एसवीपी कृषि विश्वविद्यालय में SC-ST छात्रों के लिए तकनीकी एवं नवाचार कौशल कार्यशाला
मेरठ। सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SVPUAT), मेरठ के बायोटेक्नोलॉजी कॉलेज में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC-ST) वर्ग के छात्रों के लिए “तकनीकी और नवाचार कौशल” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी ज्ञान, नवाचार आधारित सोच, स्टार्टअप संस्कृति तथा स्वरोजगार के अवसरों से परिचित कराना था।
यह कार्यशाला विश्वविद्यालय के प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट निदेशालय तथा बायोटेक्नोलॉजी कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई। कार्यक्रम का संचालन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), नई दिल्ली द्वारा वित्तपोषित “उच्च शिक्षा के सुदृढ़ीकरण और विकास” योजना के अंतर्गत किया गया।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम् के सामूहिक गायन और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट निदेशक प्रो. आर.एस. सेंगर ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। वहीं डॉ. सत्य प्रकाश ने कार्यशाला के उद्देश्यों और महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. पंकज चौहान ने अपने संबोधन में कार्यशाला की उपयोगिता पर चर्चा करते हुए मुख्य अतिथि शोभित विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. अमर प्रकाश गर्ग के शिक्षा एवं समाज सेवा के क्षेत्र में योगदान को रेखांकित किया।
मुख्य अतिथि डॉ. अमर प्रकाश गर्ग ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बायोटेक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, फर्मेंटेशन टेक्नोलॉजी, बायोफर्टिलाइजर तथा जीन थेरेपी जैसे आधुनिक वैज्ञानिक क्षेत्रों की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बायोटेक्नोलॉजी आज केवल शोध और विज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोजगार, उद्यमिता और स्टार्टअप के लिए भी व्यापक अवसर प्रदान कर रही है। उन्होंने छात्रों को कई नवाचार आधारित बिजनेस मॉडल और स्टार्टअप आइडियाज से परिचित कराया।
विशेषज्ञ वक्ता डॉ. नीलेश कपूर ने “नवाचार तकनीकों” विषय पर व्यावहारिक व्याख्यान देते हुए छात्रों को आधुनिक बायोटेक्नोलॉजिकल उपकरणों, अनुसंधान तकनीकों और बायोटेक्नोलॉजी एवं नैनोटेक्नोलॉजी क्षेत्र में उपलब्ध स्टार्टअप संभावनाओं की जानकारी दी।
अरुणाचल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडीज के पूर्व डीन प्रो. अजय अग्रवाल ने छात्रों को स्वास्थ्य और तकनीकी विकास के बीच संतुलन बनाए रखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है। उन्होंने योग, फिटनेस और शारीरिक विकास के महत्व पर जोर देते हुए आधुनिक तकनीकों के बारे में भी जानकारी साझा की।
उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. अश्वनी गोयल ने विद्यार्थियों को जीवन में शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक ऊर्जा के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि सफलता प्राप्त करने के लिए इन सभी ऊर्जा स्रोतों के बीच संतुलन आवश्यक है।
बायोइन्फॉर्मेटिक्स विशेषज्ञ डॉ. बुधयश गौतम ने अपने व्याख्यान में बताया कि बायोइन्फॉर्मेटिक्स आज बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और तेजी से उभरता हुआ क्षेत्र है, जो वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी विकास में क्रांतिकारी भूमिका निभा रहा है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रो. आर.एस. सेंगर, डॉ. नीलेश कपूर, डॉ. पंकज चौहान और डॉ. बुधयश गौतम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इनके मार्गदर्शन से विद्यार्थियों को विषय के व्यावहारिक और तकनीकी पहलुओं की गहन जानकारी प्राप्त हुई।
कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं एवं करियर विकास से संबंधित पुस्तकों का भी वितरण किया गया। साथ ही सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
कार्यक्रम के सफल संचालन में गरिमा शर्मा, अविनाश मद्धेशिया, व्रतिका, तन्मय, रीति, काजल, डी.वाई. तथागत, चिरंजीव चौधरी, अंकिता सिंह, प्रिंस कुमार, सलोनी, यशवर्धन और भूमि प्रताप ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
विशेषज्ञों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ाने, तकनीकी दक्षता विकसित करने और उन्हें भविष्य में सफल उद्यमी एवं नवाचारकर्ता के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कार्यशाला में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों और शिक्षकों ने सहभागिता कर लाभ प्राप्त किया।