कार्यक्रम के आयोजक एवं एन टी डिस्कवरी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के निर्देशक नितिन त्यागी और रश्मि त्यागी ने पूर्व मंत्री सुनील भराला को पुष्पगुच्छ भेंट की
मेरठ। भगवान श्री परशुराम की गौरवशाली विरासत, सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता तथा परशुरामपुरी नामकरण की ऐतिहासिक उपलब्धि को लेकर रविवार को मेरठ के शारदा रोड स्थित आधुनिक कॉम्प्लेक्स में एक विचार गोष्ठी एवं स्वागत-सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय परशुराम परिषद के संस्थापक एवं उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री पं. सुनील भराला ने समाज में एकता, संविधान के प्रति सम्मान और कानून के निष्पक्ष पालन पर जोर देते हुए कहा कि “अपराध की कोई जाति नहीं होती और भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है।”
यह कार्यक्रम एन.टी. डिस्कवरी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय में आयोजित किया गया, जिसमें भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय परशुराम परिषद के पदाधिकारी, व्यापारी, व्यवसायी और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
सुनील भराला का किया गया स्वागत
कार्यक्रम के आयोजक एवं एन.टी. डिस्कवरी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक नितिन त्यागी ने पं. सुनील भराला का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया। इस अवसर पर कंपनी की निदेशक रश्मि त्यागी भी मौजूद रहीं।
गोष्ठी में भगवान श्री परशुराम के जीवन, उनके आदर्शों, न्याय और धर्म के प्रति उनके समर्पण तथा सनातन संस्कृति के संरक्षण पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि परशुरामपुरी नामकरण केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और सांस्कृतिक विरासत का सम्मान है।
“भगवान परशुराम न्याय और धर्म के प्रतीक हैं”
अपने संबोधन में पं. सुनील भराला ने कहा कि भगवान श्री परशुराम का जीवन समाज को न्याय, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम ने सदैव अन्याय का विरोध किया और समाज में धर्म की स्थापना के लिए संघर्ष किया।
उन्होंने कहा कि परशुरामपुरी नामकरण ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के सम्मान का प्रतीक है।
व्यापारियों और नागरिकों से किया संवाद
कार्यक्रम के दौरान शारदा रोड क्षेत्र के व्यापारियों एवं व्यवसायियों के साथ सामाजिक, व्यापारिक और जनहित के विभिन्न विषयों पर भी चर्चा की गई। पं. सुनील भराला ने उपस्थित लोगों की समस्याओं और सुझावों को गंभीरता से सुना तथा समाज के विकास में सामूहिक भागीदारी पर बल दिया।
“अपराध को जाति से जोड़ना उचित नहीं”
प्रदेश की कानून-व्यवस्था से जुड़े हालिया घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए पं. सुनील भराला ने कहा कि किसी भी आपराधिक मामले को जातीय दृष्टिकोण से देखना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार प्रदान करता है और कानून की नजर में सभी नागरिक बराबर हैं। यदि कोई व्यक्ति कानून का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई उसके कृत्य, उपलब्ध तथ्यों और कानून के आधार पर होनी चाहिए, न कि उसकी जाति या सामाजिक पहचान के आधार पर।
उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति के अपराध को पूरे समाज या समुदाय से जोड़ना सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाता है।
उन्होंने कहा,
“अपराध की कोई जाति नहीं होती। भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और कानून की दृष्टि में सभी समान हैं। किसी आरोपी के कृत्य को उसकी जाति से जोड़कर पूरे समाज को कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है। न्याय केवल तथ्य, संविधान और कानून के आधार पर होना चाहिए।”
एसएसपी की कार्रवाई की सराहना
मेरठ की कानून-व्यवस्था पर बोलते हुए पं. सुनील भराला ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय द्वारा कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि प्रशासन का दायित्व है कि वह निष्पक्ष और कानून सम्मत कार्रवाई करे। यदि कोई अधिकारी बिना किसी जातीय या राजनीतिक भेदभाव के कानून के अनुसार कार्य करता है, तो ऐसे अधिकारियों का मनोबल बढ़ाया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए और प्रत्येक नागरिक को संविधान के तहत निष्पक्ष न्याय एवं विधिक प्रक्रिया का अधिकार मिलना चाहिए।
सामाजिक समरसता बनाए रखने की अपील
कार्यक्रम के अंत में पं. सुनील भराला ने सभी समाजों और वर्गों से शांति, भाईचारा और सामाजिक समरसता बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परशुराम परिषद सदैव राष्ट्रहित, सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता और संविधान सम्मत व्यवस्था के पक्ष में कार्य करती रही है तथा भविष्य में भी समाज को जोड़ने का कार्य करती रहेगी।
उन्होंने कहा,
“हम सभी पहले भारतीय हैं। प्रत्येक समाज, प्रत्येक वर्ग और प्रत्येक नागरिक का सम्मान हमारा दायित्व है। संविधान हम सभी को समान अधिकार देता है और कानून भी सभी पर समान रूप से लागू होता है। इसलिए समाज को बांटने वाली मानसिकता से बचना चाहिए और न्याय को केवल संविधान एवं कानून के आधार पर स्वीकार करना चाहिए।”
ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम में आकाश अग्रवाल, अमन गोयल, प्रमोद वाल्मीकि, संजय शर्मा, विनोद गुप्ता, रजत जैन सहित भारतीय जनता पार्टी एवं राष्ट्रीय परशुराम परिषद के अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता, व्यापारी, व्यवसायी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी लोगों ने सामाजिक एकता, सांस्कृतिक गौरव, संविधान के प्रति सम्मान और राष्ट्रहित में मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।