विकास कार्यों की बरसी मनाते सच संस्था के संदीप पहल एवं क्षेत्रवासी
मेरठ, 13 सितंबर 2026। सी.एम. ग्रैड योजना के अंतर्गत मेरठ की वेस्टर्न कचहरी रोड पर लगभग दो किलोमीटर क्षेत्र में सड़क, नाला एवं अन्य विकास कार्यों का शुभारंभ 13 सितंबर 2025 को किया गया था। शुभारंभ कार्यक्रम में मेरठ के मेयर हरिकांत अहलूवालिया, सभासद अजय गुप्ता चंद्रा आदि की मौजूदगी रही थी। परियोजना को क्षेत्र के विकास और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया था। हालांकि, एक वर्ष पूरा होने के बाद भी विकास कार्य की प्रगति, निर्माण की गुणवत्ता, नालों की उपयोगिता तथा अतिक्रमण के संबंध में गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
एक वर्ष बाद भी विकास कार्य अधूरा
वेस्टर्न कचहरी रोड के विकास कार्य को शुरू हुए एक वर्ष पूरा हो चुका है, लेकिन उपलब्ध स्थिति के अनुसार परियोजना का कार्य अभी पूर्ण नहीं हुआ है। आरोप है कि लगभग 60 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो सका है। इसी को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ. संदीप पाहा ने सवाल उठाते हुए कहा है कि जिस सड़क और आसपास की व्यवस्थाओं को अपेक्षाकृत कम लागत में दुरुस्त किया जा सकता था, उन्हें बड़े स्तर पर तोड़कर जनता के धन से पुनर्निर्माण कराया जा रहा है।
उनका आरोप है कि मौजूदा सड़क एवं अन्य बुनियादी व्यवस्थाओं को पूरी तरह उखाड़ने के बजाय आवश्यक स्थानों पर सुधार और मरम्मत कराई जाती तो काफी कम खर्च में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते थे। इस पूरे मामले में वास्तविक लागत, स्वीकृत बजट, डीपीआर के प्रावधान और अब तक हुए व्यय का सार्वजनिक विवरण सामने आना आवश्यक बताया जा रहा है।
नालियों की संरचना और जल निकासी पर सवाल
डॉ. पाहा के अनुसार, पुराने नालों और नालियों को तोड़कर अपेक्षाकृत छोटा नाला बनाया गया है। उनका कहना है कि इस नाले की सफाई और उसमें पानी के नियमित प्रवाह की पर्याप्त व्यवस्था दिखाई नहीं देती। इससे भविष्य में जलभराव और गंदगी की समस्या उत्पन्न होने की आशंका है।
उनका यह भी आरोप है कि नाले के निर्माण के कारण आसपास स्थित कई घर, दुकानें और गलियां सड़क एवं नाले के स्तर की तुलना में लगभग दो फुट तक नीचे चली गई हैं। नाले से रिसाव की समस्या भी सामने आने का दावा किया गया है। यदि जल निकासी, नाले की ढलान और सफाई की समुचित व्यवस्था नहीं हुई तो बरसात के दौरान स्थानीय नागरिकों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
अतिक्रमण हटाने के बजाय स्थायी किए जाने का आरोप
विकास कार्य को लेकर सबसे गंभीर आरोप अतिक्रमण से संबंधित हैं। डॉ. पाहा का कहना है कि परियोजना के दौरान कई स्थानों पर अतिक्रमण हटाने के बजाय निर्माण की दिशा इस प्रकार निर्धारित की गई कि कथित अतिक्रमण प्रभावित न हों।
उनके अनुसार, कचहरी की दीवार के बाहर मौजूद कथित अवैध शौचालयों, दुकानों आदि को हटाए बिना सड़क की ओर नाला बनाए जाने से परियोजना की मूल योजना और जमीन पर हुए निर्माण के बीच अंतर पैदा हुआ है। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच तथा स्वीकृत डीपीआर और मौके पर हुए निर्माण का तुलनात्मक परीक्षण किए जाने की मांग की जा सकती है।
कचहरी गेट के सामने निर्माण को लेकर भी उठे प्रश्न
कचहरी गेट के सामने पुराने नाले के आसपास कथित अतिक्रमण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। डॉ. पाहा का आरोप है कि अतिक्रमण हटाने के स्थान पर नाले का निर्माण सड़क की ओर कर दिया गया। उन्होंने इस संबंध में कथित भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के आरोप भी लगाए हैं।
ऐसे गंभीर आरोपों की स्थिति में यह आवश्यक है कि नगर निगम तथा संबंधित निर्माण एजेंसी यह स्पष्ट करे कि इस स्थान के लिए डीपीआर में क्या प्रावधान था, मौके पर किस प्रकार का निर्माण स्वीकृत था और वास्तविक रूप से क्या कार्य कराया गया है।
हनुमान मंदिर के आसपास नाले की दिशा पर सवाल
