मेरठ के बाउंड्री रोड स्थित होटल 22 बी में नगर निगम का सर्वेक्षण करने आई टीम से वार्ता करते सभासद संजय सैनी
मेरठ। स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 के तहत मेरठ नगर निगम की व्यवस्थाओं का आकलन करने पहुंची सर्वेक्षण टीम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। शहर के कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सर्वेक्षण प्रक्रिया में न तो आम जनता की राय ली जा रही है और न ही स्थानीय पार्षदों को शामिल किया जा रहा है। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि सर्वेक्षण की वास्तविकता धरातल से दूर होकर केवल कागजी और प्रबंधित व्यवस्थाओं तक सीमित रह सकती है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि स्वच्छता सर्वेक्षण का उद्देश्य शहर की वास्तविक सफाई व्यवस्था, कूड़ा प्रबंधन, नालों की स्थिति और नागरिक संतुष्टि का आकलन करना होता है। लेकिन वर्तमान सर्वेक्षण में टीम आम लोगों से संवाद स्थापित करने के बजाय केवल नगर निगम द्वारा चिन्हित स्थानों का ही निरीक्षण करती दिखाई दे रही है।
नगर निगम पर मेहमाननवाजी के जरिए छवि चमकाने के आरोप
शहर में चर्चा है कि नगर निगम प्रशासन सर्वेक्षण टीम के सामने केवल उन्हीं क्षेत्रों को प्रस्तुत कर रहा है जहां सफाई व्यवस्था अपेक्षाकृत बेहतर है। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि टीम के सदस्यों की विशेष आवभगत की जा रही है और उन्हें शहर के उन इलाकों में नहीं ले जाया जा रहा जहां गंदगी, जलभराव और कूड़ा निस्तारण जैसी समस्याएं गंभीर रूप से मौजूद हैं।
सूत्रों के अनुसार नगर निगम द्वारा रात के समय विशेष सफाई अभियान चलाए जा रहे हैं ताकि सर्वेक्षण के दौरान शहर की तस्वीर बेहतर दिखाई दे। वहीं सर्वेक्षण टीम किस क्षेत्र में और किस समय निरीक्षण करेगी, इसकी जानकारी भी सीमित अधिकारियों और कर्मचारियों तक ही रखी जा रही है।
नियमों के विपरीत टीम के साथ दिख रहे निगम कर्मचारी
स्वच्छता सर्वेक्षण की प्रक्रिया में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह प्रावधान है कि निरीक्षण के दौरान नगर निगम का स्टाफ टीम के साथ नहीं रहेगा। हालांकि आरोप है कि मेरठ में टीम के होटल में ठहरने से लेकर फील्ड निरीक्षण तक निगम कर्मचारी लगातार उनके साथ मौजूद हैं।
हाल ही में स्वयं महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने कमालपुर स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निरीक्षण किया था, जहां व्यवस्थाओं की बदहाली सामने आई थी। अब सवाल उठ रहे हैं कि सर्वेक्षण टीम उस स्थान को लेकर अपनी रिपोर्ट में क्या उल्लेख करेगी।
तीन दिन से टीम को तलाश रहे थे पार्षद
वॉर्ड-50 के पार्षद संजय सैनी ने आरोप लगाया कि वह पिछले तीन दिनों से सर्वेक्षण टीम से संपर्क करने का प्रयास कर रहे थे। मंगलवार सुबह उनकी टीम के एक सदस्य से फोन पर बातचीत हुई, जिसमें उन्हें बताया गया कि टीम वॉर्ड-1 क्षेत्र का निरीक्षण कर रही है।
पार्षद सैनी ने टीम लीडर से कहा कि केवल वातानुकूलित वाहनों से उतरकर औपचारिक निरीक्षण करने से वास्तविक स्थिति सामने नहीं आएगी। उन्होंने टीम से लोहियानगर, गांवड़ी क्षेत्र, कूड़ा निस्तारण प्लांट, नालों और घनी आबादी वाली बस्तियों का दौरा करने की मांग की ताकि शहर की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके।
उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में नाले ओवरफ्लो हैं, जलभराव की समस्या बनी हुई है और सफाई व्यवस्था को लेकर लोगों में असंतोष है। यदि इन स्थानों का निरीक्षण किया जाए तो शहर की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
होटल पहुंचने पर मची अफरा-तफरी
पार्षद संजय सैनी ने आरोप लगाया कि जब उन्हें जानकारी मिली कि कैंट क्षेत्र के एक होटल में सर्वेक्षण टीम ठहरी हुई है और वहां नगर निगम के कर्मचारी भी मौजूद हैं, तो वह स्वयं होटल पहुंच गए। उनके अनुसार वहां पहुंचते ही निगम कर्मचारियों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कुछ कर्मचारी वहां से हट गए। उन्होंने दावा किया कि टीम के कुछ सदस्य भी उनसे बचने का प्रयास करते दिखाई दिए।
पिछली रैंकिंग पर भी उठाए सवाल
पार्षद सैनी ने कहा कि पिछले वर्ष भी स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान वास्तविक स्थिति को नजरअंदाज कर नगर निगम की बेहतर छवि प्रस्तुत की गई थी, जिसके परिणामस्वरूप शहर की रैंकिंग में सुधार हुआ। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस बार भी सर्वेक्षण में अनियमितता या पक्षपात पाया गया तो वह शासन स्तर तक शिकायत दर्ज कराएंगे।
नगर निगम ने आरोपों को किया खारिज
उधर नगर निगम प्रशासन ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। वरिष्ठ स्वास्थ्य प्रभारी एवं अपर नगर आयुक्त लवी त्रिपाठी का कहना है कि स्वच्छता सर्वेक्षण की टीम पूरी तरह स्वतंत्र रूप से शहर का निरीक्षण कर रही है और निर्धारित मानकों के अनुसार मूल्यांकन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि नगर निगम द्वारा शहर में नियमित रूप से सफाई कार्य कराया जाता है और लोहियानगर तथा गांवड़ी स्थित कूड़ा निस्तारण संयंत्र सुचारू रूप से संचालित हो रहे हैं। नगर निगम का दावा है कि सर्वेक्षण टीम को किसी प्रकार से प्रभावित करने का प्रयास नहीं किया जा रहा है और सभी व्यवस्थाएं निर्धारित नियमों के अनुरूप हैं।
पारदर्शिता पर उठे बड़े सवाल
स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर उठे ये आरोप नगर निगम की कार्यप्रणाली और सर्वेक्षण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सर्वेक्षण की अंतिम रिपोर्ट में मेरठ की वास्तविक तस्वीर कितनी सामने आती है और क्या जनता तथा जनप्रतिनिधियों की शिकायतों को कोई स्थान मिलता है या नहीं। फिलहाल शहर में स्वच्छता सर्वेक्षण से अधिक उसकी निष्पक्षता और पारदर्शिता चर्चा का विषय बनी हुई है।