रूसी संस्कृति से सराबोर होगा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) में भारत और रूस के बीच शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण आयोजन होने जा रहा है। सोमवार को रूस की मिनिन निज़नी नोवगोरोड स्टेट पेडागॉजिकल यूनिवर्सिटी (Minin University) का 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर पहुंचा। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। रूस से आए प्रतिनिधिमंडल के आगमन के साथ ही विश्वविद्यालय परिसर में तीन दिवसीय रशियन कल्चरल प्रोग्राम की तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं।
29 सितंबर से शुरू होगा तीन दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम
सीसीएसयू परिसर के अटल सभागार में 29 सितंबर, 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को तीन दिवसीय रशियन कल्चरल प्रोग्राम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में रूसी भाषा, संस्कृति, कला, परंपराओं और वहां के शैक्षणिक जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी एवं प्रस्तुतियां दी जाएंगी। कार्यक्रम में मिनिन यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों की सहभागिता विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी।
शिक्षा के साथ संस्कृति को समझने का मिलेगा अवसर
कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान के आदान-प्रदान का माध्यम नहीं है, बल्कि यह विभिन्न देशों की संस्कृतियों और समाजों को एक-दूसरे से जोड़ने का भी सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि सीसीएसयू और मिनिन यूनिवर्सिटी के बीच शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक सहयोग से विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर सीखने और अपनी प्रतिभा विकसित करने के नए अवसर मिलेंगे।

कुलपति ने कहा कि रूस के विद्यार्थियों और शिक्षकों का विश्वविद्यालय में आगमन दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को मजबूत करने के साथ विद्यार्थियों को रूसी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को करीब से समझने का अवसर प्रदान करेगा।
मिनिन यूनिवर्सिटी की वाइस-रेक्टर ने जताई खुशी
मिनिन यूनिवर्सिटी की वाइस-रेक्टर फॉर इंटरनेशनल रिलेशंस लिलिया एरुश्किना ने सीसीएसयू में हुए स्वागत पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में आकर उन्हें अच्छा और सुखद अनुभव हुआ। उन्होंने सीसीएसयू के शैक्षणिक वातावरण, परिसर में होने वाली गतिविधियों और विद्यार्थियों के उत्साह को विशेष रूप से सराहा।
उन्होंने कहा कि भारत और रूस के बीच शिक्षा एवं संस्कृति के क्षेत्र में लंबे समय से मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। ऐसे कार्यक्रम दोनों देशों के बीच इन संबंधों को नई ऊर्जा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सीसीएसयू और मिनिन यूनिवर्सिटी के बीच शैक्षणिक सहयोग को दोनों संस्थानों के विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए एक-दूसरे की शिक्षा व्यवस्था, भाषा, संस्कृति एवं परंपराओं को समझने का महत्वपूर्ण अवसर बताया।
दस दिन तक सीसीएसयू में रहेगा रूसी दल
मिनिन यूनिवर्सिटी का 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल करीब 10 दिनों तक चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में प्रवास करेगा। इस दौरान दल के सदस्य विश्वविद्यालय के रूसी विभाग के विद्यार्थियों के साथ संवाद करेंगे। विद्यार्थियों को रूसी भाषा और रूस की संस्कृति से जुड़ी विभिन्न जानकारियां दी जाएंगी।
इस संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों को न केवल रूसी भाषा सीखने का अवसर मिलेगा, बल्कि रूस के सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश को करीब से समझने का भी मौका मिलेगा। दोनों विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच संवाद से भविष्य में शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक सहयोग के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है।
पहले ही हो चुका है दोनों विश्वविद्यालयों के बीच एमओयू
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय और मिनिन निज़नी नोवगोरोड स्टेट पेडागॉजिकल यूनिवर्सिटी के बीच पूर्व में समझौता ज्ञापन (एमओयू) हो चुका है। इस समझौते के माध्यम से दोनों संस्थानों के बीच शैक्षणिक, सांस्कृतिक और अकादमिक सहयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
एमओयू के तहत अकादमिक गतिविधियों, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के आदान-प्रदान तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सहभागिता के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसी सहयोग की कड़ी में रूसी प्रतिनिधिमंडल का सीसीएसयू आगमन और तीन दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
सीसीएसयू में रूसी भाषा अध्ययन को भी मिल रहा बढ़ावा
विश्वविद्यालय परिसर में रूसी भाषा और संस्कृति के अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए ‘एक्सचेंज सेंटर फॉर ओपन एजुकेशन इन रशियन एंड रशियन लैंग्वेज टीचिंग’ की स्थापना भी की जा चुकी है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को रूसी भाषा के अध्ययन और रूस की संस्कृति को समझने के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
सीसीएसयू में आयोजित होने वाला यह तीन दिवसीय रशियन कल्चरल प्रोग्राम भारत और रूस के बीच शिक्षा, भाषा और संस्कृति के आदान-प्रदान को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक वातावरण से जुड़ने और रूसी संस्कृति को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिलेगा।