छावनी परिषद में भ्रष्टाचार मामले पर सपा का बड़ा हमला
मेरठ। छावनी परिषद में कथित भ्रष्टाचार के मामले को लेकर समाजवादी पार्टी ने बड़ा हमला बोला है। सपा व्यापार सभा के जिलाध्यक्ष हरप्रीत सिंह आहूजा के नेतृत्व में मुख्य अधिशासी अधिकारी, छावनी परिषद को ज्ञापन सौंपकर भाजपा के मनोनीत सदस्य डॉ. सतीश शर्मा की सदस्यता तत्काल समाप्त करने और मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की गई है।
मेरठ में छावनी परिषद से जुड़े कथित रिश्वतखोरी प्रकरण को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी व्यापार सभा ने छावनी परिषद प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मुख्य अधिशासी अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि भाजपा के मनोनीत सदस्य डॉ. सतीश शर्मा को सीबीआई द्वारा तीन लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया।
समाजवादी पार्टी का आरोप है कि इतने गंभीर आरोप और गिरफ्तारी के बावजूद अभी तक डॉ. सतीश शर्मा की मनोनीत सदस्यता समाप्त नहीं की गई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह स्थिति छावनी परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है और इससे आम जनता में भारी नाराजगी व्याप्त है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि इससे पहले भी छावनी परिषद में भ्रष्टाचार के मामलों में सीबीआई द्वारा कार्रवाई की जा चुकी है और कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है। इसके बावजूद भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पाया, जिससे परिषद की साख प्रभावित हुई है
सपा व्यापार सभा के पदाधिकारियों ने मांग की है कि डॉ. सतीश शर्मा की सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाए तथा इस पूरे मामले में शामिल अन्य लोगों की भी निष्पक्ष जांच कर कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए बिना जनता का विश्वास बहाल नहीं हो सकता
समाजवादी पार्टी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि भ्रष्टाचार के मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी जनता के साथ मिलकर आंदोलन का रास्ता भी अपना सकती है। पार्टी का कहना है कि छावनी क्षेत्र की जनता पारदर्शिता और जवाबदेही चाहती है तथा दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।
अब देखना होगा कि समाजवादी पार्टी के इस ज्ञापन और मांगों पर छावनी परिषद प्रशासन क्या कदम उठाता है। फिलहाल इस मुद्दे ने मेरठ की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।