लोक आयुक्त संगठन के पचासवें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
लखनऊ, 14 सितंबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी भी संवैधानिक संस्था में सामान्य नागरिक का विश्वास ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। जो संस्था आमजन के विश्वास पर खरी उतरती है, लोकतांत्रिक व्यवस्था में उसकी प्रासंगिकता और मजबूती को कोई कम नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि गुड गवर्नेंस पूरी तरह पब्लिक ट्रस्ट पर निर्भर करता है। यदि जनता का शासन और संवैधानिक संस्थाओं पर विश्वास नहीं होगा तो सुशासन के लक्ष्य को हासिल करना कठिन होगा। इसलिए जरूरी है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति भी संवैधानिक संस्थाओं पर विश्वास करते हुए गौरव और गरिमा का अनुभव कर सके।
मुख्यमंत्री सोमवार को लोक आयुक्त संगठन के 50वें स्थापना दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने लोक आयुक्त प्रशासन की स्मारिका और सूचना पुस्तिका का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने लोक आयुक्त संगठन की 50 वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा लघु फिल्म भी देखी।
जनविश्वास पर खरा उतरना लोकतंत्र की सबसे बड़ी कसौटी
मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल किसी संस्था का गठन कर देना ही पर्याप्त नहीं है। उस संस्था की वास्तविक सफलता इस बात से तय होती है कि वह जनता के विश्वास पर कितनी खरी उतरती है। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने भारत के लिए संसदीय लोकतंत्र की व्यवस्था दी है, जिसमें जनता सर्वोच्च है। जनप्रतिनिधि यदि जनता का विश्वास खो देता है तो उसे सत्ता से बाहर होना पड़ता है और हर पांच वर्ष में उसे जनता के बीच जाकर अपने कार्यों का हिसाब देना होता है।
उन्होंने कहा कि यदि कोई जनप्रतिनिधि जनभावनाओं और जनता की अपेक्षाओं का सम्मान नहीं करता तो जनता को लोकतांत्रिक तरीके से उसे बदलने और किसी अन्य प्रतिनिधि को अवसर देने का पूरा अधिकार है। यही लोकतांत्रिक व्यवस्था की ताकत है।
न्याय का आधार सत्य और समानता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने न्याय, सत्य और समता को भारतीय व्यवस्था की मौलिक आवश्यकता माना था। प्रत्येक व्यक्ति को न्याय पाने का अधिकार है और न्याय का आधार सत्य की कसौटी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के साथ बिना किसी भेदभाव के समान व्यवहार होना चाहिए।
उन्होंने शिकायतों के निस्तारण में भी मेरिट को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी शिकायत का समाधान केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि शिकायतकर्ता को वास्तविक संतुष्टि भी मिलनी चाहिए।

शिकायत प्रणाली का दुरुपयोग करने वालों पर हो कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि आईजीआरएस, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और जनता दर्शन जैसे माध्यमों के जरिए प्रदेश में जनसमस्याओं का समयबद्ध समाधान कराया जा रहा है। हालांकि कुछ लोग ऐसी शिकायतें भी करते हैं, जिनका उनकी व्यक्तिगत समस्या से कोई संबंध नहीं होता और उनका उद्देश्य केवल किसी अन्य व्यक्ति या संस्था के खिलाफ शिकायत करना होता है।
उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि एक व्यक्ति ने एक विद्यालय के खिलाफ शिकायत की। जांच में शिकायत झूठी पाए जाने के बाद भी उसने पूरे जिले के विद्यालयों की जांच कराने की मांग कर दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार की झूठी और अनावश्यक शिकायतों को खारिज किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे पूरी व्यवस्था का समय और संसाधन बर्बाद होता है तथा उन ईमानदार लोगों के अधिकार भी प्रभावित होते हैं, जो वास्तव में न्याय की अपेक्षा लेकर शिकायत करते हैं।
