भाकियू जिला अध्यक्ष अनुराग चौधरी से वार्ता करते एसपी सिटी विनायक गोपाल भोंसले
मेरठ। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) टिकैत के राष्ट्रीय आह्वान पर मंगलवार को मेरठ में किसानों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया। भाकियू के जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी के नेतृत्व में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों किसान दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ मेरठ पहुंचे और कमिश्नरी तथा कलेक्ट्रेट का घेराव किया। किसानों ने खाद की कमी, गन्ना भुगतान, बिजली लोड, तहसीलों में भ्रष्टाचार, समितियों में ब्याज संबंधी अनियमितताओं, तालाबों और नालों की सफाई समेत कई मुद्दों को लेकर प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।

कमिश्नरी चौराहे पर जुटे हजारों किसान
सुबह से ही किसान मेरठ कॉलेज के सामने कमिश्नरी चौराहे पर एकत्र होने लगे। सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के पहुंचने से कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ। हालांकि भाकियू जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने स्वयं मोर्चा संभालते हुए किसानों को व्यवस्थित किया, जिसके बाद आवागमन सामान्य कराया गया।
इसके बाद किसान कमिश्नरी के मुख्य द्वार पर पहुंच गए और मंडलायुक्त अथवा उनके प्रतिनिधि को ज्ञापन देने की मांग पर अड़ गए। काफी देर तक कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, जिससे किसानों में नाराजगी बढ़ गई।
अधिकारियों को दी चेतावनी
धरना स्थल पर अनुराग चौधरी ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि निर्धारित समय में अधिकारी ज्ञापन लेने नहीं पहुंचे तो किसान कमिश्नरी के गेट खोलकर अंदर प्रवेश करेंगे। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और अपर मंडलायुक्त अमित कुमार किसानों के बीच पहुंचे।
अपर मंडलायुक्त को किसानों ने 210 सूत्रीय ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि यदि एक माह के भीतर समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो कमिश्नरी पर विशाल किसान महापंचायत आयोजित की जाएगी।

ट्रैक्टर मार्च निकालते हुए पहुंचे कलेक्ट्रेट
कमिश्नरी पर प्रदर्शन के बाद किसान ट्रैक्टर मार्च और पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। इस दौरान पुलिस प्रशासन ने किसानों को रोकने और समझाने का प्रयास किया, लेकिन किसान जिला मुख्यालय पहुंचकर ही धरने पर बैठे।
कलेक्ट्रेट परिसर और बाहर ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़ी कर किसानों ने पंचायत शुरू की। पंचायत की अध्यक्षता किसान नेता शुक्रमपाल ने की, जबकि संचालन हर्ष चहल और अनूप यादव ने संयुक्त रूप से किया।
डीएम से वार्ता की मांग पर अड़े किसान
धरने के दौरान अनुराग चौधरी ने प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि सूर्यास्त से पहले जिलाधिकारी किसानों से वार्ता करें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि डीएम किसानों की समस्याएं नहीं सुनेंगे तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि किसान लगातार खाद की कमी, गन्ना भुगतान में देरी, बिजली के बढ़े हुए लोड, तहसीलों में भ्रष्टाचार, सहकारी समितियों में अनियमितताओं और गांवों में जल निकासी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इन मुद्दों पर जिला स्तर पर समाधान नहीं हो रहा है, जिसके कारण किसानों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
अमेरिका ट्रेड डील का भी किया विरोध
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने केंद्र सरकार की प्रस्तावित अमेरिका ट्रेड डील का भी विरोध जताया। किसान नेताओं का कहना था कि ऐसी किसी भी व्यापारिक नीति से किसानों के हित प्रभावित नहीं होने चाहिए और सरकार को कृषि एवं किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
डीएम से एक घंटे चली वार्ता
शाम को जिलाधिकारी डॉ. वी.के. सिंह कलेक्ट्रेट पहुंचे। एडीएम सिटी, एडीएम राजस्व, एडीएम भूमि तथा एसपी सिटी की मौजूदगी में भाकियू के 25 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने करीब एक घंटे तक जिलाधिकारी से वार्ता की।
प्रतिनिधिमंडल ने किसानों की सभी समस्याओं को विस्तार से रखा। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों के माध्यम से मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद किसानों ने प्रशासन को एक माह का समय देते हुए धरना समाप्त करने का निर्णय लिया।
एक माह में समाधान नहीं हुआ तो होगा अनिश्चितकालीन आंदोलन
वार्ता के बाद अनुराग चौधरी ने कहा कि यदि एक माह के भीतर किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो भाकियू मेरठ इकाई कमिश्नरी पर विशाल किसान महापंचायत आयोजित करेगी और उसके बाद अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि किसान अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे और किसी भी प्रकार के शोषण को स्वीकार नहीं करेंगे।
प्रधानमंत्री के नाम भी सौंपा ज्ञापन
धरना समाप्त होने से पहले भाकियू नेताओं ने संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से देश के प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन भी एडीएम सिटी और एसपी सिटी को सौंपा। इसके बाद किसानों ने शांतिपूर्ण ढंग से धरना समाप्त किया और अपने-अपने गांवों की ओर रवाना हो गए।
किसानों की प्रमुख मांगें
- गन्ना किसानों का लंबित भुगतान शीघ्र कराया जाए।
- सहकारी समितियों पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाए।
- समितियों में ब्याज और खाद वितरण में कथित भ्रष्टाचार की जांच हो।
- बिजली के बढ़े हुए लोड से किसानों को राहत दी जाए।
- तहसीलों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर प्रभावी कार्रवाई हो।
- गांवों के तालाबों और नालों की सफाई कराई जाए।
- किसानों की लंबित समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।
भाकियू के इस प्रदर्शन में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान और संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे। आंदोलन पूरे दिन शांतिपूर्ण रहा, हालांकि प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए थे। अब किसानों की नजर प्रशासन द्वारा अगले एक माह में किए जाने वाले कार्रवाई पर रहेगी।