भाजपा सांसद से वार्ता करने पहुंचे डी जे एसोसिएशन के सदस्य
मेरठ। सावन माह की कांवड़ यात्रा के दौरान धार्मिक भजनों के लिए डीजे संचालन पर संभावित प्रतिबंध को लेकर मेरठ डीजे एंड साउंड एसोसिएशन ने राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेयी से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। एसोसिएशन ने मांग की कि शिवभक्तों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए कांवड़ यात्रा में धार्मिक भजन प्रसारित करने के लिए डीजे संचालन की अनुमति प्रदान कराई जाए।
ज्ञापन में कहा गया कि प्रत्येक वर्ष सावन माह में लाखों श्रद्धालु हरिद्वार से गंगाजल लेकर मेरठ सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों तक कांवड़ यात्रा करते हैं। इस दौरान अनेक कांवड़ समितियां भगवान शिव के भजनों के प्रसारण के लिए डीजे का उपयोग करती हैं, जिससे यात्रा का धार्मिक वातावरण और उत्साह बना रहता है।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों का आरोप है कि वर्ष 2025 की कांवड़ यात्रा के दौरान उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश पुलिस प्रशासन ने डीजे संचालन पर रोक लगाकर कई स्थानों पर श्रद्धालुओं और डीजे संचालकों को परेशान किया था। उनका कहना है कि रुड़की से उत्तर प्रदेश सीमा तक डीजे वाहनों को रोककर उत्पीड़न किया गया, जिससे श्रद्धालुओं में नाराजगी फैल गई थी। इस वर्ष भी इसी प्रकार की रोक लगाए जाने की आशंका जताई जा रही है।
ज्ञापन प्राप्त करने के बाद राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों से पूरे प्रकरण की जानकारी लेकर शीघ्र समाधान कराने की बात कही। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के प्रशासनिक अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर ऐसा समाधान निकाला जाएगा जिससे श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था भी बनी रहे और प्रशासनिक व्यवस्थाएं भी प्रभावित न हों। उन्होंने स्वयं भी अधिकारियों से वार्ता कर समस्या का शीघ्र निस्तारण कराने का आश्वासन दिया।
सांसद के आश्वासन से उत्साहित एसोसिएशन के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने “लक्ष्मीकांत बाजपेयी जिंदाबाद” के नारे लगाए और अपना धरना-प्रदर्शन समाप्त कर दिया।
इस अवसर पर एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष हेमंत शाक्य, जिला महासचिव दीपू सैनी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुनील उर्फ चिंटू, उपाध्यक्ष अनुज कुमार, सचिव राकेश कुमार, कोषाध्यक्ष मनीष अरोड़ा, मीडिया प्रभारी हिमांशु सहित बड़ी संख्या में डीजे संचालक एवं व्यापारी उपस्थित रहे।
एसोसिएशन की प्रमुख मांग है कि कांवड़ यात्रा के दौरान केवल धार्मिक भजनों के प्रसारण के लिए डीजे संचालन की अनुमति दी जाए तथा श्रद्धालुओं और डीजे संचालकों के साथ किसी प्रकार का अनावश्यक उत्पीड़न न किया जाए, जिससे धार्मिक आस्था और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच संतुलन बना रहे।