मेरठ। #ANN चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के ललित कला संस्थान की ओर से आयोजित दो दिवसीय ‘हुनर हाट दीपावली मेले’ का 3 नवंबर को उत्साहपूर्ण और गरिमामय माहौल में समापन हुआ। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में आयोजित इस मेले में दीपावली के उल्लास के साथ भारतीय कला और संस्कृति की झलक देखने को मिली। विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता और हुनर से तैयार किए गए उत्पादों को स्टॉलों पर प्रदर्शित किया।
समापन समारोह की मुख्य अतिथि समाज कल्याण विभाग के राजकीय दत्तक ग्रहण अभिकरण, सूरजकुंड रोड, मेरठ की प्रभारी अधीक्षिका श्रीमती मीना सिसोदिया रहीं। एनआईटीआरए आईटीएडीसी, मेरठ के ऑफिस इंचार्ज श्री संजीव नगर विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। दोनों अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया और इसके बाद मेले में लगे स्टॉलों का अवलोकन किया।
हस्तनिर्मित उत्पादों की अतिथियों ने की सराहना
विद्यार्थियों ने मेले में हस्तनिर्मित लक्ष्मी-गणेश प्रतिमाएं, बंदनवार, कमल पुष्प, रंगोली, पूजा थाल, वॉल हैंगिंग, आभूषण, गिफ्ट बॉक्स, बैग, टोकरियां और अन्य सजावटी उत्पाद प्रदर्शित किए। अतिथियों ने विद्यार्थियों की कलाकृतियों और सजावटी वस्तुओं की सराहना की। उन्होंने स्टॉलों से उत्पाद खरीदकर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन भी किया। आयोजन में आए अन्य आगंतुकों ने भी उत्पादों में रुचि दिखाई और उनकी खरीदारी की।
मुख्य अतिथि श्रीमती मीना सिसोदिया ने कहा कि ‘हुनर हाट’ जैसे आयोजन युवाओं को अपनी कला के माध्यम से समाज से जुड़ने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर देते हैं। उनके अनुसार, ऐसे मंच विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा सामने लाने और भविष्य के लिए आत्मविश्वास हासिल करने में मदद करते हैं।
विशिष्ट अतिथि श्री संजीव नगर ने कहा कि ललित कला संस्थान का यह आयोजन विद्यार्थियों की सृजनात्मकता, नवाचार और उद्यमशीलता का उदाहरण है। उन्होंने प्रोफेसर अलका तिवारी के मार्गदर्शन में तैयार किए गए हस्तनिर्मित उत्पादों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में रोजगारोन्मुखी सोच विकसित होती है और भारतीय कला एवं हस्तशिल्प को पहचान मिलती है।
कला को रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने का प्रयास
कार्यक्रम की संयोजिका एवं ललित कला संस्थान की उपनिदेशक प्रोफेसर अलका तिवारी ने बताया कि मेले का उद्देश्य विद्यार्थियों की कलात्मक प्रतिभा को समाज और बाजार से जोड़ना है, ताकि वे अपनी कला को रोजगार और आत्मनिर्भरता का माध्यम बना सकें। उन्होंने कहा कि मेले में प्रदर्शित अधिकांश हस्तनिर्मित उत्पादों की आगंतुकों ने उत्साहपूर्वक खरीदारी की। इससे विद्यार्थियों का आत्मविश्वास और आगे बेहतर काम करने का उत्साह बढ़ा।
समापन समारोह को सफल बनाने में संस्थान के शिक्षक डॉ. पूर्णिमा वशिष्ठ, डॉ. शालिनी धामा, सुश्री दीपांजली, मोहम्मद खालिद, सुश्री कृतिका और आकाश सहित शिक्षकों एवं कर्मचारियों का सहयोग रहा। संस्थान के छात्र-छात्राओं ने भी पूरे उत्साह, समर्पण और अनुशासन के साथ आयोजन में भाग लिया।
कार्यक्रम के अंत में प्रोफेसर अलका तिवारी ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की और उन्हें भविष्य में भी रचनात्मक आयोजनों में नवाचार के साथ भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, शिक्षकों, विद्यार्थियों, आगंतुकों और विश्वविद्यालय परिवार के सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।