शोध पत्र लेखन पर छात्राओं को दिया गया व्याख्यान
मेरठ। रघुनाथ गर्ल्स पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, मेरठ के राजनीति विज्ञान विभाग एवं रिसर्च डेवलपमेंट सेल के संयुक्त तत्वावधान में “शोध पत्र लेखन और प्रकाशन” विषय पर एक विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं, शोधार्थियों एवं शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण शोध लेखन, शोध नैतिकता तथा स्कोपस अनुक्रमित (Scopus Indexed) जर्नलों में शोध पत्र प्रकाशित करने की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी प्रदान करना था।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राओं, शोधार्थियों एवं शिक्षकों ने भाग लेकर शोध कार्य की नवीन तकनीकों और प्रकाशन की प्रक्रिया को समझा। विशेषज्ञ व्याख्यान के माध्यम से प्रतिभागियों को शोध के विभिन्न चरणों और उच्च गुणवत्ता वाले शोध पत्र तैयार करने के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया गया।
प्रो. सतीश कुमार ने साझा किए शोध लेखन के महत्वपूर्ण पहलू
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. सतीश कुमार, स्कूल ऑफ सोशल साइंस, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू), नई दिल्ली रहे। उन्होंने शोध कार्य की शुरुआत से लेकर शोध पत्र के प्रकाशन तक की पूरी प्रक्रिया को सरल और व्यवस्थित ढंग से समझाया।
उन्होंने बताया कि किसी भी सफल शोध की शुरुआत सही शोध समस्या (Research Problem) के चयन से होती है। इसके बाद साहित्य समीक्षा (Literature Review), शोध पद्धति (Research Methodology), शोध लेख की संरचना, संदर्भ लेखन (Referencing) तथा निष्कर्ष प्रस्तुत करने की वैज्ञानिक पद्धति पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
शोध नैतिकता और गुणवत्ता पर दिया विशेष जोर
प्रो. सतीश कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में केवल शोध पत्र प्रकाशित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका मौलिक, प्रमाणिक और समाजोपयोगी होना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने प्रतिभागियों से शोध में मौलिकता (Originality) बनाए रखने तथा शोध नैतिकता (Research Ethics) का पालन करने का आह्वान किया।
उन्होंने शोधार्थियों को यह भी बताया कि शोध पत्र प्रकाशित करने के लिए सही स्कोपस अनुक्रमित जर्नल का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इसके साथ ही उन्होंने तथाकथित प्रीडेटरी (फर्जी) जर्नलों से सावधान रहने की सलाह देते हुए कहा कि ऐसे जर्नल शोध की गुणवत्ता और शोधकर्ता की विश्वसनीयता दोनों को प्रभावित करते हैं।
प्राचार्या ने शोध संस्कृति को बताया समय की आवश्यकता
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. निवेदिता कुमारी ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में शोध संस्कृति को बढ़ावा देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। ऐसे विशेषज्ञ व्याख्यान विद्यार्थियों और शोधार्थियों की शोध क्षमता विकसित करने के साथ-साथ उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शोध कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं।
उन्होंने कहा कि महाविद्यालय भविष्य में भी इस प्रकार के शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा, जिससे छात्राओं को नवीन शोध प्रवृत्तियों और वैश्विक अकादमिक मानकों की जानकारी मिल सके।
डॉ. बबीता माजी ने किया कार्यक्रम का संयोजन
कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन डॉ. बबीता माजी, अध्यक्ष, राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा किया गया। वहीं कार्यक्रम का मंच संचालन विभाग की शोधार्थी काजल ने प्रभावी ढंग से किया।
प्रश्नोत्तर सत्र में शोधार्थियों ने पूछे महत्वपूर्ण सवाल
व्याख्यान के बाद आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में शोधार्थियों और छात्राओं ने शोध लेखन, शोध पत्र प्रकाशित करने की प्रक्रिया, उपयुक्त जर्नल के चयन, संदर्भ शैली तथा शोध नैतिकता से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे। प्रो. सतीश कुमार ने सभी प्रश्नों के व्यावहारिक एवं उपयोगी उत्तर देकर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।
प्रतिभागियों ने इस संवादात्मक सत्र को अत्यंत उपयोगी बताया और कहा कि इससे उन्हें शोध कार्य की अनेक जटिलताओं को समझने का अवसर मिला।
ज्ञानवर्धक रहा विशेषज्ञ व्याख्यान
कार्यक्रम के समापन पर अतिथियों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं छात्राओं के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया गया। महाविद्यालय प्रशासन ने कहा कि यह विशेषज्ञ व्याख्यान विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी और भविष्य में शोध कार्य की गुणवत्ता बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा। इस आयोजन ने महाविद्यालय में शोध एवं अकादमिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में अपनी पहचान बनाई।