कोटला में नवनिर्मित गुरुद्वारा श्री गुरु नानक दरबार
गुरु सिमरन और कीर्तन से भक्तिमय हुआ वातावरण, संगत ने श्रद्धा के साथ ग्रहण किया प्रसाद और लंगर
मेरठ । गुरुद्वारा श्री गुरुनानक दरबार कोटला में नव-निर्मित गुरुद्वारे का उद्घाटन धार्मिक श्रद्धा और भक्तिमय वातावरण में किया गया। इस अवसर पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश कराया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर गुरु चरणों में शीश नवाया और गुरबाणी का श्रवण किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान गुरुद्वारा परिसर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा।
गुरु सिमरन के बाद हुआ कीर्तन
कार्यक्रम की शुरुआत गुरु सिमरन के साथ हुई। इसके उपरांत प्रेम सिंह, कुलजीत कौर, भोली, पूनम, सीमा भोला और बबली ने कीर्तन प्रस्तुत कर संगत को निहाल किया। कीर्तन के दौरान गुरुद्वारा परिसर में मौजूद संगत ने श्रद्धापूर्वक गुरबाणी का श्रवण किया और गुरु के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। नव-निर्मित गुरुद्वारे में गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रकाश के अवसर पर श्रद्धालुओं ने धार्मिक मर्यादा के साथ कार्यक्रम में सहभागिता की। आयोजन के दौरान संगत के बीच आध्यात्मिक और धार्मिक वातावरण बना रहा।

स्त्री-समूह ने कुलजीत कौर को भेंट किया सरोपा
कार्यक्रम के दौरान स्त्री-समूह की ओर से कुलजीत कौर को सरोपा भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने धार्मिक सेवा और आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों का उत्साहवर्धन किया। वहीं, गुरुद्वारा के प्रधान संजय भोला ने स. दलजीत सिंह को सरोपा भेंट कर सम्मानित किया। सरोपा भेंट करने की परंपरा के माध्यम से धार्मिक सेवा और योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया।
संगत के लिए लगाया गया लंगर
धार्मिक कार्यक्रम के उपरांत संगत के लिए लंगर की व्यवस्था की गई। जयप्रकाश, कमल, संदीप, डिंपल, संजय, चंदन, नीरज और हरीश ने लंगर वितरण की सेवा संभाली। श्रद्धालुओं ने पंगत में बैठकर प्रसाद और लंगर ग्रहण किया। आयोजकों की ओर से बताया गया कि गुरुद्वारा साहिब में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम का उद्देश्य संगत को गुरु की शिक्षाओं से जोड़ना और आपसी प्रेम, सेवा तथा भाईचारे की भावना को मजबूत करना है। कार्यक्रम में शामिल संगत ने नव-निर्मित गुरुद्वारे में गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रकाश को श्रद्धा और आध्यात्मिक आनंद का अवसर बताया।
सेवा और भाईचारे का संदेश
कार्यक्रम के दौरान गुरु की शिक्षाओं के अनुरूप सेवा, सिमरन और संगत की भावना को प्रमुखता दी गई। कीर्तन, सरोपा सम्मान और लंगर सेवा के माध्यम से श्रद्धालुओं ने धार्मिक आयोजन में अपनी सहभागिता निभाई। नव-निर्मित गुरुद्वारे के उद्घाटन और गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रकाश के अवसर पर उपस्थित लोगों ने क्षेत्र में सुख-शांति और सभी के कल्याण की कामना की।