10 दिवसीय शोध कार्यशाला को संबोधित करते डॉ. एल के गंगवार
मेरठ। सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ के आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग की ओर से “Strengthening Research Competency by Transforming Ideas into Quality Scientific Outputs” विषय पर 10 दिवसीय क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने किया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम “Development of Terminal Heat Tolerant and Disease Resistant High Yielding Varieties of Wheat with Enhanced Nutritional Quality” परियोजना के अंतर्गत प्रायोजित किया गया है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों की अनुसंधान क्षमता को विकसित करना तथा उन्हें शोध-विचारों को गुणवत्तापूर्ण वैज्ञानिक प्रकाशनों और अन्य प्रभावी वैज्ञानिक आउटपुट में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक ज्ञान एवं कौशल प्रदान करना है।
गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण जरूरी
उद्घाटन अवसर पर कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने कहा कि वर्तमान समय में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान के लिए केवल शोध करना पर्याप्त नहीं है। शोध-विचारों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ विकसित करना, प्राप्त परिणामों का उचित विश्लेषण करना और उन्हें प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि किसी शोध की उपयोगिता तभी अधिक प्रभावी बनती है, जब उसके परिणामों को उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक प्रकाशनों, तकनीकी दस्तावेजों और उपयोगी वैज्ञानिक आउटपुट में परिवर्तित किया जा सके। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम युवा वैज्ञानिकों और शोधार्थियों की अनुसंधान क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
10 दिनों में शोध की विभिन्न प्रक्रियाओं का मिलेगा प्रशिक्षण
प्रशिक्षण कार्यक्रम के निदेशक डॉ. एल.के. गंगवार ने कार्यक्रम की रूपरेखा और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 10 दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को वैज्ञानिक अनुसंधान की विभिन्न महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं से परिचित कराया जाएगा।
प्रशिक्षण में शोध-विचार के विकास, शोध लेखन, वैज्ञानिक प्रकाशन, डेटा विश्लेषण, वैज्ञानिक संचार और गुणवत्तापूर्ण वैज्ञानिक आउटपुट तैयार करने से संबंधित व्यावहारिक एवं तकनीकी जानकारी प्रदान की जाएगी। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को अनुसंधान कार्य के विभिन्न चरणों को व्यवस्थित और प्रभावी तरीके से समझने में सक्षम बनाना है।
व्याख्यान और व्यावहारिक सत्रों के माध्यम से होगा प्रशिक्षण
कार्यक्रम के दौरान विषय विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान, व्यावहारिक सत्र, तकनीकी प्रस्तुतियां और संवादात्मक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसके माध्यम से प्रतिभागियों को शोध कार्य से जुड़ी तकनीकी बारीकियों को समझने और उनका व्यावहारिक उपयोग करने का अवसर मिलेगा।
प्रशिक्षण में प्रतिभागियों की अनुसंधान दक्षता को विकसित करने के साथ-साथ उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावशाली वैज्ञानिक आउटपुट तैयार करने के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
युवा वैज्ञानिकों और शोधार्थियों के लिए उपयोगी पहल
यह क्षमता निर्माण कार्यक्रम विशेष रूप से युवा वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और संबंधित प्रतिभागियों के लिए उपयोगी साबित होने की उम्मीद है। प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को अपने शोध-विचारों को व्यवस्थित करने, वैज्ञानिक तरीके से शोध परिणामों का विश्लेषण करने और उन्हें प्रभावी वैज्ञानिक लेखन के माध्यम से प्रस्तुत करने की समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा।
कार्यक्रम के माध्यम से अनुसंधान की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ वैज्ञानिक समुदाय के लिए उपयोगी और प्रभावशाली शोध आउटपुट तैयार करने की दिशा में प्रतिभागियों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
विश्वविद्यालय के अधिकारियों और वैज्ञानिकों की रही मौजूदगी
उद्घाटन कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. वी.पी. सिंह, निदेशक अनुसंधान डॉ. कमल खिलारी, अधिष्ठाता कृषि डॉ. रामजी सिंह, प्रशिक्षण कार्यक्रम के निदेशक डॉ. एल.के. गंगवार तथा सह-निदेशक डॉ. हितेश कुमार सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, वैज्ञानिक और प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।
विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने इस प्रकार के क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को अनुसंधान की गुणवत्ता बढ़ाने और युवा शोधकर्ताओं को नई वैज्ञानिक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
अनुसंधान कौशल को नई दिशा देने का प्रयास
कार्यक्रम के सह-निदेशक डॉ. हितेश कुमार ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों और प्रतिभागियों का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता की अपेक्षा जताई।
आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग की ओर से आयोजित यह 10 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शोधकर्ताओं को अपने विचारों को बेहतर वैज्ञानिक कार्य में बदलने, शोध परिणामों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने और गुणवत्तापूर्ण वैज्ञानिक आउटपुट तैयार करने की दिशा में व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करेगा। विश्वविद्यालय की इस पहल से अनुसंधान क्षमता निर्माण और वैज्ञानिक उत्कृष्टता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।