मेरठ जिलाधिकारी को ज्ञापन देने पहुंचे अधिवक्ता रामकुमार
मेरठ। मेरठ नगर क्षेत्र में सार्वजनिक सड़कों, नालों, चौराहों और सरकारी भूमि पर अवैध रूप से निर्मित धार्मिक स्थलों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की मांग उठी है। सिविल कोर्ट मेरठ के अधिवक्ता राम कुमार शर्मा ने नगर आयुक्त, जिलाधिकारी और मंडलायुक्त को एक विस्तृत ज्ञापन प्रेषित कर पूरे शहर में ऐसे अवैध धार्मिक अतिक्रमणों का सर्वे कराकर माननीय सर्वोच्च न्यायालय, इलाहाबाद उच्च न्यायालय तथा उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशों के अनुरूप निष्पक्ष कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
ज्ञापन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव गृह विभाग, अपर मुख्य सचिव नगर विकास विभाग तथा मेरठ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को भी भेजी गई है।
अधिवक्ता राम कुमार शर्मा ने अपने ज्ञापन में कहा है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद-14 सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता का अधिकार प्रदान करता है, जबकि अनुच्छेद-25 धार्मिक स्वतंत्रता देता है। हालांकि यह स्वतंत्रता सार्वजनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य और नैतिकता के अधीन है। किसी भी व्यक्ति या समुदाय को सार्वजनिक सड़क, नाले अथवा सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर धार्मिक निर्माण करने का कोई संवैधानिक अथवा वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
उन्होंने अपने ज्ञापन में उल्लेख किया कि वर्ष 2009 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देशित किया था कि सार्वजनिक स्थलों पर नए धार्मिक ढांचे बनने से रोके जाएं तथा अवैध रूप से निर्मित धार्मिक संरचनाओं के संबंध में विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके अतिरिक्त इलाहाबाद उच्च न्यायालय भी विभिन्न मामलों में यह स्पष्ट कर चुका है कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर किसी भी प्रकार का धार्मिक अतिक्रमण स्वीकार्य नहीं है।
ज्ञापन में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार नगरों को स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए सीएम ग्रिड योजना तथा अतिक्रमण हटाओ अभियानों का संचालन कर रही है, लेकिन मेरठ नगर में अनेक स्थानों पर अवैध धार्मिक अतिक्रमण आज भी बने हुए हैं, जिससे आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इन स्थानों का किया उल्लेख
ज्ञापन में विशेष रूप से कुछ ऐसे स्थानों का उल्लेख किया गया है जहां धार्मिक निर्माणों के कारण यातायात एवं जल निकासी व्यवस्था प्रभावित हो रही है—
- मेरठ सिविल कोर्ट के बाहर नाले के ऊपर निर्मित मंदिर।
- जसवंत राय हॉस्पिटल के सामने सड़क पर निर्मित मंदिर।
- खैरनगर क्षेत्र में स्थित अवैध मज़ार, जिससे चौराहे का आवागमन प्रभावित है।
- रुड़की रोड स्थित लेखा नगर के समीप बड़ी मज़ार, जो सड़क यातायात में बाधा उत्पन्न कर रही है।
- मेघदूत नाले के चौराहे के निकट नाले के किनारे निर्मित मंदिर।
ज्ञापन के अनुसार इन निर्माणों के कारण बरसात के मौसम में जलभराव की समस्या बढ़ जाती है। सफाई कार्य प्रभावित होता है, यातायात जाम की स्थिति उत्पन्न होती है तथा सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है।
प्रशासनिक कार्यशैली पर भी उठाए सवाल
राम कुमार शर्मा ने ज्ञापन में यह भी कहा कि कुछ स्थानों पर अवैध धार्मिक निर्माणों को हटाने के बजाय उनके नीचे या किनारे नालों का निर्माण कराया जा रहा है, जो न्यायालयों के आदेशों और शासन की मंशा के विपरीत प्रतीत होता है। उनका कहना है कि इससे अतिक्रमण को अप्रत्यक्ष संरक्षण मिलने का संदेश जाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि सनातन संस्कृति और भारतीय परंपरा में स्वच्छता को विशेष महत्व दिया गया है। ऐसे में गंदे नालों के ऊपर अथवा किनारे धार्मिक स्थलों का होना न तो धार्मिक गरिमा के अनुरूप है और न ही सार्वजनिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से उचित माना जा सकता है।
प्रशासन से की गई प्रमुख मांगें
ज्ञापन में प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की गई हैं—
- पूरे मेरठ नगर में सार्वजनिक सड़कों, नालों, चौराहों एवं सरकारी भूमि पर निर्मित समस्त अवैध धार्मिक स्थलों का उच्च स्तरीय सर्वे कराया जाए।
- सर्वोच्च न्यायालय, इलाहाबाद उच्च न्यायालय तथा उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशों के अनुरूप निष्पक्ष और समान रूप से कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
- यातायात, जल निकासी एवं सार्वजनिक सुरक्षा में बाधा उत्पन्न करने वाले अतिक्रमणों को प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाए।
- ऐसे अवैध अतिक्रमणों को संरक्षण देने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए।
- किसी भी राजनीतिक, सामाजिक अथवा अन्य प्रकार के दबाव से मुक्त होकर कानून के शासन के अनुसार कार्रवाई की जाए।
- की गई कार्रवाई की सूचना शिकायतकर्ता को भी उपलब्ध कराई जाए।
अधिवक्ता राम कुमार शर्मा ने कहा कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि को अतिक्रमणमुक्त रखना प्रशासन की संवैधानिक और वैधानिक जिम्मेदारी है। यदि न्यायालयों और शासन के निर्देशों का समान रूप से पालन किया जाता है तो इससे शहर की यातायात व्यवस्था, स्वच्छता और सार्वजनिक सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार संभव होगा।