उन्होंने कहा कि शिकायत प्रणाली का दुरुपयोग करने वाले तत्वों से दूरी बनाए रखना आवश्यक है। संवैधानिक संस्थाओं को विश्वास का प्रतीक बनाने के लिए यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके अधिकारों का दुरुपयोग न हो और प्रत्येक शिकायत का मेरिट के आधार पर परीक्षण किया जाए।
तकनीक के इस्तेमाल से पीडीएस की शिकायतों में आई कमी
मुख्यमंत्री ने लोक आयुक्त संगठन द्वारा तकनीक के बेहतर इस्तेमाल की सराहना की। उन्होंने प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2017 में खाद्यान्न वितरण से जुड़ी शिकायतें बड़ी संख्या में आती थीं। जनता दर्शन में आने वाली 100 शिकायतों में करीब 60 शिकायतें पीडीएस से संबंधित होती थीं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने तकनीक का इस्तेमाल करते हुए ई-पॉस मशीनों को मुख्यालय स्तर पर निगरानी व्यवस्था से जोड़ा। इसके बाद राशन वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता होने पर तत्काल अलर्ट मिलने लगा। इससे हेराफेरी की संभावनाओं पर प्रभावी नियंत्रण हुआ।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में जनता दर्शन में बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर आते हैं, लेकिन पीडीएस से संबंधित शिकायतें लगभग समाप्त हो गई हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार सरकार बिना भेदभाव लगभग 16 करोड़ लोगों को राशन उपलब्ध करा रही है। एफसीआई गोदाम से गंतव्य तक पहुंचने वाले ट्रकों की निगरानी और ट्रैकिंग की व्यवस्था भी की गई है, जिससे राशन वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता आई है।
साढ़े नौ वर्षों में 34 लाख राजस्व मामलों का निस्तारण
मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2017 में भूमि विवाद, पैमाइश, वरासत और नामांतरण सहित करीब 34 लाख मामले लंबित थे। इनमें लगभग छह लाख मामले केवल वरासत से संबंधित थे। इन मामलों के लंबित रहने के कारण लोगों के बीच अनावश्यक विवाद पैदा होते थे।
उन्होंने बताया कि इन मामलों के निस्तारण के लिए समयसीमा निर्धारित की गई। लैंड यूज से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए भी समयसीमा तय की गई और समय पर निस्तारण नहीं होने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही निर्धारित करने की व्यवस्था की गई।
मुख्यमंत्री के अनुसार पिछले साढ़े नौ वर्षों में लगभग 34 लाख लंबित मामलों का निस्तारण किया गया, हालांकि इसी अवधि में करीब नौ लाख नए मामले भी सामने आए। उन्होंने कहा कि वरासत, पैमाइश और अन्य राजस्व संबंधी समस्याओं के समाधान की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।
तकनीक से पैमाइश में बढ़ी पारदर्शिता
मुख्यमंत्री ने कहा कि भूमि की पैमाइश से जुड़ी शिकायतों में अक्सर यह आरोप लगता था कि लेखपाल द्वारा जरीब की पैमाइश में थोड़ी हेराफेरी कर दी गई। अब तकनीक के इस्तेमाल से इस समस्या के समाधान की दिशा में कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने बताया कि हर तहसील में तकनीकी व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है, जिससे पैमाइश में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। अब कोऑर्डिनेट के आधार पर जमीन की पैमाइश और सीमांकन किया जा सकेगा। इससे किसी भी व्यक्ति की जमीन की सीमा में मनमाने तरीके से बदलाव की संभावना कम होगी और विवादों के समाधान में तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
शिकायतों के अंबार से मुक्ति दिला सकती है तकनीक
मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल करके शिकायतों के अंबार को कम किया जा सकता है। ऐसे प्रयास जनविश्वास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि कई बार लोकसेवक को बचाने के प्रयास हो सकते हैं, लेकिन जब शिकायत लोक आयुक्त संगठन के समक्ष आती है तो उसका मेरिट के आधार पर परीक्षण किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति के पास अधिकार और ताकत आती है तो कभी-कभी वह उदंडतापूर्ण व्यवहार करने लगता है। ऐसे मामलों पर प्रभावी अंकुश जरूरी है। लोकसेवकों को अधिकारों के साथ-साथ मूल्यों, नैतिकता और जिम्मेदारी के प्रति भी जागरूक करना आवश्यक है।
