हथिनी माधुरी की नांदणी मठ वापसी के प्रयासों के लिए सुदीप जैन का भव्य सम्मान
नांदणी मठ में आयोजित समारोह में पीठाधीश स्वस्ति श्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी ने दिया आशीर्वाद, सुदीप जैन बोले—माधुरी की वापसी संवेदना और जीव दया की जीत
मेरठ । हथिनी माधुरी को गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा से महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित नांदणी मठ वापस लाने के लिए किए गए निरंतर प्रयासों के लिए मेरठ निवासी एवं विश्व श्रमण संस्कृति श्रीसंघ के राष्ट्रीय महामंत्री सुदीप जैन का रविवार को नांदणी मठ में आयोजित विशाल समारोह में भव्य सम्मान किया गया। माधुरी की वापसी को लेकर लंबे समय से चल रहे प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाने वाले सुदीप जैन के सम्मान के दौरान नांदणी मठ में मौजूद श्रद्धालुओं और समाज के लोगों ने उनका अभिनंदन किया।
नांदणी मठ के पीठाधीश ने दिया आशीर्वाद
सम्मान समारोह के दौरान नांदणी मठ के पीठाधीश स्वस्ति श्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी जी ने सुदीप जैन को आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने माधुरी की नांदणी मठ वापसी के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की। समारोह में दक्षिण भारत जैन सभा के अध्यक्ष भालचन्द्र पाटिल, अजित कुमार भंडे, बिपिन मानगावे, किरण भगाटे, रोहित कुंभोजे सहित अनेक गणमान्य लोग एवं श्रद्धालु मौजूद रहे।
माधुरी की वापसी को बताया संवेदना और जीव दया की जीत
सम्मान के बाद सुदीप जैन ने कहा कि हथिनी माधुरी की नांदणी मठ वापसी को केवल किसी एक संस्था, व्यक्ति या समाज की जीत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार यह संवेदना, जीव दया और जनसामान्य की भावनाओं के सम्मान की जीत है। उन्होंने कहा कि माधुरी के साथ केवल जैन समाज की ही भावनाएं नहीं जुड़ी हैं, बल्कि देशभर के लोगों ने उसकी वापसी को लेकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। यही कारण है कि नांदणी लौटने के बाद माधुरी अब केवल नांदणी मठ की नहीं, बल्कि पूरे देश के समाज की रौनक बन गई है।

‘अपनों पर वही प्यार लुटा रही माधुरी’
सुदीप जैन ने कहा कि माधुरी अपने घर नांदणी में वापस आकर फिर से चहल-कदमी कर रही है और अपने परिचित परिवेश में लौटकर लोगों के बीच खुश नजर आ रही है। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि माधुरी जिस स्थान से जुड़ी रही है, वहां वापस पहुंचने के बाद वह अपने लोगों पर उसी तरह प्यार लुटा रही है। उन्होंने कहा कि माधुरी की वापसी ने नांदणी मठ ही नहीं, बल्कि देशभर के लोगों के बीच खुशी का माहौल पैदा किया है। लंबे समय से माधुरी की वापसी की प्रतीक्षा कर रहे लोगों के लिए उसका अपने पुराने स्थान पर लौटना बेहद भावुक क्षण है।
नांदणी वापसी के लिए लगातार उठती रही आवाज
हथिनी माधुरी की नांदणी मठ वापसी का मुद्दा लंबे समय तक चर्चा में रहा। माधुरी को गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा ले जाए जाने के बाद उसकी नांदणी मठ वापसी की मांग को लेकर विभिन्न स्तरों पर आवाज उठाई गई। धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के साथ-साथ जीव दया और पशु कल्याण से जुड़े लोगों ने भी माधुरी को उसके पुराने स्थान पर वापस लाने की मांग रखी। इसी क्रम में सुदीप जैन ने भी लगातार प्रयास किए। उन्होंने विभिन्न स्तरों पर इस विषय को उठाते हुए माधुरी की नांदणी वापसी की मांग को मजबूती से सामने रखा। उनके प्रयासों का उद्देश्य माधुरी को उसके पुराने धार्मिक एवं सामाजिक परिवेश में वापस लाना था।

संघर्ष के दौरान लगातार जारी रहे प्रयास
माधुरी की वापसी की राह आसान नहीं रही। इस दौरान उसके समर्थकों और नांदणी मठ से जुड़े लोगों की ओर से लगातार प्रयास किए जाते रहे। सुदीप जैन ने भी इस विषय को लेकर संबंधित पक्षों के समक्ष अपनी बात रखी और माधुरी की वापसी की मांग को लेकर सक्रिय भूमिका निभाई। समय के साथ यह मामला केवल नांदणी मठ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देशभर के लोगों की भावनाओं से जुड़ता चला गया। माधुरी की वापसी की मांग को लेकर सोशल और सार्वजनिक स्तर पर भी समर्थन देखने को मिला। आखिरकार माधुरी के नांदणी लौटने से उसके समर्थकों और मठ से जुड़े लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई।
शांतिसागर जी महाराज के समाधिदिवस से पहले माधुरी की वापसी ने बढ़ाया उत्साह
सुदीप जैन ने कहा कि प्रथम आचार्य श्री 108 शांतिसागर जी महामुनिराज के समाधिदिवस और गणेश चतुर्थी से पूर्व माधुरी का नांदणी आगमन विशेष महत्व रखता है। उनके अनुसार माधुरी की वापसी ने पहले से ही महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर को उत्सव से महोत्सव में बदल दिया। उन्होंने कहा कि माधुरी का नांदणी पहुंचना वहां के लोगों के लिए केवल एक घटना नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ा अवसर है। लंबे समय बाद अपने परिचित परिवेश में लौटने वाली माधुरी को देखने और उसके साथ जुड़ी स्मृतियों को याद करने के लिए लोगों में विशेष उत्साह है।
नांदणी मठ में खुशी और उत्सव का माहौल
माधुरी की वापसी के बाद नांदणी मठ और आसपास के क्षेत्र में खुशी का माहौल बना हुआ है। श्रद्धालु और समाज के लोग इसे जीव दया तथा संवेदना से जुड़ी महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देख रहे हैं। समारोह में भी माधुरी की वापसी को लेकर लोगों ने प्रसन्नता व्यक्त की। सुदीप जैन ने कहा कि माधुरी की वापसी से यह संदेश भी जाता है कि जब समाज किसी संवेदनशील विषय को लेकर शांतिपूर्ण और निरंतर प्रयास करता है तो उसके सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।
सम्मान समारोह में बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
नांदणी मठ में आयोजित समारोह के दौरान सुदीप जैन का सम्मान किए जाने के साथ माधुरी की वापसी के पूरे संघर्ष और उससे जुड़ी भावनाओं को भी याद किया गया। इस अवसर पर दक्षिण भारत जैन सभा के अध्यक्ष भालचन्द्र पाटिल, अजित कुमार भंडे, बिपिन मानगावे, किरण भगाटे, रोहित कुंभोजे सहित अन्य लोग मौजूद रहे। माधुरी की नांदणी वापसी के बाद अब उसके साथ जुड़े लोगों में यह विश्वास और मजबूत हुआ है कि जीवों के प्रति करुणा, संवेदना और संरक्षण की भावना को समाज में और अधिक मजबूती दी जानी चाहिए।