डॉ ज्ञानेश्वर टांक
मेरठ। लाला लाजपत राय स्मारक मेडिकल कॉलेज, मेरठ में गुरुवार को केंद्र सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल में चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में हुई गुणात्मक वृद्धि और उपलब्धियों पर एक महत्वपूर्ण विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मेडिकल कॉलेज के उप-प्राचार्य डॉ. ज्ञानेश्वर टांक ने की। इस अवसर पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) उत्तर प्रदेश, आईएमए मेरठ तथा मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ संकाय सदस्यों ने भाग लिया।
गोष्ठी में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार, स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, मेडिकल कॉलेजों की संख्या में वृद्धि, मेडिकल सीटों के विस्तार, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं और अनुसंधान के क्षेत्र में हुए विकास पर विस्तृत चर्चा की गई।
चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक विस्तार
उप-प्राचार्य डॉ. ज्ञानेश्वर टांक ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले 12 वर्षों में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिला है। उन्होंने बताया कि देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए अवसरों का विस्तार हुआ है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 के आसपास देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या लगभग 387 थी, जो अब बढ़कर 820 से अधिक हो गई है। यह वृद्धि चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
एमबीबीएस और पीजी सीटों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
डॉ. टांक ने बताया कि मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ एमबीबीएस और पीजी सीटों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने कहा कि देश में एमबीबीएस सीटों की संख्या लगभग 59 हजार से बढ़कर 1.28 लाख से अधिक हो चुकी है। इससे चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने वाले विद्यार्थियों को अधिक अवसर प्राप्त हुए हैं।
इसी प्रकार स्नातकोत्तर (पीजी) चिकित्सा शिक्षा की सीटों में भी बड़ी वृद्धि हुई है। पीजी सीटों की संख्या लगभग 31 हजार से बढ़कर 86 हजार से अधिक पहुंच गई है, जिससे विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने में सहायता मिल रही है।
एम्स संस्थानों का विस्तार
विचार गोष्ठी में बताया गया कि देश में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले जहां देश में केवल 7 एम्स संस्थान संचालित थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 23 तक पहुंच गई है। इससे देश के विभिन्न क्षेत्रों में उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिली है।
डिजिटल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मिला बढ़ावा
गोष्ठी में चिकित्सा शिक्षा के आधुनिकीकरण पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने बताया कि मेडिकल विद्यार्थियों की उच्च स्तरीय पढ़ाई और प्रशिक्षण के लिए ऑनलाइन शिक्षा मंच विकसित किए गए हैं, जिससे गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा मिला है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल क्रांति के तहत आभा आईडी (ABHA ID) प्रणाली लागू की गई है। इसके माध्यम से मरीजों का स्वास्थ्य डेटा सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से संग्रहित किया जा रहा है, जिससे उपचार प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
नैतिक शिक्षा और अनुसंधान पर विशेष ध्यान
कार्यक्रम में बताया गया कि मेडिकल शिक्षा में नैतिक मूल्यों और संवाद कौशल को मजबूत करने के लिए एईटीकॉम (AETCOM) मॉडल लागू किया गया है। इस मॉडल का उद्देश्य मेडिकल विद्यार्थियों को बेहतर चिकित्सक बनने के साथ-साथ मरीजों के प्रति संवेदनशील और उत्तरदायी बनाना है।
इसके अलावा चिकित्सा अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के बजट में वृद्धि की गई है। चिकित्सा शोध कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नैतिकता समितियों का भी गठन किया गया है।
चिकित्सा क्षेत्र के वरिष्ठ विशेषज्ञ रहे उपस्थित
विचार गोष्ठी में आईएमए उत्तर प्रदेश के स्टेट प्रेसिडेंट डॉ. राजीव गोयल, स्टेट सेक्रेटरी आशीष अग्रवाल, फाइनेंस सेक्रेटरी डॉ. वाणी पुरी, आईएमए एमएसएन के अध्यक्ष डॉ. शलभ गुप्ता, आईएमए मेरठ के अध्यक्ष डॉ. मनीष त्यागी, सचिव डॉ. विकास गुप्ता, आईएमए गाजियाबाद की अध्यक्ष डॉ. अल्पना कंसल, सचिव डॉ. राजीव त्यागी सहित अनेक वरिष्ठ चिकित्सक एवं मेडिकल कॉलेज के संकाय सदस्य उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त डॉ. प्रीति सिंह, डॉ. आभा गुप्ता, डॉ. लोकेश कुमार सिंह, डॉ. गौरव गुप्ता, डॉ. ललिता चौधरी, डॉ. प्रीति राठी, डॉ. नीरज मसंद और डॉ. राहुल सिंह सहित कई चिकित्सा विशेषज्ञों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
आयोजन समिति को दी गई शुभकामनाएं
कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं ने चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में हुए सकारात्मक बदलावों पर संतोष व्यक्त किया तथा आयोजन समिति को सफल कार्यक्रम के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं में हो रहे निरंतर सुधार से आने वाले वर्षों में देश की स्वास्थ्य व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा आम जनता को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।