हरीशंकरी पौधों के रोपण का अभियान का शुभारंभ करते जिलाधिकारी डा वी के सिंह
मेरठ, 8 सितंबर 2026। पर्यावरण संरक्षण और मेरठ जिले में हरित आवरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हरिशंकरी रोपण अभियान की शुरुआत की गई है। अभियान के तहत जिले के ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में बरगद, पीपल और पिलखन के पौधों का रोपण किया जाएगा। अभियान के बैनर का शुभारंभ जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर अभियान से जुड़े पदाधिकारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
अभियान को लोक भारती एवं जिला प्रशासन, मेरठ के सहयोग से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके अंतर्गत 9 सितंबर 2026 को मेरठ के विभिन्न ग्राम पंचायतों और शहरी वार्डों में हरिशंकरी पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभियान का उद्देश्य केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों के संरक्षण, देखभाल और उनके माध्यम से लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है।
780 हरिशंकरी पौधों के सेट किए गए तैयार
हरिशंकरी रोपण अभियान के अंतर्गत 780 हरिशंकरी पौधों के सेट तैयार किए गए हैं। प्रत्येक सेट में एक बरगद, एक पीपल और एक पिलखन का पौधा शामिल है। इन पौधों को जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों और शहरी वार्डों में निर्धारित स्थानों पर लगाया जाएगा।
अभियान के माध्यम से ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में अधिक से अधिक हरित क्षेत्र विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही लोगों को इन पारंपरिक एवं महत्वपूर्ण वृक्षों के पर्यावरणीय महत्व के बारे में जानकारी देकर उन्हें पौधों की देखभाल के लिए भी प्रेरित किया जाएगा।
क्या है हरिशंकरी रोपण?
हरिशंकरी से आशय बरगद, पीपल और पिलखन के पौधों का एक साथ रोपण है। भारतीय परंपरा में इन वृक्षों का विशेष महत्व माना जाता है और इन्हें प्रकृति, जीवन तथा पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर देखा जाता है।
एक ही स्थान पर तीनों वृक्षों के पौधे लगाने की इस पहल के पीछे उद्देश्य भविष्य में एक ऐसे हरित परिसर का निर्माण करना है, जहां विकसित होने के बाद ये वृक्ष लंबे समय तक पर्यावरणीय संतुलन में योगदान दे सकें।
दिशाओं के अनुसार होगी पौधों की स्थापना
हरिशंकरी रोपण अभियान में पौधों के रोपण को लेकर विशेष दिशा-व्यवस्था भी निर्धारित की गई है। अभियान की योजना के अनुसार बरगद का पौधा उत्तर दिशा, पीपल का पौधा पूर्व दिशा और पिलखन का पौधा पश्चिम दिशा में लगाया जाएगा।
इस व्यवस्था के तहत एक ही स्थान पर तीनों वृक्षों का समूह विकसित किया जाएगा। समय के साथ इन पौधों के बड़े वृक्षों में विकसित होने पर संबंधित स्थान हरियाली और प्राकृतिक वातावरण से समृद्ध हो सकेगा।
पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे वृक्ष
अभियान से जुड़े लोगों के अनुसार बरगद, पीपल और पिलखन जैसे वृक्ष लंबे समय तक जीवित रहने वाले वृक्षों में शामिल हैं। पर्याप्त स्थान, पानी और नियमित देखभाल मिलने पर ये वृक्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण हरित संपदा बन सकते हैं।
पौधारोपण के माध्यम से जिले के हरित आवरण को बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर छाया, प्राकृतिक आवास और जैव विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में भी योगदान किया जा सकता है।
हरियाली बढ़ने के साथ पर्यावरणीय लाभ
हरिशंकरी अभियान के तहत लगाए जाने वाले पौधे भविष्य में विकसित होकर स्थानीय पर्यावरण के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। वृक्षों की छाया और वाष्पोत्सर्जन स्थानीय वातावरण को अपेक्षाकृत ठंडा रखने में मदद करते हैं। वहीं वृक्ष धूल को रोकने और कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषण जैसी प्राकृतिक प्रक्रियाओं में भी भूमिका निभाते हैं।
