भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में किसानों का प्रदर्शन
मेरठ। कलेक्ट्रेट परिसर में उस समय किसानों की बड़ी संख्या जुटी जब संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के बैनर तले विभिन्न किसान संगठनों ने भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व भारतीय किसान यूनियन आजाद के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नितिन बालियान ने किया। किसानों ने सरकार से कृषि और कृषि आधारित क्षेत्रों को किसी भी व्यापार समझौते से बाहर रखने की मांग उठाई।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए चौधरी नितिन बालियान ने कहा कि भारत की बड़ी आबादी कृषि और उससे जुड़े कार्यों पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की कृषि व्यवस्था भारी सरकारी सब्सिडी, आधुनिक तकनीक और कॉर्पोरेट मॉडल पर आधारित है, जबकि भारत में अधिकांश किसान छोटे और सीमांत हैं। ऐसे में दोनों देशों के कृषि उत्पादों के बीच खुली प्रतिस्पर्धा भारतीय किसानों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।
किसान नेताओं ने आशंका जताई कि यदि कृषि, डेयरी, पोल्ट्री और पशुपालन से जुड़े उत्पादों को मुक्त व्यापार समझौते में शामिल किया गया या अमेरिकी उत्पादों को कम शुल्क पर भारत में प्रवेश मिला, तो भारतीय किसानों और पशुपालकों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ेगा। उनका कहना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था कमजोर होगी और लाखों लोगों के रोजगार पर संकट खड़ा हो सकता है।
भाकियू अराजनीतिक मंच के जिलाध्यक्ष सुभाष चंद मास्टर ने कहा कि देश के करोड़ों छोटे डेयरी और पोल्ट्री उत्पादकों की आजीविका दांव पर लग सकती है। वहीं भाकियू महात्मा टिकैत के युवा जिलाध्यक्ष मनोज तोमर ने कहा कि अमेरिकी कृषि उत्पादों को मिलने वाली भारी सब्सिडी के कारण भारतीय बाजार में फसलों के दाम गिर सकते हैं और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा।
किसानों ने सरकार से मांग की कि भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते से कृषि, डेयरी, पोल्ट्री, पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़े सभी उत्पादों को पूरी तरह बाहर रखा जाए। साथ ही किसी भी व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने से पहले किसान संगठनों से व्यापक चर्चा की जाए और न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खाद्य सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों से किसी प्रकार का समझौता न किया जाए।
किसान नेताओं ने कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा, खाद्य संप्रभुता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रक्षा करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों के हितों की अनदेखी की गई तो देशभर में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।