नवीन गुप्ता (संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष)
संयुक्त व्यापार संघ ने एमडीए की बोर्ड बैठक में मुद्दा न उठने पर जताई निराशा; 19 अक्टूबर को सांकेतिक पुतला दहन का ऐलान
मेरठ । मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) की हाल में हुई बोर्ड बैठक में प्राचीन निर्मित शहर से जुड़े मुद्दों पर चर्चा न होने से व्यापारियों में नाराजगी है। संयुक्त व्यापार संघ के निर्वाचित अध्यक्ष नवीन गुप्ता ने कहा कि मेरठ के प्रमुख बाजार इसी पुराने शहर में स्थित हैं और बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका इन बाजारों पर निर्भर है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्राधिकरण आगामी बोर्ड बैठक में इस विषय पर गंभीरता से विचार करेगा।
सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी को सौंपे थे सुझाव
संयुक्त व्यापार संघ के प्रतिनिधिमंडल ने इस मुद्दे पर राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखी थीं। संघ के अनुसार, सांसद ने सकारात्मक पहल करते हुए एमडीए उपाध्यक्ष को पत्र भेजकर प्राचीन निर्मित शहर के विषय को बोर्ड बैठक में चर्चा के लिए रखने का सुझाव दिया था। व्यापार संघ का कहना है कि कार्यसूची में अधिक विषय होने के कारण इस बार विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी। संघ ने सांसद के सहयोग के लिए आभार जताया और अगली बैठक में इस विषय पर विचार किए जाने की उम्मीद व्यक्त की।
पुराने शहर की सीमाएं तय करने की मांग
नवीन गुप्ता के मुताबिक, अब तक प्राचीन निर्मित शहर का भौगोलिक परीक्षण कर उसकी सीमाएं सुनिश्चित नहीं की गई हैं। उन्होंने कहा कि शहर के इतिहास और पुराने प्रवेश द्वारों की पहचान के आधार पर इस क्षेत्र का अध्ययन कराया जाना चाहिए। प्रेस विज्ञप्ति में मेरठ के प्राचीन नाम मयराष्ट्र और पुराने नगर के परकोटे तथा नौ दरवाजों का उल्लेख किया गया है। इनमें बुढ़ाना गेट, दिल्ली गेट, बागपत गेट, कम्बोह गेट, जाटव गेट, लिसाड़ी गेट, सोहराब गेट, खैर नगर गेट और शाहपीर गेट शामिल बताए गए हैं।
विज्ञप्ति में खैर नगर दरवाजे का निर्माण नवाब खैरअंदेश खान द्वारा कराए जाने और पुराने समय में शहर के व्यापारिक पड़ाव के रूप में विकसित होने का भी उल्लेख है। सराय जीना और सराय बहलीम सहित पुरानी सरायों तथा कच्ची सराय और पक्की सराय जैसे स्थानों के नामों को शहर के व्यापारिक इतिहास से जोड़ा गया है।
संकरी सड़कों और सेटबैक नियमों से निर्माण में परेशानी
संयुक्त व्यापार संघ का कहना है कि पुराने बाजारों की सड़कों की चौड़ाई लगभग पांच फीट से लेकर अधिकतम 24 फीट तक है। ऐसे क्षेत्रों के लिए भू-उपयोग परिवर्तन और भवन निर्माण के व्यावहारिक नियम स्पष्ट न होने से व्यापारियों और भवन मालिकों को परेशानी हो रही है। संघ के अनुसार, फ्रंट, बैक और साइड सेटबैक की बाध्यताएं यहां लागू करना कठिन है, क्योंकि कई दुकानें एक-दूसरे से सटी हुई हैं। इससे पुरानी और जर्जर इमारतों की मरम्मत या पुनर्निर्माण में दिक्कत आ रही है।
व्यापार संघ ने मांग की है कि इन सघन बाजार क्षेत्रों के लिए उनकी वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप नियम बनाए जाएं। साथ ही, अग्नि सुरक्षा के आधुनिक और प्रभावी इंतजाम विकसित किए जाएं, ताकि बाजारों में सुरक्षा बनी रहे और निर्माण संबंधी समस्याओं का भी समाधान हो सके।
अलग-अलग कारोबारों के लिए प्रसिद्ध हैं पुराने बाजार
संघ की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मेरठ के पुराने शहर के बाजार विभिन्न व्यापारिक गतिविधियों के लिए जाने जाते हैं। जत्तीवाड़ा में कागज, गत्ता और पैकेजिंग सामग्री का थोक कारोबार होता है, जबकि लाला का बाजार स्टेशनरी और कॉपी-किताबों के व्यापार के लिए प्रसिद्ध है। मावा मंडी में दूध, मावा और खोया का कारोबार होता है। सुभाष बाजार और खंदक बाजार में कपड़े तथा रेडीमेड वस्त्रों का व्यापार किया जाता है।
विज्ञप्ति में शहर सर्राफा बाजार, नील की गली, कागजी बाजार, कच्ची सराय और ठठेरवाड़ा को सोने-चांदी के आभूषणों के निर्माण और बिक्री से जुड़ा बताया गया है। कबाड़ी बाजार और कोटला बाजार में लोहा, स्क्रैप और हार्डवेयर का कारोबार होता है, जबकि घंटाघर बाजार में इलेक्ट्रॉनिक्स और सामान्य सामान की दुकानें हैं। खैर नगर और पत्थर वाला बाजार दवाइयों के थोक कारोबार के लिए पहचाने जाते हैं। संघ का कहना है कि इन बाजारों में प्रतिदिन करोड़ों रुपये का लेन-देन होता है और बड़ी संख्या में परिवारों की रोजी-रोटी इन पर निर्भर है।
आवासीय मोहल्लों में भी मिश्रित भू-उपयोग की परंपरा
व्यापार संघ ने प्राचीन शहर के आवासीय मोहल्लों को लेकर भी चिंता जताई है। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि एमडीए द्वारा उच्चतम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत सूची के कारण इन क्षेत्रों के निवासियों में भय और अनिश्चितता है। संघ के अनुसार, पुराने मोहल्लों में लंबे समय से आवास और छोटे कारोबार साथ-साथ चलते आए हैं। कई परिवार अपने घर के एक हिस्से में दुकान चलाकर या उसे किराये पर देकर आजीविका चलाते हैं।
संघ का कहना है कि यहां 50 से 100 वर्ग गज तक के छोटे मकान हैं, जिनमें मौजूदा भवन उपविधियों के तहत फ्रंट, बैक और साइड सेटबैक छोड़ना कई मामलों में तकनीकी और व्यावहारिक रूप से कठिन है। संगठन ने मांग की है कि पुराने मोहल्लों की बनावट, छोटे भूखंडों और मिश्रित उपयोग की परंपरा को ध्यान में रखकर नियम तय किए जाएं, ताकि लोगों की आजीविका प्रभावित न हो।
19 अक्टूबर को घंटाघर पर सांकेतिक पुतला दहन
एमडीए की नीतियों के विरोध में संयुक्त व्यापार संघ ने सोमवार, 19 अक्टूबर को अपराह्न तीन बजे घंटाघर के अंदर, लाला का बाजार और खैर नगर चौराहे के निकट सांकेतिक पुतला दहन का ऐलान किया है। संघ के अनुसार, पुतला रावण के रूप में बनाया जाएगा। संगठन ने बताया कि पुराने शहर से जुड़े मुद्दों को लेकर स्थानीय व्यापार मंडलों में रोष है और इसी के प्रतीकात्मक विरोध के रूप में यह कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।