करोड़ों की ठगी में दो गिरफ्तार
मुरादाबाद/लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को सरकारी नौकरी के नाम पर युवाओं से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ बड़ी सफलता मिली है। एसटीएफ की मेरठ फील्ड यूनिट ने मुरादाबाद में कार्रवाई करते हुए गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपी अभ्यर्थियों को रेलवे, सेना, डाक विभाग समेत विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे 8 से 10 लाख रुपये तक वसूलते थे। इसके बाद उन्हें फर्जी जॉइनिंग लेटर और फर्जी पहचान पत्र (आईडी कार्ड) देकर ठगी को अंजाम देते थे।
02 जुलाई की तड़के हुई कार्रवाई
एसटीएफ की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, 2 जुलाई 2026 को तड़के लगभग 2:25 बजे मुरादाबाद जनपद के थाना डिलारी क्षेत्र स्थित टंकी वाला रास्ता, नूरी चौराहा, नगर पंचायत ढकिया से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपी
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है—
असरफ अली पुत्र सलीम अहमद, निवासी ग्राम ढकिया पीरू, थाना डिलारी, जनपद मुरादाबाद।
विवेक पुत्र राधेश्याम, निवासी ग्राम जरगांव, थाना बिलारी, जनपद मुरादाबाद। वर्तमान पता: आवास विकास कॉलोनी, चंदौसी, जनपद संभल।
बरामद सामान
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से:
तीन मोबाइल फोन
1,740 रुपये नकद
बरामद किए हैं।
ऐसे करते थे ठगी
एसटीएफ की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उनका गिरोह सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं को निशाना बनाता था। वे भारतीय रेलवे, भारतीय सेना, भारतीय डाक विभाग, वन रक्षक, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), दिल्ली पावर कॉरपोरेशन सहित अन्य सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर प्रत्येक अभ्यर्थी से 8 से 10 लाख रुपये तक वसूलते थे।
रकम लेने के बाद गिरोह के सदस्य अभ्यर्थियों के ई-मेल पर फर्जी जॉइनिंग लेटर भेजते थे। इसके बाद उन्हें दिल्ली बुलाकर संबंधित विभागों के आसपास घुमाया जाता था, ताकि उन्हें विश्वास हो सके कि उनकी नियुक्ति हो गई है।
फर्जी आईडी कार्ड देकर कराते थे नकली ट्रेनिंग
गिरोह का तरीका बेहद सुनियोजित था। आरोपियों के अनुसार, अभ्यर्थियों को होटल में ठहराया जाता था और एक-दो दिन बाद उन्हें फर्जी तरीके से तैयार किए गए विभागीय आईडी कार्ड दिए जाते थे। इसके बाद लगभग एक सप्ताह तक औपचारिक ट्रेनिंग जैसा माहौल बनाकर उन्हें वापस भेज दिया जाता था और बाद में दोबारा बुलाने का झांसा दिया जाता था।
दो वर्षों में 20 से 25 युवाओं को बनाया शिकार
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे पिछले दो वर्षों से अधिक समय से इस तरह की धोखाधड़ी कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने करीब 20 से 25 युवाओं को सरकारी नौकरी का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी की।
एसटीएफ की सूचना पर हुई कार्रवाई
एसटीएफ मुख्यालय, लखनऊ को इस गिरोह के संबंध में लगातार सूचनाएं मिल रही थीं। इसके बाद अपर पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार सिंह के पर्यवेक्षण में मेरठ फील्ड यूनिट के उपनिरीक्षक संजय कुमार के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने अभिसूचना संकलन के बाद स्थानीय पुलिस के सहयोग से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
आरोपियों के विरुद्ध थाना डिलारी, जनपद मुरादाबाद में मुकदमा संख्या 130/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) एवं 61(2) के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले में आगे की विधिक कार्रवाई स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही है।
युवाओं से एसटीएफ की अपील
एसटीएफ ने युवाओं से अपील की है कि सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर किसी भी व्यक्ति या संस्था के बहकावे में न आएं। भर्ती से संबंधित सभी सूचनाओं की पुष्टि केवल संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट और अधिकृत माध्यमों से ही करें। यदि कोई व्यक्ति नौकरी दिलाने के नाम पर धनराशि की मांग करता है, तो इसकी तत्काल सूचना पुलिस या संबंधित एजेंसी को दें।