कचहरी गेट के सामने स्थित हनुमान मंदिर के नीचे एवं पीछे से नाला निकाले जाने को लेकर भी आपत्तियां सामने आई हैं। डॉ. पाहा ने सवाल उठाया है कि नाले की यह संरचना स्वीकृत योजना और तकनीकी मानकों के अनुरूप है या नहीं।
इस संबंध में परियोजना की तकनीकी ड्राइंग, साइट प्लान और स्वीकृत डीपीआर को सार्वजनिक किए जाने से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि नाले के निर्माण से मंदिर, आसपास के प्रतिष्ठानों और आम नागरिकों की आवाजाही पर क्या प्रभाव पड़ा है।
आर.जी. डिग्री कॉलेज के कथित अतिक्रमण को लेकर आरोप
वेस्टर्न कचहरी रोड पर आर.जी. डिग्री कॉलेज के आसपास कथित अतिक्रमण को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। डॉ. पाहा का कहना है कि अतिक्रमण हटाने के बजाय उसे स्थायी स्वरूप देने का कार्य हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कथित अतिक्रमण को बचाने में स्थानीय विधायक की भूमिका रही तथा इस मामले में नगर निगम स्तर पर भी प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। संबंधित विधायक, नगर निगम और आर.जी. डिग्री कॉलेज का पक्ष सामने आने के बाद ही इस संबंध में पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
कई स्थानों पर डीपीआर से अलग कार्य होने का आरोप
डॉ. पाहा का दावा है कि वेस्टर्न कचहरी रोड पर लगभग 20 से 25 स्थान ऐसे हैं, जहां स्वीकृत डीपीआर के अनुसार कार्य नहीं किया गया। उनका आरोप है कि कथित रूप से अतिक्रमण को बनाए रखने के लिए निर्माण की दिशा अथवा संरचना में बदलाव किया गया।
यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल निर्माण गुणवत्ता का विषय नहीं रहेगा, बल्कि परियोजना की स्वीकृत योजना और वास्तविक क्रियान्वयन के बीच गंभीर अंतर का मामला बन सकता है। इसलिए संबंधित अधिकारियों द्वारा प्रत्येक प्रमुख निर्माण स्थल का तकनीकी निरीक्षण कर डीपीआर के साथ उसका मिलान कराया जाना आवश्यक है।
नाले की सफाई और पानी के प्रवाह की व्यवस्था पर चिंता
किसी भी नाला निर्माण परियोजना की सफलता केवल नाला बना देने से निर्धारित नहीं होती। उसमें पर्याप्त ढलान, पानी के सुचारु प्रवाह, सफाई के लिए पहुंच, सिल्ट हटाने की व्यवस्था और नियमित रखरखाव की योजना होना भी जरूरी है।
डॉ. पाहा का आरोप है कि वर्तमान निर्माण में नालों में पानी के नियमित प्रवाह और सफाई के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई है। यदि सफाई के लिए आवश्यक पहुंच और तकनीकी व्यवस्था नहीं होगी तो कुछ समय बाद नाला गाद और कचरे से भर सकता है, जिससे जलभराव की समस्या और गंभीर हो सकती है।
निर्माण गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल
परियोजना के निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि सड़क, नाला और अन्य निर्माण कार्य अपेक्षित गुणवत्ता के अनुरूप नहीं हैं। ऐसे आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए निर्माण सामग्री के नमूने, सड़क की मोटाई, कंक्रीट की गुणवत्ता, नाले की संरचना, ढलान और अन्य तकनीकी मानकों की जांच किसी स्वतंत्र तकनीकी संस्था से कराई जा सकती है।
यदि जांच में गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदारी निर्धारित कर संबंधित ठेकेदार और अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
कमीशन और रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच की मांग
डॉ. पाहा ने परियोजना में लगभग 50 प्रतिशत धनराशि के कथित रूप से कमीशन और रिश्वतखोरी में जाने का गंभीर आरोप लगाया है। यह एक अत्यंत गंभीर आरोप है, जिसकी पुष्टि बिना दस्तावेजी या जांच संबंधी साक्ष्यों के नहीं की जा सकती।
इसलिए परियोजना में स्वीकृत लागत, संशोधित लागत, भुगतान की गई धनराशि, ठेकेदार को किए गए भुगतान, माप पुस्तिका, बिल-वाउचर, टेंडर प्रक्रिया और कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र सहित सभी संबंधित दस्तावेजों का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाना उपयोगी होगा। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी धन का वास्तविक उपयोग किस प्रकार हुआ।
