नियमितीकरण की मांग करते हारट्रॉन कर्मचारी
पंचकूला। हरियाणा में पार्ट-II एवं हारट्रोन के तहत विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत कर्मचारियों ने अपनी सेवाओं के नियमितीकरण की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। रविवार को पंचकूला में आयोजित एक प्रेस वार्ता में राज्यस्तरीय समिति एवं जागरूक कर्मचारियों के प्रतिनिधियों ने दावा किया कि कानूनी दृष्टि से उनकी सेवाओं के नियमितीकरण में अब कोई बाधा शेष नहीं है। उन्होंने राज्य सरकार से शीघ्र नियमितीकरण नीति लागू करने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि 31 जुलाई 2026 तक कोई निर्णय नहीं लिया गया तो कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
प्रेस वार्ता का आयोजन श्री दिनेश शर्मा एवं श्री विरेन्द्र ढांडा की अध्यक्षता में किया गया। इस दौरान कर्मचारियों ने नियमितीकरण से जुड़े कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं की जानकारी देते हुए अपनी मांगों को विस्तार से रखा।
2014 की नीति और कानूनी विवाद का दिया हवाला
कर्मचारी प्रतिनिधियों ने बताया कि वर्ष 2014 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अनुबंध के आधार पर कार्यरत कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए तीन अलग-अलग नीतियां बनाई थीं। इनमें से एक नीति के कुछ प्रावधानों को लेकर कानूनी विवाद उत्पन्न हुआ, जिसके चलते मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और बाद में सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा।
उन्होंने कहा कि इसी कारण कई श्रेणियों के कर्मचारियों का नियमितीकरण लंबित रह गया, जबकि अन्य कर्मचारियों को उस समय इसका लाभ मिल गया था।
2018 में तैयार हुआ था नियमितीकरण नीति का ड्राफ्ट
प्रेस वार्ता में बताया गया कि जुलाई 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में भाजपा सरकार ने कर्मचारी संगठनों की मांगों और कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नियमितीकरण नीति ड्राफ्ट-2018 तैयार किया था।
कर्मचारियों का कहना है कि उस समय कर्मचारी संगठनों के बीच पूर्ण सहमति नहीं बन पाने के कारण सरकार ने इस ड्राफ्ट को लागू नहीं किया। इसका परिणाम यह हुआ कि हजारों कर्मचारी पिछले लगभग आठ वर्षों से नियमितीकरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया उल्लेख
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि अप्रैल 2026 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने मदन सिंह बनाम हरियाणा सरकार मामले में महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। उनके अनुसार इस निर्णय में वर्ष 2014 की तीन वर्षीय नियमितीकरण नीति को श्रेणी ‘सी’ एवं ‘डी’ कर्मचारियों के संबंध में कानूनी रूप से वैध माना गया है।
कर्मचारियों का दावा है कि इस निर्णय के बाद पार्ट-II और हारट्रोन के माध्यम से विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारी भी नियमितीकरण के पात्र हो गए हैं और अब सरकार के सामने केवल नियमितीकरण नीति को लागू करने का कार्य शेष है।
मुख्यमंत्री को फिर सौंपेंगे ज्ञापन
प्रेस वार्ता के दौरान कर्मचारी नेताओं ने बताया कि वे पहले भी मुख्यमंत्री हरियाणा को नियमितीकरण नीति-2026 तैयार करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंप चुके हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि आगामी मंगलवार और बुधवार को मुख्यमंत्री निवास में आयोजित जनता दरबार के दौरान वे मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत रूप से मिलकर दोबारा ज्ञापन देंगे और अपनी मांगों से अवगत कराएंगे।
31 जुलाई तक निर्णय नहीं हुआ तो होगा आंदोलन
कर्मचारी प्रतिनिधियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 31 जुलाई 2026 तक सरकार ने पार्ट-II और हारट्रोन कर्मचारियों के नियमितीकरण पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो कर्मचारी बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करेंगे।
उन्होंने कहा कि कानूनी रूप से नियमितीकरण के पात्र कर्मचारी अपने अधिकारों की रक्षा के लिए पंचकूला सहित पूरे प्रदेश में लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन भी किया जाएगा।
ये रहे मौजूद
प्रेस वार्ता में प्रमोद कुमार, विजय कुमार, महेश शर्मा, जसविंदर सिंह, सुनील कुमार, परमजीत, सुशील कुमार, रामजुवारी सहित बड़ी संख्या में पार्ट-II एवं हारट्रोन के कर्मचारी उपस्थित रहे।
कर्मचारियों ने एक स्वर में कहा कि वे लंबे समय से नियमितीकरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं और अब सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद उन्हें उम्मीद है कि हरियाणा सरकार शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर उनकी वर्षों पुरानी मांग को पूरा करेगी।