बेगम पुल पर जाम से जूझते लोग
मेरठ। #ANN शहर का प्रमुख चौराहा बेगम पुल—जिसे सरकारी अभिलेखों में भारत माता चौक के नाम से जाना जाता है—इन दिनों अपनी पहचान से अधिक भीषण जाम को लेकर चर्चा में है। त्योहारों से पहले ही यहां वाहनों की लंबी कतारें और धीमी रफ्तार से चलती यातायात व्यवस्था आम लोगों की परेशानी बढ़ा रही है।
आगामी त्योहारों को देखते हुए पुलिस और यातायात विभाग के अधिकारी बैठकों में शहर की यातायात व्यवस्था सुचारु रखने पर जोर दे चुके हैं। उद्देश्य है कि पर्वों के दौरान बाजारों और प्रमुख चौराहों पर जाम न लगे तथा लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना न करना पड़े। हालांकि, बेगम पुल के मौजूदा हालात इन तैयारियों की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
चौराहे पर वाहनों की कतारें दूर तक लगी दिखाई देती हैं। यातायात पुलिसकर्मी व्यवस्था संभालने और जाम खुलवाने की कोशिश करते नजर आते हैं, लेकिन वाहनों की अधिक संख्या के बीच उनकी कोशिशें कई बार नाकाफी साबित होती हैं। आसपास के मार्गों से आने वाले वाहनों का दबाव बढ़ने पर चौराहे पर आवागमन धीमा पड़ जाता है और जाम की स्थिति बन जाती है।

बेगम पुल शहर के प्रमुख आवागमन मार्गों में शामिल है। यहां से रोजाना बड़ी संख्या में लोग काम, कारोबार और अन्य जरूरी कामों के लिए गुजरते हैं। ऐसे में त्योहारों के दौरान बाजारों में भीड़ बढ़ने पर वाहनों का दबाव और अधिक हो सकता है। त्योहारों से पहले ही अगर चौराहे पर यातायात संभालना चुनौती बन रहा है, तो पर्वों के दिनों में हालात कितने कठिन होंगे, इसका अंदाजा मौजूदा दृश्य देखकर लगाया जा सकता है।
एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं के लिए भी चिंता
जाम की समस्या केवल लोगों के समय और सुविधा तक सीमित नहीं है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि कोई एंबुलेंस भीड़ में फंस जाए, तो गंभीर मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो सकता है। आपात स्थिति में कुछ मिनटों की देरी भी मरीज के लिए जोखिम बढ़ा सकती है। इसलिए प्रमुख चौराहों पर यातायात नियंत्रण के साथ एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों के लिए रास्ता उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
त्योहारों से पहले ठोस यातायात प्रबंधन की जरूरत
आमजन को राहत देने के लिए बेगम पुल जैसे प्रमुख चौराहों पर अतिरिक्त यातायात पुलिसकर्मियों की तैनाती, मार्गों पर वाहनों की आवाजाही का बेहतर प्रबंधन और जाम के समय त्वरित कार्रवाई जरूरी है। त्योहारों के दौरान भीड़ और वाहन दबाव को ध्यान में रखते हुए पहले से यातायात योजना तैयार की जा सकती है। जरूरत के अनुसार वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से निकालने, सड़क किनारे अव्यवस्थित पार्किंग पर नियंत्रण रखने और चौराहे पर लगातार निगरानी करने से स्थिति संभालने में मदद मिल सकती है।
अब सवाल यही है कि क्या मेरठ पुलिस और यातायात विभाग त्योहारों से पहले बेगम पुल की व्यवस्था को दुरुस्त कर आमजन को राहत दे पाएंगे, या इस बार भी लोगों को जाम के बीच ही त्योहार मनाने पड़ेंगे?