नीचे हो गए घरों और दुकानों के लिए भी उठाया गया सवाल
नाले और सड़क के नए स्तर के कारण जिन घरों, दुकानों और गलियों का स्तर कथित रूप से नीचे हो गया है, उनके सामने भविष्य में जलभराव की समस्या उत्पन्न होने की आशंका जताई जा रही है। डॉ. पाहा ने मांग की है कि ऐसे प्रभावित भवनों और रास्तों की स्थिति का सर्वे कराया जाए तथा यदि परियोजना के कारण वास्तविक नुकसान हुआ है तो नियमानुसार समाधान की व्यवस्था की जाए।
स्थानीय नागरिकों के लिए यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि सड़क और नाले का अंतिम स्तर क्या निर्धारित किया गया है तथा बरसात के पानी की निकासी किस दिशा में होगी।
एक वर्ष की समयसीमा और जवाबदेही का सवाल
विकास परियोजना शुरू हुए एक वर्ष पूरा होने के बावजूद कार्य के अधूरे रहने से परियोजना की समयसीमा और निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्न उठते हैं। जनता के धन से संचालित किसी भी बड़े निर्माण कार्य में समय, लागत और गुणवत्ता—तीनों की जवाबदेही महत्वपूर्ण होती है।
ऐसे में नगर निगम और संबंधित विभाग को यह सार्वजनिक करना चाहिए कि परियोजना कब तक पूरी होगी, अब तक कितनी धनराशि खर्च हो चुकी है, कितना कार्य शेष है और निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कौन-कौन से तकनीकी परीक्षण किए गए हैं।
‘काम पूरा होने के बाद एक वर्ष भी नहीं चलेगा’ – भविष्य की गुणवत्ता पर दावा
डॉ. पाहा ने निर्माण की वर्तमान गुणवत्ता पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए दावा किया है कि यदि इसी गुणवत्ता के साथ कथित विकास कार्य पूरा किया गया तो इसके टिकाऊ रहने पर गंभीर प्रश्न खड़े होंगे। उनका कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद भी यदि सड़क और नाले लंबे समय तक उपयोगी नहीं रहते तो जनता के धन का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।
इसलिए परियोजना पूरी होने से पहले स्वतंत्र गुणवत्ता परीक्षण, थर्ड-पार्टी निरीक्षण और आवश्यक तकनीकी प्रमाणन कराया जाना जनहित में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
निष्पक्ष जांच से ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
वेस्टर्न कचहरी रोड विकास कार्य को लेकर सामने आए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी एवं वित्तीय जांच की आवश्यकता महसूस होती है। जांच में स्वीकृत डीपीआर और मौके पर हुए निर्माण की तुलना, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, नाले की क्षमता एवं ढलान, अतिक्रमण की स्थिति, भुगतान संबंधी दस्तावेज और परियोजना की समयसीमा को शामिल किया जाना चाहिए।
साथ ही जिन जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, ठेकेदारों अथवा अन्य पक्षों पर आरोप लगाए गए हैं, उनका पक्ष भी सार्वजनिक रूप से सामने आना चाहिए। आरोपों की निष्पक्ष जांच और संबंधित पक्षों का जवाब ही यह तय कर सकेगा कि विकास कार्य में वास्तव में अनियमितता हुई है या निर्माण संबंधी आपत्तियां किसी अन्य कारण से उत्पन्न हुई हैं।
जनता के धन और जनहित का प्रश्न
वेस्टर्न कचहरी रोड का विकास केवल सड़क और नाला बनाने की परियोजना नहीं है, बल्कि यह हजारों नागरिकों की रोजमर्रा की आवाजाही, जल निकासी और सार्वजनिक सुविधा से जुड़ा विषय है। इसलिए विकास कार्य ऐसा होना चाहिए जो तकनीकी रूप से मजबूत, पारदर्शी, टिकाऊ और जनहित में हो।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक वर्ष में परियोजना की वास्तविक प्रगति कितनी हुई, स्वीकृत डीपीआर के अनुसार कितना काम हुआ, कितना सरकारी धन खर्च हुआ और निर्माण पूरा होने के बाद उसकी गुणवत्ता एवं टिकाऊपन की जिम्मेदारी किसकी होगी?
इन सभी सवालों का स्पष्ट और दस्तावेजी जवाब सामने आने पर ही वेस्टर्न कचहरी रोड विकास परियोजना की वास्तविक स्थिति जनता के सामने पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।