शैक्षणिक व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली, नई शिक्षा नीति एवं विभागीय सुविधाओं और अकादमिक अवसरों की विशेषज्ञों द्वारा दी गई जानकारी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के मनोविज्ञान विभाग में बीए, एमए तथा पीजी डिप्लोमा इन गाइडेंस एंड काउंसलिंग के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को विभाग और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली, नियमों, सुविधाओं तथा विभिन्न अकादमिक गतिविधियों से परिचित कराना रहा।
अकादमिक उपलब्धियों के साथ संतुलित जीवन पर दिया जोर
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. अतवीर सिंह रहे। उन्होंने नवप्रवेशित विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में केवल अकादमिक उपलब्धियां हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यक्तित्व और जीवन को इस प्रकार विकसित करना भी जरूरी है, जिससे व्यक्ति सुखी और संतुलित जीवन जी सके।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपने व्यक्तित्व में सही परिस्थितियों में ‘हां’ कहने का विवेक और ‘न’ कहने का साहस विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि परिस्थितियों के अनुरूप सही निर्णय लेने की क्षमता व्यक्ति को अपनी खुशियों और जीवन की सकारात्मकता बनाए रखने में सहायता करती है।
विद्यार्थियों को संविधान पढ़ने के लिए किया प्रेरित
प्रो. अतवीर सिंह ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि धार्मिक एवं अन्य पुस्तकों के साथ-साथ भारत के संविधान की पुस्तक का भी अध्ययन करना चाहिए। उनके अनुसार संविधान केवल एक अच्छे नागरिक के रूप में हमारे अधिकारों और कर्तव्यों की समझ विकसित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन में मूल्यों, नैतिकता, जिम्मेदारियों और नागरिक दायित्वों को समझने में भी मदद करता है।
ज्ञान के साथ मानवीय संवेदनशीलता जरूरी: प्रो. संजय कुमार
मनोविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. संजय कुमार ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने विभाग के विजन और मिशन के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि विभाग का उद्देश्य ऐसे प्रशिक्षित और कुशल मानसिक स्वास्थ्य कार्यबल का निर्माण करना है, जो केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित न रहे।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने ज्ञान और कौशल के साथ मानवीय संवेदनशीलता विकसित करनी चाहिए, ताकि वे समाज और अपने भविष्य को सकारात्मक दिशा देने में सक्षम बन सकें। उन्होंने विद्यार्थियों से शैक्षणिक विकास के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल, अनुशासन और मानवीय मूल्यों के विकास पर भी ध्यान देने का आह्वान किया।
तीन वर्षों की उपलब्धियों से कराया परिचित
विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. अल्पना अग्रवाल ने विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय एवं विभाग में अनुशासन और गरिमा बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने मनोविज्ञान विभाग की पिछले तीन वर्षों की उपलब्धियों की जानकारी भी साझा की।
उन्होंने बताया कि इस अवधि में विभाग की ओर से 22 शोध-पत्र प्रकाशित किए गए, दो पुस्तकों का प्रकाशन हुआ और 20 अतिथि व्याख्यान आयोजित किए गए। इसके अलावा विभाग के 35 विद्यार्थियों ने UGC-NET परीक्षा उत्तीर्ण की, जबकि चार फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) भी आयोजित किए गए।
नई शिक्षा नीति और परीक्षा प्रणाली की दी जानकारी
सहआचार्य डॉ. अंशु अग्रवाल ने विद्यार्थियों को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति से संबंधित नियमों, पाठ्यक्रम, क्रेडिट व्यवस्था तथा परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं परीक्षा व्यवस्था को समझने और निर्धारित नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं के साथ-साथ विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से समझने की जानकारी दी।
विश्वविद्यालय और विभागीय सुविधाओं की जानकारी
शिक्षक श्री दरवेश ने विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय परिसर में उपलब्ध विभिन्न सुविधाओं एवं संसाधनों के बारे में जानकारी दी और उनके उपयोग की प्रक्रिया समझाई। वहीं डॉ. अनुपमा शर्मा ने मनोविज्ञान विभाग में उपलब्ध आंतरिक सुविधाओं से विद्यार्थियों को अवगत कराया।
डॉ. चित्रा गुप्ता ने विभाग की विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों, अकादमिक अवसरों और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध विभागीय गतिविधियों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को विभाग में उपलब्ध विभिन्न अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
विद्यार्थियों ने पूछे सवाल, शिक्षकों ने किया समाधान
कार्यक्रम के दौरान नवप्रवेशित विद्यार्थियों ने विभाग और विश्वविद्यालय से संबंधित विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे। विद्यार्थियों के सवालों का वक्ताओं एवं विभागीय शिक्षकों ने समाधान किया। विद्यार्थियों ने कहा कि ओरिएंटेशन कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें विभाग की शैक्षणिक व्यवस्था, विश्वविद्यालय के नियमों और उपलब्ध अकादमिक अवसरों को समझने में काफी सहायता मिली।
डॉ. लवलीन तिवारी ने किया संचालन
कार्यक्रम का संचालन डॉ. लवलीन तिवारी ने किया। उन्होंने कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों के बीच समन्वय करते हुए विद्यार्थियों को वक्ताओं द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण संदेशों को अपने शैक्षणिक एवं व्यक्तिगत जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. अंशु अग्रवाल ने सभी अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन नवप्रवेशित विद्यार्थियों के उज्ज्वल, सार्थक एवं सुखद भविष्य की शुभकामनाओं के साथ हुआ।