भजनों की प्रस्तुति आरुषि गंभीर के द्वारा की जाएगी
मेरठ। नगर निगम परिसर स्थित प्राचीन श्री बाबा झारखंडी महादेव शिव मंदिर में प्रभु सेवा सत्संग समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में रविवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। दोपहर 3 बजे से प्रारंभ हुई कथा में वृंदावन से पधारे राष्ट्रीय संत परम श्रद्धेय श्री गौर दास जी महाराज ने महाभारत के युद्ध के उपरांत भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े अत्यंत मार्मिक प्रसंगों का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति, श्रद्धा और धर्म का संदेश दिया।
कथा के दौरान संत गौर दास महाराज ने बताया कि महाभारत का युद्ध समाप्त होने के बाद जब भगवान श्रीकृष्ण द्वारिका लौटने लगे, तभी महारानी उत्तरा व्याकुल होकर उनके चरणों में पहुंचीं। उन्होंने भगवान से प्रार्थना करते हुए कहा कि अश्वत्थामा ने उनके गर्भ में पल रहे शिशु को नष्ट करने के उद्देश्य से ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया है।
महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने भक्त की पुकार सुनते ही अंगूठे के समान सूक्ष्म रूप धारण किया और उत्तरा के गर्भ में प्रवेश कर अजन्मे बालक की रक्षा की। यही बालक आगे चलकर राजा परीक्षित के रूप में प्रसिद्ध हुआ, जिनके कारण श्रीमद्भागवत महापुराण का दिव्य ज्ञान संसार को प्राप्त हुआ।
कुंती ने भगवान से मांगी विपत्तियां
कथा के दौरान संत गौर दास महाराज ने कुंती माता के प्रसंग का भी भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब भगवान श्रीकृष्ण द्वारिका जाने लगे तो कुंती माता ने उनसे धन, वैभव या सुख नहीं, बल्कि विपत्तियां मांगीं।
जब भगवान ने आश्चर्य व्यक्त किया कि कोई व्यक्ति विपत्ति क्यों मांगता है, तब कुंती ने कहा कि जब-जब उनके जीवन में संकट आया, तब-तब भगवान स्वयं उनकी रक्षा के लिए उपस्थित हुए। इसलिए यदि विपत्ति रहेगी तो भगवान का सान्निध्य भी मिलता रहेगा।
महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने कुंती माता से कहा कि उन्होंने जीवन भर अनेक कठिनाइयों का सामना किया है, इसलिए अब उन्हें और विपत्तियां नहीं दी जा सकतीं।
भीष्म पितामह की भक्ति का किया वर्णन
संत गौर दास महाराज ने आगे बताया कि इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण युद्धभूमि में शरशैया पर लेटे भीष्म पितामह के पास पहुंचे। भीष्म पितामह अपने जीवन के अंतिम क्षणों में भी भगवान का निरंतर स्मरण कर रहे थे।
भगवान श्रीकृष्ण ने उनसे कहा कि उन्होंने जीवनभर अपने प्रत्येक कर्तव्य का पालन करते हुए निरंतर प्रभु का स्मरण किया है। उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान स्वयं उनके दर्शन करने पहुंचे और उनसे वरदान मांगने के लिए कहा।
महाराज ने कहा कि यह प्रसंग सिखाता है कि जो व्यक्ति अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए निरंतर ईश्वर का स्मरण करता है, भगवान स्वयं उसके जीवन में उपस्थित होकर उसका कल्याण करते हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि जीवन में चाहे कितनी भी व्यस्तता क्यों न हो, प्रतिदिन कुछ समय भगवान के नाम-स्मरण, भजन और सत्संग के लिए अवश्य निकालना चाहिए। यही जीवन को सफल बनाने का सबसे सरल और श्रेष्ठ मार्ग है।
13 जुलाई को झारखंडी मंदिर में होगा भव्य श्री हरिनाम संकीर्तन
इसी क्रम में राधा गोविंद शयन आरती परिकर, मेरठ के तत्वावधान में सोमवार, 13 जुलाई को श्री बाबा झारखंडी महादेव शिव मंदिर, नगर निगम परिसर, घंटाघर में भव्य श्री हरिनाम संकीर्तन का आयोजन किया जाएगा।
इस भक्तिमय संकीर्तन में सुप्रसिद्ध ब्रज रसिक भजन गायिका आरुषि गंभीर अपनी मधुर एवं भावपूर्ण भजन प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को ब्रज रस में सराबोर करेंगी। आरुषि गंभीर इससे पूर्व भी मेरठ के अनेक धार्मिक आयोजनों में अपनी संगीतमय प्रस्तुतियों से भक्तों का मन मोह चुकी हैं।
कार्यक्रम का विवरण
- आयोजक: राधा गोविंद शयन आरती परिकर, मेरठ
- कार्यक्रम: श्री हरिनाम संकीर्तन
- तिथि: 13 जुलाई 2026 (सोमवार)
- समय: सायं 7:00 बजे से प्रभु इच्छा तक
- स्थान: श्री बाबा झारखंडी महादेव शिव मंदिर, नगर निगम परिसर, घंटाघर, मेरठ।
आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर श्रीहरिनाम संकीर्तन का पुण्य लाभ प्राप्त करने की अपील की है।