कृषि विश्वविद्यालय में संयुक्त गोष्ठी आयोजित
मेरठ। #ANN सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मोदीपुरम में आयोजित अखिल भारतीय किसान मेला एवं प्रदर्शनी परिसर में मंगलवार को मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडलों की संयुक्त मण्डलीय रबी उत्पादकता गोष्ठी-2026 हुई। गोष्ठी में रबी फसलों की बेहतर पैदावार, कृषि निवेशों की उपलब्धता, खेती की लागत घटाने और किसानों की आय बढ़ाने से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। तीनों मंडलों से आए किसानों ने कृषि संबंधी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं और उनके समाधान की मांग की।
गोष्ठी का उद्घाटन उत्तर प्रदेश शासन के कृषि विभाग के प्रमुख सचिव एम.के.एस. सुंदरम, कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त, मेरठ के जिलाधिकारी डॉ. वी.के. सिंह, उत्तर प्रदेश के कृषि निदेशक टी.एम. त्रिपाठी और सहारनपुर मंडल के आयुक्त डॉ. रूपेश कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम में कृषि एवं संबद्ध विभागों के मंडलीय और जनपदीय अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक तथा बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए।
तकनीकी सत्र में खेती के विविध विकल्पों की जानकारी
तकनीकी सत्र में डॉ. डी.वी. सिंह ने मत्स्य पालन की संभावनाओं और उससे जुड़ी जानकारी साझा की। नरसैना एफपीओ के डॉ. प्रवीण कुमार ने गौमूत्र से जैविक कीटनाशक तैयार करने की विधि बताई। डॉ. विकास मलिक ने ट्रेंच विधि से गन्ना उत्पादन और उसके साथ सहफसली खेती के बारे में जानकारी दी। श्रीमती सना खान ने वर्मी कम्पोस्ट इकाई के माध्यम से आय बढ़ाने और जैविक खेती को प्रोत्साहित करने की तकनीक समझाई।
किसानों ने अपने जनपदों में खेती के दौरान आ रही दिक्कतों के साथ किए जा रहे उपयोगी प्रयोगों और अनुभवों को भी साझा किया। उन्होंने दलहनी और तिलहनी फसलों को आवारा पशुओं से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए तारबंदी योजना पर अनुदान, सोलर सिंचाई पंप और छोटे कृषि यंत्रों पर सब्सिडी देने की मांग रखी। किसानों ने सहारनपुर में पॉपलर से संबंधित मंडी और उद्योग स्थापित करने, किसान सम्मान निधि की राशि बढ़ाने तथा बीज एवं अन्य अनुदान की सुविधा ओटीपी के माध्यम से उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई। गन्ने के विलंबित भुगतान पर ब्याज दिलाने का विषय भी गोष्ठी में रखा गया।
कृषि निवेशों की पर्याप्त उपलब्धता का दावा
मुरादाबाद मंडल के संयुक्त कृषि निदेशक प्रशांत कुमार ने संदेश के माध्यम से मंडल की रबी रणनीति और कृषि निवेशों की उपलब्धता की जानकारी दी। मेरठ मंडल की संयुक्त कृषि निदेशक स्मिता वर्मा ने बताया कि मंडल में खाद, बीज और कृषि रक्षा रसायनों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
सहारनपुर मंडल के आयुक्त डॉ. रूपेश कुमार ने भी कहा कि मंडल में बीज, उर्वरक और कृषि रक्षा रसायनों की कमी नहीं है। उन्होंने क्षेत्र की जरूरतों का उल्लेख करते हुए सहारनपुर में पॉपलर मंडी एवं उद्योग स्थापित करने, जंगली जानवरों से फसलों की रक्षा के उपाय करने और शामली में मत्स्य, डेयरी तथा रेशम विभाग के कार्यालय स्थापित करने की मांग रखी। उन्होंने सहारनपुर की बेहट तहसील के असिंचित क्षेत्र में राजकीय नलकूप लगाने का मुद्दा भी उठाया।
‘खेत बचाओ अभियान’ और बीज अनुदान की जानकारी
उत्तर प्रदेश के कृषि निदेशक टी.एम. त्रिपाठी ने बताया कि प्रदेश में 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया जा रहा है। उन्होंने किसानों से भूमि संरक्षण, फसल अवशेषों के बेहतर प्रबंधन और संतुलित उर्वरक उपयोग पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने मिट्टी में जैविक कार्बन और उर्वरता बनाए रखने के लिए रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने तथा जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
कृषि निदेशक ने किसानों को विभागीय पोर्टल के माध्यम से बीज अनुदान की जानकारी भी दी। उनके अनुसार दलहनी और तिलहनी फसलों के बीज पर 75 प्रतिशत, गेहूं के बीज पर 50 प्रतिशत और मसूर के बीज पर 100 प्रतिशत अनुदान का लाभ लेने की व्यवस्था है। उन्होंने किसानों से खेतों की मेड़बंदी, जल संरक्षण और पौधरोपण को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने सामाजिक जागरूकता के तौर पर नशाबंदी और दहेज बंदी की अपील भी की।
विश्वविद्यालय से कृषि तकनीक की जानकारी लेने का आह्वान
कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने कहा कि विश्वविद्यालय पिछले 26 वर्षों से किसानों को तकनीकी जानकारी देकर फसल उत्पादकता और उनकी आय बढ़ाने के प्रयासों में जुटा है। उन्होंने किसानों से कृषि से जुड़ी नई तकनीकों और समस्याओं के समाधान के लिए विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों से संपर्क करने का आग्रह किया।
प्रमुख सचिव ने जताई किसानों और वैज्ञानिकों के योगदान की सराहना
प्रमुख सचिव एम.के.एस. सुंदरम ने अपने संबोधन में मेरठ की धरती और देश के कृषि इतिहास का उल्लेख किया। उन्होंने आजादी के समय देश के खाद्यान्न उत्पादन और वर्तमान उत्पादन में हुई वृद्धि का संदर्भ देते हुए कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के योगदान की सराहना की। उन्होंने वर्ष 2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला कृषक वर्ष के रूप में मनाए जाने का उल्लेख करते हुए उपस्थित महिला किसानों को बधाई दी और किसानों द्वारा उठाई गई समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया।
मिट्टी में घटते ऑर्गेनिक कार्बन पर चिंता जताते हुए प्रमुख सचिव ने किसानों से ढैंचा की बुवाई, फसल चक्र में सुधार और मिट्टी की सेहत बनाए रखने वाले उपाय अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि टिकाऊ खेती के लिए भूमि की उर्वरता और फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन पर लगातार ध्यान देना आवश्यक है।
कार्यक्रम का संचालन जिला कृषि अधिकारी राजीव कुमार ने किया। उन्होंने गोष्ठी में शामिल अधिकारियों, कृषि वैज्ञानिकों, किसानों और मीडिया प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया। इसके बाद अध्यक्ष की अनुमति से गोष्ठी का समापन किया गया।