जांच के लिए मेरठ आए ई.डी के अधिकारी
मेरठ। मंगलवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की टीम ने टीपीनगर थाना क्षेत्र के शेखपुरा इलाके में एक घर पर छापेमारी की कार्रवाई शुरू कर दी। दिल्ली से आई ईडी की टीम सुबह करीब सात बजे कई वाहनों के काफिले के साथ मौके पर पहुंची और सेना से रिटायर विक्रम सिंह यादव के आवास में प्रवेश कर जांच शुरू कर दी।
कार्रवाई की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे परिसर को सीआरपीएफ के जवानों ने सुरक्षा घेरे में ले लिया। मीडिया सहित किसी भी बाहरी व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। यहां तक कि स्थानीय पुलिस को भी घर के भीतर प्रवेश नहीं करने दिया गया।
जानकारी के अनुसार ईडी की यह कार्रवाई कथित वित्तीय लेनदेन से जुड़े एक मामले में की जा रही है। शुरुआती जानकारी में करीब डेढ़ करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन की बात सामने आ रही है। हालांकि ईडी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, टीम के घर पहुंचते ही परिवार के सभी सदस्यों को एक कमरे में बैठा दिया गया और दस्तावेजों की गहन जांच शुरू कर दी गई। कार्रवाई के दौरान किसी को भी घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई। मिलने आने वाले लोगों को भी सीआरपीएफ जवानों ने वापस लौटा दिया।
ईडी की रेड की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंची। टीपीनगर थाना प्रभारी अरुण मिश्रा सहित अन्य पुलिस अधिकारी वहां पहुंचे, लेकिन सुरक्षा में तैनात जवानों ने उन्हें भी घर के भीतर प्रवेश नहीं करने दिया। इसके बाद पुलिस अधिकारी वापस लौट गए।
शेखपुरा क्षेत्र में जहां यह कार्रवाई चल रही है, वहां का अधिकांश इलाका व्यावसायिक है। सुबह बाजार बंद होने के कारण शुरुआत में लोगों को इसकी जानकारी नहीं मिल सकी, लेकिन जैसे ही बाजार खुला, ईडी की कार्रवाई की खबर पूरे इलाके में फैल गई और आसपास के लोगों की भीड़ जुटने लगी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पहली टीम के पहुंचने के करीब दो घंटे बाद दिल्ली से अधिकारियों की एक और टीम मौके पर पहुंची। कई गाड़ियों में आए अधिकारी कुछ दस्तावेजों के साथ अंदर गए और बाद में कुछ वाहन वापस लौट गए। इस दौरान ईडी अधिकारियों ने मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाए रखी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, विक्रम सिंह यादव के खिलाफ पिछले वर्ष धोखाधड़ी का एक मामला भी दर्ज हुआ था। आरोप है कि एक जमीन से जुड़े विवाद में कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों और वसीयत के आधार पर संपत्ति का नामांतरण कराया गया था। फिलहाल ईडी की कार्रवाई जारी है और जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।