70 साल पुराने घरों पर अतिक्रमण नोटिस के विरोध में ग्रामीणों का कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन भाकियू का मिला समर्थन
बागपत। रमाला थाना क्षेत्र के बिराल गांव के ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा जारी अतिक्रमण नोटिस के विरोध में मंगलवार को कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग उनके लगभग 70 साल पुराने मकानों को अवैध बताकर हटाने की तैयारी कर रहा है। प्रदर्शन को भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) का भी समर्थन मिला।
ग्रामीणों के अनुसार, दिल्ली-सहारनपुर हाईवे के किनारे स्थित भूमि पर करीब 120 परिवार वर्षों से निवास कर रहे हैं। उनका कहना है कि कुछ मकान पुश्तैनी जमीन पर बने हुए हैं, जबकि कई परिवारों ने कानूनी प्रक्रिया के तहत अपने घरों का निर्माण कराया है।
ग्रामीणों ने बताया कि सोमवार शाम पीडब्ल्यूडी के अधिकारी गांव पहुंचे और भूमि की पैमाइश शुरू कर दी। इसके बाद कई परिवारों को अतिक्रमण संबंधी नोटिस जारी किए गए। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई दशकों में कभी ऐसी कार्रवाई नहीं की गई, लेकिन अब अचानक उनके घरों को अवैध बताकर हटाने की कोशिश की जा रही है।
नोटिस मिलने के बाद ग्रामीणों में चिंता का माहौल है। उनका कहना है कि यदि उनके मकानों पर बुलडोजर चलाया गया तो वे बेघर हो जाएंगे। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि तीन पीढ़ियों से बसे परिवारों को उजाड़ने के बाद उनके पुनर्वास की क्या व्यवस्था होगी।
मामले के विरोध में सैकड़ों ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान भारतीय किसान यूनियन के एनसीआर महासचिव प्रदीप धामा समेत अन्य किसान नेताओं ने भी ग्रामीणों का समर्थन किया। प्रदीप धामा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी भी परिवार के खिलाफ जबरन कार्रवाई की गई तो किसान संगठन इसका कड़ा विरोध करेगा।
प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी से मामले में हस्तक्षेप कर नोटिसों की समीक्षा कराने और प्रभावित परिवारों को राहत प्रदान करने की मांग की। फिलहाल कलेक्ट्रेट परिसर में ग्रामीणों का प्रदर्शन जारी है और प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।
