मेरठ का चर्चित "नीला ड्रम हत्याकांड" (सौरभ हत्याकांड) : एक विस्तृत रिपोर्ट
मेरठ। “नीला ड्रम हत्याकांड” वर्ष 2025 के सबसे चर्चित और सनसनीखेज आपराधिक मामलों में से एक रहा। इस मामले ने न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश को झकझोर दिया। हत्या की क्रूरता, शव को ठिकाने लगाने का तरीका और आरोपियों का व्यवहार चर्चा का विषय बन गया। यही कारण है कि यह मामला “सौरभ हत्याकांड” और “नीला ड्रम केस” के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
क्या है पूरा मामला?
मेरठ निवासी सौरभ राजपूत की हत्या का आरोप उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके कथित प्रेमी साहिल शुक्ला पर लगा। जांच में सामने आया कि दोनों के बीच प्रेम संबंध थे और सौरभ उनके रास्ते में बाधा बन रहे थे। आरोप है कि इसी वजह से सौरभ की हत्या की साजिश रची गई।
3 मार्च 2025 को कथित रूप से सौरभ की हत्या की गई। हत्या के बाद शव को टुकड़ों में काटा गया और उसे एक बड़े नीले रंग के प्लास्टिक ड्रम में रखा गया। शव को छिपाने के लिए ड्रम में सीमेंट और अन्य सामग्री भर दी गई ताकि किसी को बदबू या शक न हो। यही “नीला ड्रम” इस पूरे मामले की पहचान बन गया।
हत्या के बाद क्या हुआ?
पुलिस जांच में सामने आया कि हत्या के बाद आरोपी मुस्कान और साहिल सामान्य जीवन जीते रहे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दोनों मेरठ से बाहर घूमने भी गए। इस दौरान घर में रखा ड्रम किसी की नजर में नहीं आया। बाद में जब मामले का खुलासा हुआ तो पुलिस ने ड्रम को बरामद कर जांच शुरू की।
पुलिस जांच और गिरफ्तारी
मामले की सूचना मिलने के बाद मेरठ पुलिस ने जांच शुरू की। पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने दावा किया कि दोनों ने मिलकर हत्या की साजिश रची और उसे अंजाम दिया।
जांच के दौरान फॉरेंसिक साक्ष्य, घटनास्थल से बरामद सामग्री और आरोपियों से पूछताछ को केस का महत्वपूर्ण आधार बनाया गया। इसके बाद दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
अदालत में सुनवाई
वर्ष 2025 और 2026 के दौरान मामले की सुनवाई जारी रही। कई गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अप्रैल 2026 में दोनों आरोपियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश किया गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस केस में 22 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके थे और अदालत आरोप तय करने की प्रक्रिया की ओर बढ़ रही थी।
- देशभर में चर्चा का विषय क्यों बना?
- इस मामले के चर्चित होने के कई कारण रहे—
- पति की हत्या का आरोप पत्नी और उसके प्रेमी पर लगना।
- शव को टुकड़ों में काटकर नीले ड्रम में छिपाने का आरोप।
- हत्या के बाद आरोपियों का सामान्य व्यवहार।
- सोशल मीडिया और राष्ट्रीय मीडिया में लगातार कवरेज।
- केस का मनोवैज्ञानिक और सामाजिक पहलुओं से जुड़ जाना।
- परीक्षा और वेब सीरीज तक पहुंचा मामला
इस हत्याकांड की चर्चा इतनी व्यापक हुई कि दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की एलएलबी परीक्षा में इस घटना से प्रेरित एक कानूनी प्रश्न पूछा गया। इसमें यह जानने का प्रयास किया गया कि ऐसे अपराध में मृत्युदंड की संभावना क्या हो सकती है।
इसके अलावा 2026 में इस प्रकरण को आधार बनाकर एक ट्रू-क्राइम डॉक्यूमेंट्री श्रृंखला में भी शामिल किया गया, जिससे यह मामला फिर चर्चा में आया।
वर्तमान स्थिति
2026 तक यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। आरोपी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं। अदालत में गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की सुनवाई चल रही है। अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा दिया जाना शेष है।
निष्कर्ष
मेरठ का “नीला ड्रम हत्याकांड” भारतीय आपराधिक इतिहास के उन मामलों में शामिल हो गया है जिसने समाज को झकझोर कर रख दिया। यह मामला केवल एक हत्या का नहीं, बल्कि रिश्तों में अविश्वास, अपराध की सुनियोजित प्रकृति और आधुनिक समाज में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्तियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सौरभ राजपूत की हत्या और शव को नीले ड्रम में छिपाने की घटना ने इसे देश के सबसे चर्चित अपराध मामलों में शामिल कर दिया है।