सचिन सिरोही प्रकरण में डासना के यति नरसिंहानंद ने मीडियाकर्मियों से की वार्ता
मेरठ पहुंचकर सचिन सिरोही से मिले यति नरसिंहानंद, बोले- उन्हें अकेला न समझा जाए; प्रशासन और पुलिस के कुछ अधिकारियों पर भी लगाए आरोप
मेरठ । गाजियाबाद स्थित डासना देवी मंदिर से जुड़े यति नरसिंहानंद सरस्वती ने मेरठ में हिंदूवादी नेता सचिन सिरोही से जुड़े प्रकरण को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। सचिन सिरोही के खिलाफ दर्ज मुकदमे के बाद उनसे मुलाकात करने पहुंचे यति नरसिंहानंद ने दावा किया कि उन्हें नुकसान पहुंचाने की साजिश की जा रही है और इसके पीछे बड़े स्तर पर फंडिंग की जा रही है। उन्होंने प्रशासन और पुलिस के कुछ अधिकारियों पर भी धन लेने जैसे आरोप लगाए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सचिन सिरोही को अकेला न समझने की अपील
यति नरसिंहानंद ने कहा कि सचिन सिरोही को किसी भी स्थिति में अकेला नहीं समझा जाना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे मामले की जांच कराने और सचिन सिरोही को आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि वह सचिन सिरोही के समर्थन में अपनी आवाज उठाते रहेंगे। सचिन सिरोही से जुड़ा विवाद मेरठ के केसरगंज प्रकरण के बाद चर्चा में आया था। सितंबर में केसरगंज मंडी स्थित मस्जिद को लेकर विवाद के बीच पुलिस-प्रशासन ने क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाई थी और सचिन सिरोही को नजरबंद किए जाने की खबरें सामने आई थीं।
दारुल उलूम देवबंद को लेकर भी लगाए आरोप
यति नरसिंहानंद ने दारुल उलूम देवबंद को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि सचिन सिरोही से जुड़े घटनाक्रम के पीछे दारुल उलूम से जुड़े लोगों की भूमिका है। उन्होंने संस्था को लेकर आतंकवाद और जेहाद से संबंधित आरोप भी लगाए। उन्होंने दारुल उलूम से जुड़े प्रमुख मौलाना अरशद मदनी के राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव का भी उल्लेख किया। यति नरसिंहानंद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के साथ मदनी के कथित संपर्कों का दावा करते हुए इसे उत्तर प्रदेश की राजनीति से जोड़ने की बात कही। इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
हिंदू संगठनों से जुड़े मुद्दे उठाने का किया दावा
यति नरसिंहानंद ने कहा कि सचिन सिरोही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हिंदू संगठनों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहे हैं। उनके मुताबिक, इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने सचिन सिरोही के खिलाफ दर्ज मुकदमे को अनुचित बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने आशंका जताई कि सचिन सिरोही के खिलाफ कार्रवाई का उद्देश्य हिंदू संगठनों की आवाज को कमजोर करना है। इसी संदर्भ में उन्होंने वर्ष 2019 में हुई हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी की हत्या का भी उल्लेख किया और सचिन सिरोही को लेकर अपनी आशंका व्यक्त की।
राजनीतिक दलों पर भी साधा निशाना
यति नरसिंहानंद ने किसी राजनीतिक दल का नाम लिए बिना कुछ राजनीतिक दलों पर हिंदुत्व से समझौता करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक परिस्थितियों के साथ कुछ नेताओं ने अपने पुराने विचारों से समझौता किया है। इस दौरान उन्होंने हिंदू संगठनों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर भी अपनी बात रखी।
फ्लाईदुबई मामले का भी किया उल्लेख
बयान के दौरान यति नरसिंहानंद ने फ्लाईदुबई की एक उड़ान में भारतीय कैप्टन से कथित मारपीट के मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने इस घटना को दारुल उलूम से जोड़ते हुए एक दावा किया। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हुई है।
केसरगंज विवाद और राशिद अखलाक का भी जिक्र
मेरठ के केसरगंज मस्जिद विवाद के दौरान बसपा नेता राशिद अखलाक की ओर से निकाले गए जुलूस से जुड़े सवालों पर भी यति नरसिंहानंद ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मेरठ की कानून-व्यवस्था और कथित आपराधिक गतिविधियों को लेकर आरोप लगाए तथा राशिद अखलाक के एक रिश्तेदार के आपराधिक मामले में शामिल होने का दावा किया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग दोहराई
यति नरसिंहानंद ने अपने बयान के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग दोहराई। उन्होंने सचिन सिरोही की सुरक्षा, उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे की निष्पक्षता और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हिंदू संगठनों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। गौरतलब है कि सचिन सिरोही के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अलग-अलग संगठनों की ओर से प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, केसरगंज प्रकरण के बाद उनके खिलाफ शिकायतें और मुकदमे से जुड़ी कार्रवाई चर्चा में रही है।