रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के करीब 22 जिलों से हाईकोर्ट में आने वाले मामलों का हिस्सा 50 प्रतिशत से अधिक बताया जाता रहा है। उनका कहना है कि यदि इस क्षेत्र से बड़ी संख्या में मुकदमे हाईकोर्ट तक पहुंचते हैं तो यहां हाईकोर्ट की बेंच स्थापित करने की आवश्यकता पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र में न्यायिक बुनियादी ढांचे का विस्तार न केवल आम लोगों के लिए सुविधाजनक होगा, बल्कि वकीलों, वादकारियों और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े अन्य लोगों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।
आसपास के राज्यों का उदाहरण देकर उठाया सवाल
गादरे ने कहा कि मेरठ के आसपास के क्षेत्रों में विभिन्न राज्यों की उच्च न्यायालय व्यवस्था अपेक्षाकृत अलग भौगोलिक स्थिति में है। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट, उत्तराखंड हाईकोर्ट और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि जब पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता अपने ही राज्य के हाईकोर्ट तक पहुंचने के लिए इतनी लंबी दूरी तय करती है, तो इस क्षेत्र में हाईकोर्ट बेंच की मांग पर निर्णायक कदम क्यों नहीं उठाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए यह केवल दूरी का सवाल नहीं है, बल्कि न्यायिक पहुंच और क्षेत्रीय संतुलन से जुड़ा विषय है।
फरवरी 2026 में राज्यसभा में भी उठा था मुद्दा
गादरे ने कहा कि फरवरी 2026 में राज्यसभा में केंद्र सरकार से मेरठ में हाईकोर्ट बेंच स्थापित करने के संबंध में सवाल पूछा गया था। उनके अनुसार केंद्र सरकार की ओर से दिए गए जवाब में बताया गया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच स्थापित करने के संबंध में केंद्र सरकार के पास उस समय कोई पूर्ण प्रस्ताव लंबित नहीं था।
उन्होंने कहा कि सरकार के जवाब के अनुसार हाईकोर्ट बेंच की स्थापना के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत राज्य सरकार की ओर से पूर्ण प्रस्ताव, आवश्यक आधारभूत ढांचा, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की भूमिका तथा राज्यपाल की सहमति जैसी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण हैं।
अब सवाल—ठोस प्रस्ताव कब आएगा?
गादरे ने कहा कि यदि हाईकोर्ट बेंच की मांग दशकों पुरानी है, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इसकी आवश्यकता लगातार उठाई जा रही है और इस विषय पर विभिन्न स्तरों पर चर्चा भी होती रही है, तो अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार इस दिशा में ठोस पहल कब करेंगी?
उन्होंने कहा कि जनता को बार-बार आश्वासन देने के बजाय सरकार को इस मुद्दे पर स्पष्ट रोडमैप तैयार करना चाहिए और आवश्यक प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहिए।
‘सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस फैसला चाहिए’
राजुद्दीन गादरे ने कहा कि मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता को न्याय के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों तक जाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को हाईकोर्ट बेंच की आवश्यकता है और इस मांग पर अब निर्णायक कदम उठाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “मेरठ की जनता को न्याय के लिए दूर-दराज भटकने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को उसका हाईकोर्ट बेंच का अधिकार मिलना चाहिए। अब सिर्फ आश्वासन नहीं—ठोस फैसला चाहिए।”
बहुजन मुक्ति पार्टी ने रखीं तीन प्रमुख मांगें
बहुजन मुक्ति पार्टी की ओर से इस मुद्दे पर तीन प्रमुख मांगें रखी गई हैं। पार्टी का कहना है कि—
- मेरठ में हाईकोर्ट बेंच स्थापित की जाए।
- पश्चिमी उत्तर प्रदेश को न्याय तक आसान और समान पहुंच सुनिश्चित की जाए।
- दशकों पुरानी हाईकोर्ट बेंच की मांग पर अब निर्णायक फैसला लिया जाए।
गादरे ने कहा कि न्याय व्यवस्था का उद्देश्य आम नागरिक को समय पर और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है। ऐसे में न्यायिक संस्थानों की भौगोलिक पहुंच भी महत्वपूर्ण विषय है।
‘न्याय दूर नहीं, जनता के पास होना चाहिए’
राजुद्दीन गादरे ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता लंबे समय से इस मांग को लेकर अपनी आवाज उठा रही है। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था को आम नागरिक के लिए अधिक सुलभ और सुविधाजनक बनाने की दिशा में मेरठ में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।
उन्होंने अपने अभियान का संदेश देते हुए कहा—“न्याय दूर नहीं—जनता के पास होना चाहिए।”
गादरे का हुंकार—‘हाईकोर्ट बेंच लेकर रहेंगे’
बहुजन मुक्ति पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं उत्तर प्रदेश और दिल्ली प्रदेश प्रभारी राजुद्दीन गादरे ने हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर आंदोलन और जनआवाज को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता की इस लंबे समय से चली आ रही मांग को मजबूती से उठाया जाएगा।
उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा—“हाईकोर्ट बेंच लेकर रहेंगे!”