मेरठ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में पिछले लगभग एक माह से चल रहा दस्तावेज लेखकों एवं अधिवक्ताओं का धरना-प्रदर्शन और हड़ताल आखिरकार समाप्त हो गई है। हाई कोर्ट बैंच स्थापना केन्द्रीय संघर्ष समिति, पश्चिमी उत्तर प्रदेश ने मंगलवार को औपचारिक रूप से हड़ताल समाप्त करने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही 1 जुलाई 2026 से प्रदेश के रजिस्ट्री कार्यालयों में सामान्य रूप से रजिस्ट्री कार्य शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।
संघर्ष समिति की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 4 जून 2026 को जारी ई-रजिस्ट्री संबंधी आदेश के विरोध में दस्तावेज लेखक एसोसिएशन लगातार आंदोलन कर रही थी। इस मुद्दे को लेकर संघर्ष समिति के आह्वान पर एक प्रतिनिधिमंडल ने लखनऊ पहुंचकर प्रमुख सचिव एवं महानिरीक्षक निबंधन, स्टाम्प एवं निबंधन विभाग, उत्तर प्रदेश शासन से वार्ता की।
वार्ता के दौरान अपर महानिरीक्षक निबंधन, उत्तर प्रदेश ने प्रतिनिधिमंडल को जानकारी दी कि विभाग द्वारा पूर्व में जारी पत्रांक संख्या 2523/ई-पंजीकरण/शि०का०लख०/2026 दिनांक 4 जून 2026 को कार्यालय के पत्रांक 3475/ई-पंजीकरण/शि०का०लख०/2026 दिनांक 29 जून 2026 के माध्यम से वापस ले लिया गया है।
इसके बाद 30 जून 2026 को एक नया आदेश (पत्रांक 3495/तीन-84/शि०का०लख०/2026) जारी किया गया, जिसमें उत्तर प्रदेश ऑनलाइन दस्तावेज रजिस्ट्रीकरण नियमावली-2024 में संशोधन के विषय पर विचार करने के लिए संबंधित प्रक्रिया शुरू किए जाने का उल्लेख किया गया है। संघर्ष समिति ने इसे आंदोलन की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।
इसी क्रम में मंगलवार को मेरठ स्थित रजिस्ट्री कार्यालय परिसर में चल रहे धरना स्थल पर हाई कोर्ट बैंच स्थापना केन्द्रीय संघर्ष समिति के चेयरमैन एवं मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट अनुज कुमार शर्मा तथा समिति के संयोजक एवं मेरठ बार एसोसिएशन के महामंत्री एडवोकेट परवेज आलम पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारियों को सरकार के ताजा निर्णय और विभागीय आदेशों की जानकारी देते हुए हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की।
समिति ने स्पष्ट किया कि अब 1 जुलाई 2026 से सभी रजिस्ट्री कार्यालयों में दस्तावेजों का पंजीकरण एवं अन्य रजिस्ट्री संबंधी कार्य नियमित रूप से प्रारंभ कर दिए जाएंगे। इससे पिछले एक माह से लंबित पड़े हजारों रजिस्ट्री मामलों के निस्तारण का मार्ग प्रशस्त होगा और आम जनता, संपत्ति खरीदारों, विक्रेताओं तथा दस्तावेज लेखकों को बड़ी राहत मिलेगी।
संघर्ष समिति ने आंदोलन के दौरान सहयोग देने वाले अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, सामाजिक संगठनों तथा आम नागरिकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी यदि जनहित से जुड़े किसी विषय पर आवश्यकता पड़ी तो लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार के समक्ष रखी जाएगी।