14 सितंबर 1977 को शुरू हुआ था उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त संगठन का कार्य
मुख्यमंत्री ने लोक आयुक्त संगठन के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में लोक आयुक्त संगठन का विधिवत कार्य 14 सितंबर 1977 को प्रारंभ हुआ था। उस समय न्यायमूर्ति विशंभर दयाल ने उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त संगठन को नेतृत्व प्रदान किया था।
उन्होंने कहा कि संगठन ने पांच दशक की अपनी यात्रा में जनहित और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। वर्तमान में न्यायमूर्ति संजय मिश्र के नेतृत्व में लोक आयुक्त संगठन अपनी यात्रा को नई पहचान और नई दिशा के साथ आगे बढ़ा रहा है।
विश्वास ही लोकतंत्र की असली ताकत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक ताकत जनता का विश्वास है। उन्होंने केंद्र सरकार की जनधन योजना और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचने में बिचौलियों की भूमिका रहती थी, लेकिन तकनीक के इस्तेमाल से इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का मूल भाव है—जनता का, जनता के द्वारा और जनता के लिए शासन। इसकी वास्तविक कसौटी यही है कि जिस व्यक्ति का जो अधिकार है, उसे वह प्राप्त हो। मुख्यमंत्री ने विधवा, निराश्रित और वृद्धजनों की समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि अब डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में सहायता राशि पहुंचाई जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में करीब 1.10 करोड़ लोगों को वार्षिक 12 हजार रुपये की पेंशन दी जा रही है और बिचौलियों की भूमिका समाप्त करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए गए हैं।
लोक कल्याण का मार्ग बने तकनीक
मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा एनालिसिस, साइबर सिक्योरिटी और ई-गवर्नेंस जैसी तकनीकों का बेहतर उपयोग किया जा रहा है। इन तकनीकों के माध्यम से प्रशासन की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि तकनीक का उद्देश्य केवल व्यवस्था को आधुनिक बनाना नहीं, बल्कि उसे लोक कल्याण का माध्यम बनाना होना चाहिए। शासन में जितनी अधिक शुचिता, पारदर्शिता और ईमानदारी होगी, उतने ही बेहतर परिणाम सामने आएंगे। मुख्यमंत्री ने लोक आयुक्त संगठन को शासन की ओर से हर सकारात्मक सहयोग उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया।
50 वर्षों की यात्रा का दस्तावेज तैयार करने का सुझाव
मुख्यमंत्री ने लोक आयुक्त संगठन से अपेक्षा की कि 50 वर्षों की यात्रा का एक विस्तृत दस्तावेज तैयार किया जाए। इसमें संगठन के समक्ष आए मामलों, उनके निस्तारण, की गई कार्रवाई और महत्वपूर्ण उपलब्धियों का उल्लेख किया जाए।
उन्होंने सुझाव दिया कि देशभर के लोक आयुक्तों को आमंत्रित कर एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाए। साथ ही लोकपाल और अन्य संबंधित सदस्यों को भी आमंत्रित कर विभिन्न विषयों पर संवाद किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए संवाद बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि संवाद और अनुभवों के आदान-प्रदान के माध्यम से लोक आयुक्त संगठन आगामी 50 वर्षों के लिए एक प्रभावी कार्ययोजना और बेहतर रोडमैप तैयार करेगा।
ये लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में लोक आयुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र, उप लोक आयुक्त शंभू सिंह यादव, दिनेश कुमार सिंह, सुरेंद्र कुमार यादव, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य लोग मौजूद रहे।