शास्त्री नगर सेक्टर 2 में 38 वर्ग मीटर के मकानों का निरक्षण करती आवास विकास की टीम
मेरठ। शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में अपने मकानों को बचाने की लड़ाई लड़ रही महिलाओं को सोमवार को कुछ राहत और उम्मीद की किरण दिखाई दी। पिछले दो माह से अधिक समय से धरने पर बैठी महिलाओं की मांगों और आशंकाओं को देखते हुए कानपुर से आई तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने आवास एवं विकास परिषद के अधिकारियों के साथ क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण किया। टीम ने यह जांचने का प्रयास किया कि बिना भवनों को नुकसान पहुंचाए सेटबैक हटाने अथवा नियमानुसार व्यवस्था करने की कोई तकनीकी संभावना है या नहीं।
सोमवार को सेक्टर-2 स्थित 37.83 वर्ग मीटर श्रेणी के 23 मकानों का सर्वेक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने भवनों की संरचनात्मक मजबूती का आकलन किया। टीम का नेतृत्व एसोसिएट प्रोफेसर मनीष कुमार कर रहे थे, जबकि आवास एवं विकास परिषद की ओर से अधिशासी अभियंता अभिषेक राज मौजूद रहे।
रिबाउंड हैमर से हुई भवनों की तकनीकी जांच
विशेषज्ञों ने भवनों के पिलरों और दीवारों की क्षमता मापने के लिए रिबाउंड हैमर तकनीक का प्रयोग किया। इसके अलावा मकानों की छतों पर रखी पानी की टंकियों की क्षमता, दीवारों की मोटाई, भवनों में निर्मित अतिरिक्त तल, निवास करने वाले लोगों की संख्या तथा अन्य संरचनात्मक पहलुओं का भी बारीकी से परीक्षण किया गया।
जांच टीम ने मकान मालिकों और महिलाओं से कई महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाईं। इनमें यह पूछा गया कि भवनों में लगे पिलर ईंटों से निर्मित हैं या फिर सीमेंट, बजरी और सरिए से बने हैं। मकान कितने पुराने हैं, उनकी अंतिम मरम्मत कब हुई थी, वर्तमान में उनमें कितने लोग निवास कर रहे हैं तथा पानी की टंकी की क्षमता कितनी है, जैसी जानकारियां भी एकत्र की गईं। महिलाओं ने टीम को अपने घरों के अंदर बने निर्माण कार्य और वास्तविक स्थिति भी दिखाई।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई कार्रवाई
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 9 अप्रैल को दिए गए ध्वस्तीकरण संबंधी आदेश के बाद आवास एवं विकास परिषद ने शास्त्रीनगर क्षेत्र के 815 भवनों को नोटिस जारी किए थे। परिषद का कहना है कि इन भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं और नियमानुसार निर्धारित सेटबैक का पालन नहीं किया गया है।
परिषद ने भवन स्वामियों को व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने तथा नियमों के अनुरूप सेटबैक छोड़ने के निर्देश दिए हैं। इसके चलते सेंट्रल मार्केट की कई दुकानें पहले ही बंद हो चुकी हैं, जबकि कुछ दुकानदारों ने स्वेच्छा से सेटबैक छोड़कर निर्माण हटाने की प्रक्रिया भी पूरी कर ली है।
महिलाओं का दर्द: छोटी सी तोड़फोड़ से गिर सकते हैं मकान
धरने पर बैठी महिलाओं का कहना है कि क्षेत्र के अधिकांश मकान अल्प आय और दुर्बल आय वर्ग के लोगों के हैं। इन मकानों का निर्माण वर्षों पहले सीमित संसाधनों में हुआ था। कई घरों में शौचालय और स्नानघर तक छज्जों के ऊपर बने हुए हैं।
महिलाओं का दावा है कि अधिकांश मकान केवल चार इंच मोटी दीवारों पर आधारित हैं। ऐसे में यदि सेटबैक के नाम पर किसी प्रकार की तोड़फोड़ की जाती है तो भवनों की संरचना कमजोर हो सकती है और उनके गिरने का खतरा पैदा हो सकता है। यही कारण है कि क्षेत्रवासी लगातार अपने मकानों की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।
गोल मंदिर क्षेत्र की महिलाओं का विरोध जारी
दूसरी ओर गोल मंदिर के निकट सेक्टर-3 और सेक्टर-4 के चौराहे पर धरने पर बैठी महिलाओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे किसी भी हालत में सर्वे टीम को अपने घरों के अंदर प्रवेश नहीं करने देंगी। उनका कहना है कि चाहे मकान छोटे हों या बड़े, वे सेटबैक के लिए किसी प्रकार की तोड़फोड़ स्वीकार नहीं करेंगी।
महिलाओं ने कहा कि उनके लिए मकान केवल संपत्ति नहीं बल्कि जीवनभर की जमा पूंजी और परिवार का आशियाना हैं। इसलिए वे अपने घरों को बचाने के लिए संघर्ष जारी रखेंगी।
परिषद ने दोहराया सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन का संकल्प
उप आवास आयुक्त अनिल कुमार सिंह ने कहा कि आवास एवं विकास परिषद सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पूर्ण अनुपालन कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है और तकनीकी रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
फिलहाल तकनीकी सर्वेक्षण के बाद क्षेत्रवासियों की निगाहें विशेषज्ञों की रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि रिपोर्ट में भवनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कोई वैकल्पिक समाधान निकलता है तो सैकड़ों परिवारों को राहत मिल सकती है। वहीं दूसरी ओर परिषद के लिए भी न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।