मेरठ मंडल के गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर चेयरमैनों ने उप गन्ना आयुक्त को सौंपा ज्ञापन
मेरठ। मेरठ मंडल की विभिन्न गन्ना समितियों और चीनी मिल समितियों के चेयरमैनों ने गन्ना किसानों की समस्याओं और उनके हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर मंगलवार को उप गन्ना आयुक्त, मेरठ मंडल को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। पूर्व चेयरमैन मलियाना एवं वरिष्ठ किसान नेता बिजेंद्र प्रमुख की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में किसानों की समस्याओं पर चर्चा करते हुए विभाग से तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग की गई।
ज्ञापन में कहा गया कि मेरठ मंडल प्रदेश के प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है, लेकिन इसके बावजूद किसानों को कई मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। किसानों और गन्ना समितियों के प्रतिनिधियों ने आठ प्रमुख मांगों को रखते हुए किसानों के हित में ठोस कदम उठाने की अपील की।
ग्रामीण सड़कों और चकरोडों के निर्माण की मांग
ज्ञापन में बताया गया कि पूर्व में गन्ना समितियां और परिषदें ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और चकरोड निर्माण का कार्य कराती थीं, जिससे किसानों को अपने खेतों से गन्ना चीनी मिलों तक पहुंचाने में सुविधा होती थी। वर्तमान में यह कार्य लोक निर्माण विभाग (PWD) को हस्तांतरित कर दिया गया है। प्रतिनिधियों का कहना है कि गन्ना समितियों के पास पर्याप्त धनराशि उपलब्ध है, इसलिए उन्हें पुनः ग्रामीण क्षेत्रों में खड़ंजा और चकरोड निर्माण की अनुमति दी जानी चाहिए ताकि किसानों को परिवहन संबंधी समस्याओं से राहत मिल सके।
मेरठ मंडल में गन्ना शोध एवं मिट्टी परीक्षण केंद्र स्थापित करने की मांग
किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि मेरठ मंडल एक प्रमुख गन्ना बेल्ट होने के बावजूद यहां न तो कोई गन्ना शोध केंद्र है और न ही पर्याप्त मिट्टी परीक्षण केंद्र उपलब्ध हैं। इससे किसानों को वैज्ञानिक खेती और नई तकनीकों का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने मांग की कि क्षेत्र में आधुनिक गन्ना शोध केंद्र और मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएं।
प्रत्येक गन्ना किसान का पांच लाख रुपये का बीमा हो
ज्ञापन में किसानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक गन्ना किसान का कम से कम पांच लाख रुपये का बीमा कराने की मांग की गई। प्रतिनिधियों का कहना है कि दुर्घटना या अन्य आपदा की स्थिति में किसान परिवारों को आर्थिक सहायता मिल सकेगी।
कृषि यंत्रों और कीटनाशकों पर 50 प्रतिशत अनुदान की मांग
किसानों ने मांग उठाई कि गन्ना समितियों के माध्यम से किसानों को कृषि यंत्र, कीटनाशक और ह्यूम पाइप जैसी आवश्यक कृषि सामग्री पर 50 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया जाए। इससे खेती की लागत कम होगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
समय पर गन्ना भुगतान न करने वाली चीनी मिलों पर कार्रवाई की मांग
ज्ञापन में चीनी मिलों द्वारा गन्ना मूल्य भुगतान में हो रही देरी को गंभीर मुद्दा बताया गया। किसानों ने कहा कि शासन के निर्देशों के अनुसार गन्ना मूल्य का भुगतान 14 दिनों के भीतर किया जाना चाहिए, लेकिन कई चीनी मिलें समय सीमा का पालन नहीं कर रही हैं। ऐसे में भुगतान में देरी करने वाली मिलों के खिलाफ विभागीय और दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
आंदोलन की चेतावनी
प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि सरकार और विभाग के आदेशों के बावजूद चीनी मिलें समय पर भुगतान नहीं करती हैं तो किसानों को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की जिम्मेदारी गन्ना विभाग और संबंधित चीनी मिलों की होगी।
रियायती दरों पर कीटनाशक और ग्रोथ प्रमोटर उपलब्ध कराने की मांग
किसानों ने मांग की कि चीनी मिलों द्वारा गन्ना उत्पादकों को 50 प्रतिशत अनुदान पर कीटनाशक और ग्रोथ प्रमोटर उपलब्ध कराए जाएं, जिससे फसल की उत्पादकता बढ़ सके और किसानों को बेहतर उत्पादन प्राप्त हो।
बढ़ते कीट प्रकोप पर चिंता
ज्ञापन में गन्ने की फसल में बढ़ते कीट प्रकोप पर भी चिंता व्यक्त की गई। किसानों ने मांग की कि सभी चीनी मिलों को निर्देशित किया जाए कि वे रियायती दरों पर टैंकरों के माध्यम से कीटनाशक स्प्रे की व्यवस्था कराएं, जिससे फसल को नुकसान से बचाया जा सके।
कई गन्ना समितियों के चेयरमैन रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपने के दौरान मेरठ मंडल की विभिन्न गन्ना समितियों एवं चीनी मिल समितियों के कई चेयरमैन और प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए शीघ्र कार्रवाई की मांग की।
किसान प्रतिनिधियों ने उप गन्ना आयुक्त से अनुरोध किया कि ज्ञापन में उठाए गए सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द से जल्द आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि गन्ना किसानों को राहत मिल सके और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।