बड़े वृक्ष पक्षियों और विभिन्न जीव-जंतुओं के लिए आश्रय एवं भोजन उपलब्ध कराने में भी सहायक होते हैं। इसके अलावा वृक्षों की जड़ें मिट्टी को बांधने और मृदा कटाव को कम करने में योगदान देती हैं। इस दृष्टि से पौधारोपण अभियान को पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संपदा तैयार करने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।
जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह ने किया अभियान के बैनर का लोकार्पण
हरिशंकरी रोपण अभियान के अवसर पर जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह द्वारा अभियान के बैनर का शुभारंभ किया गया। बैनर के माध्यम से अभियान के उद्देश्य और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को आमजन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
अभियान के तहत प्रशासनिक स्तर पर पौधों की उपलब्धता, वितरण और रोपण से संबंधित व्यवस्थाओं के समन्वय पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि निर्धारित स्थानों पर पौधों का रोपण व्यवस्थित तरीके से कराया जा सके।
नोडल अधिकारी और वन विभाग के समन्वय से अभियान को मिलेगी गति
अभियान के लिए नोडल अधिकारी श्रीमती वंदना फोगाट तथा डीएफओ के नेतृत्व में पौधों की उपलब्धता, वितरण एवं रोपण संबंधी व्यवस्थाओं को समन्वित किया जा रहा है। अभियान को सफल बनाने के लिए प्रशासनिक तंत्र के साथ सामाजिक संगठनों और स्थानीय स्तर पर लोगों की सहभागिता को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अभियान का उद्देश्य जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पौधारोपण को व्यापक स्वरूप देना और अधिक से अधिक लोगों को पर्यावरण संरक्षण की गतिविधियों से जोड़ना है।
जनभागीदारी से साकार होगा हरित मेरठ का संकल्प
हरिशंकरी रोपण अभियान की सफलता केवल पौधे लगाने से नहीं, बल्कि उनके जीवित रहने और नियमित संरक्षण से सुनिश्चित होगी। इसके लिए ग्राम पंचायतों, नगर निकायों, सामाजिक संगठनों, विद्यालयों, युवाओं और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
अभियान से जुड़े लोगों ने मेरठवासियों से अपील की है कि वे अपने-अपने ग्राम पंचायत और वार्ड में अभियान में उत्साहपूर्वक भाग लें। पौधों को नियमित पानी देने, उनकी सुरक्षा करने और उनके विकास की जिम्मेदारी सामूहिक रूप से निभाने से ही पौधारोपण का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सकेगा।
अभियान से जुड़े लोगों ने लिया हरित मेरठ का संकल्प
अभियान के माध्यम से लोगों को प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक करते हुए मेरठ को अधिक हरा-भरा बनाने का संदेश दिया जा रहा है। अभियान का संदेश है—“एक हरिशंकरी—प्रकृति के नाम, हर गांव–हर वार्ड, हरित मेरठ का संकल्प।”
आयोजकों का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल सुनिश्चित की जाए तो आने वाले वर्षों में यह अभियान मेरठ के हरित क्षेत्र को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
अभियान के शुभारंभ पर ये रहे मौजूद
हरिशंकरी रोपण अभियान के बैनर लॉन्च के अवसर पर अभियान के संयोजक डॉ. सुमित उपाध्याय, पवन त्यागी, अधिवक्ता संजीव कुमार, मनोज गोयल और सतीश इंसान सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
अभियान के संयोजक डॉ. सुमित उपाध्याय ने बताया कि अभियान का उद्देश्य मेरठ के प्रत्येक गांव और वार्ड को हरियाली से जोड़ना तथा पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी का विषय बनाना है। उन्होंने नागरिकों से अभियान में सक्रिय सहभागिता करने और लगाए गए पौधों की देखभाल सुनिश्चित करने की अपील की।