सामाजिक एकता एवं स्वाभिमान महासम्मेलन की जानकारी देते आयोजक
मेरठ। वाल्मीकि समाज के सामाजिक उत्थान, एकता, शिक्षा, संगठन और स्वाभिमान को नई दिशा देने के उद्देश्य से रविवार, 5 जुलाई 2026 को मेरठ में “सामाजिक एकता एवं स्वाभिमान (विशाल) महासम्मेलन” का आयोजन किया जाएगा। यह सम्मेलन प्रातः 11:00 बजे शर्मा स्मारक हॉल, बच्चा पार्क (निकट आंखों का अस्पताल एवं मूलचंद शरबती देवी चैरिटेबल हॉस्पिटल), जिला मेरठ में आयोजित होगा।
आयोजकों ने प्रदेश एवं आसपास के जनपदों के वाल्मीकि समाज के लोगों से अधिक से अधिक संख्या में सम्मेलन में पहुंचने का आह्वान करते हुए “चलो मेरठ, चलो मेरठ” का संदेश दिया है। उनका कहना है कि यह सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज की एकता, जागरूकता और भविष्य की दिशा तय करने का एक महत्वपूर्ण मंच होगा।
सम्मेलन में समाज के प्रबुद्धजन, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा, महिलाएं और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि समाज के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखेंगे। आयोजकों के अनुसार सभी वक्ताओं से अनुरोध किया गया है कि वे केवल निर्धारित विषयों पर ही अपने विचार रखें तथा व्यक्तिगत, राजनीतिक अथवा विवादित टिप्पणियों से बचते हुए समाधान आधारित सुझाव प्रस्तुत करें।
इन प्रमुख विषयों पर होगा विचार-विमर्श
महासम्मेलन में सामाजिक एकता और भाईचारे को मजबूत बनाने, समाज में प्रेम, सहयोग और समरसता बढ़ाने तथा जाति, उपजाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त करने पर विशेष चर्चा की जाएगी।
शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ाने तथा बौद्धिक विकास को लेकर विस्तृत मंथन होगा।
युवाओं को संगठित कर सकारात्मक नेतृत्व विकसित करने, नशामुक्त समाज के निर्माण, अनुशासन तथा राष्ट्र निर्माण में उनकी भागीदारी बढ़ाने पर भी विचार रखा जाएगा।
महिला सशक्तिकरण सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण विषय रहेगा, जिसमें महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान और सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक निर्णयों में उनकी भागीदारी बढ़ाने पर चर्चा होगी।
रोजगार और स्वरोजगार के क्षेत्र में युवाओं को नए अवसर उपलब्ध कराने, कौशल विकास, उद्यमिता तथा आर्थिक सशक्तिकरण के लिए ठोस सुझाव तैयार किए जाएंगे।
इसके साथ ही समाज के गौरवशाली इतिहास, संतों एवं महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर सम्मानजनक पहचान और सकारात्मक सामाजिक छवि के निर्माण पर भी विचार-विमर्श होगा।
सम्मेलन में संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों की जानकारी, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उपायों पर भी विशेष चर्चा होगी।
संगठन विस्तार पर रहेगा विशेष फोकस
आयोजकों के अनुसार गांव, वार्ड, तहसील और जिला स्तर तक संगठन को मजबूत बनाने, सामूहिक नेतृत्व विकसित करने तथा समाजहित में एकजुट होकर कार्य करने की रणनीति तैयार की जाएगी।
इसके अलावा समाज में व्याप्त कुरीतियों, भेदभाव, आपसी मतभेद और अन्य सामाजिक चुनौतियों के स्थायी समाधान पर भी विस्तृत चर्चा होगी। सम्मेलन के अंत में आगामी एक वर्ष की कार्ययोजना तैयार कर उसके प्रभावी क्रियान्वयन एवं समय-समय पर समीक्षा का संकल्प लिया जाएगा।
चर्चा के लिए बनाए गए विशेष नियम
आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि सम्मेलन के दौरान समाजहित को सर्वोपरि रखते हुए सकारात्मक विचार प्रस्तुत किए जाएंगे। मंच का उपयोग केवल सामाजिक एकता, जागरूकता और समाज निर्माण के उद्देश्य से किया जाएगा। सभी वक्ताओं से समय का पालन करते हुए संक्षिप्त, सारगर्भित और तथ्यपूर्ण विचार रखने का अनुरोध किया गया है।
समाज के लिए दिया जाएगा एकजुटता का संदेश
महासम्मेलन का मूल उद्देश्य वाल्मीकि समाज को शिक्षा, संगठन, आत्मसम्मान और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से सशक्त बनाना है। आयोजन का संदेश है कि समाज की वास्तविक शक्ति उसकी एकता में निहित है और संगठित प्रयासों से ही सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।
सम्मेलन के दौरान समाज के लोगों से “शिक्षित बनो – संगठित बनो – संघर्ष करो” के संदेश को आत्मसात करने तथा “एकता ही समाज की सबसे बड़ी शक्ति है” के संकल्प के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया जाएगा। आयोजकों का लक्ष्य एक ऐसे शिक्षित, संगठित, सशक्त एवं स्वाभिमानी वाल्मीकि समाज का निर्माण करना है, जो सामाजिक विकास और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।