16 मांगों को लेकर सक्षम अधिकारी को ज्ञापन सौंपते भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के पदाधिकारी
मेरठ। #ANN भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के बैनर तले मंगलवार को किसानों ने अपनी विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर कमिश्नरी चौराहे पर धरना-प्रदर्शन किया। सुबह से ही बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टरों के साथ पहुंचने लगे। किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कृषि लागत, फसलों के लाभकारी मूल्य, सरकारी खरीद और डिजिटल पंजीकरण से जुड़ी समस्याएं उठाईं। संगठन ने प्रदेश के सभी मंडलायुक्त कार्यालयों पर धरना-प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम मांगपत्र सौंपने का आह्वान किया था।
मेरठ में सभा का संचालन जिला अध्यक्ष कालू प्रधान ने किया। प्रदर्शन का नेतृत्व राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक के निर्देशन में हुआ। किसानों ने सभा में कहा कि बढ़ती कृषि लागत, समय पर भुगतान न मिलना, सरकारी खरीद केंद्रों की अव्यवस्था और तकनीकी खामियों के कारण किसानों को योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मौके पर एडीएम सिटी आदित्य प्रजापति भी मौजूद रहे। किसानों ने एसपी सिटी को अपने बीच धरने पर बैठाया। सभा को धर्मेंद्र मलिक ने मुख्य रूप से संबोधित किया।
गन्ना भुगतान और धान खरीद में राहत की मांग
मुख्यमंत्री को भेजे गए मांगपत्र में गन्ने का लाभकारी मूल्य घोषित करने और चीनी मिलों पर बकाया गन्ना मूल्य का ब्याज सहित तत्काल भुगतान कराने की मांग की गई है। यूनियन ने कहा कि भुगतान में देरी करने वाली मिलों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए। मांगपत्र में गन्ने के मूल्य को बढ़ाकर घोषित करने की बात कही गई है।

धान की सरकारी खरीद निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कराने और खरीद केंद्रों पर पर्याप्त व्यवस्था करने की मांग भी उठाई गई। संगठन के अनुसार, एग्रीस्टैक पंजीकरण, डिजिटल क्रॉप सर्वे और भूमि अभिलेखों में त्रुटियों के कारण कई किसान धान बेचने से वंचित हो रहे हैं। मांगपत्र में ऐसी त्रुटियों का समाधान होने तक पंजीकरण की अनिवार्यता में छूट देने और वैकल्पिक सत्यापन के आधार पर खरीद करने की मांग की गई है। समर्थन मूल्य से कम दाम पर धान बेचने को मजबूर किसानों के हितों की रक्षा की बात भी कही गई।
किसान रजिस्ट्री और भूमि अभिलेखों की त्रुटियां दूर करने पर जोर
यूनियन ने किसान रजिस्ट्री में नाम, खाता, गाटा संख्या और हिस्सेदारी से जुड़ी गलतियों को तत्काल ठीक कराने की मांग की। मांगपत्र में कहा गया कि रजिस्ट्री पूरी होने तक इसे सरकारी योजनाओं, खाद-बीज, कृषि ऋण और फसल खरीद के लिए अनिवार्य शर्त न बनाया जाए। गांव स्तर पर विशेष शिविर लगाकर किसान रजिस्ट्री और भूमि अभिलेखों की त्रुटियां निःशुल्क दूर करने की मांग की गई।
संगठन ने संयुक्त खातेदारों, बटाईदारों और वास्तविक खेती करने वाले किसानों के पंजीकरण के लिए व्यावहारिक व्यवस्था बनाने की मांग की। सहकारिता विभाग की ब्याज अनुदान योजना के तहत पोर्टल संबंधी तकनीकी समस्याओं से वंचित किसानों को राहत देने, पोर्टल दोबारा खोलने और पात्र किसानों को अतिरिक्त समय देने की भी मांग उठाई गई।
फसल नुकसान, जलभराव और बीमा दावों के निस्तारण की मांग
मांगपत्र में बेमौसम बारिश से धान, उड़द, मूंग और अन्य फसलों को हुए नुकसान का निष्पक्ष सर्वे कराने तथा प्रभावित किसानों को 50 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा देने की मांग की गई है। यूनियन ने ठेके और बटाई पर खेती करने वाले वास्तविक किसानों को भी मुआवजे का लाभ देने और फसल बीमा दावों का शीघ्र निस्तारण कराने की बात कही।
गंगा, शारदा, रामगंगा और गोमती नदियों के आसपास जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान की मांग भी रखी गई। मांगपत्र के अनुसार, प्राकृतिक नालों, रजबहों और जल निकासी मार्गों से सिल्ट हटाकर पानी की निकासी सुनिश्चित की जाए तथा जल निकासी के रास्तों पर हुए अतिक्रमण हटाए जाएं। जलभराव से फसलें प्रभावित होने पर किसानों को मुआवजा देने की मांग की गई।
खाद, बीज, बिजली और सिंचाई की समस्याएं भी उठाईं
किसानों ने खाद, बीज और कृषि निवेश की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की। मांगपत्र में यूरिया, डीएपी और अन्य उर्वरकों की कमी दूर करने, खाद की कालाबाजारी और टैगिंग पर रोक लगाने तथा निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली करने वालों पर कार्रवाई की मांग की गई। नकली या घटिया बीज, खाद और कीटनाशक बेचने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की बात भी कही गई।
कृषि नलकूपों को निर्बाध बिजली देने, जर्जर बिजली लाइनों और ट्रांसफार्मरों को बदलने तथा नहरों और रजबहों की समय से सफाई कराकर टेल तक पानी पहुंचाने की मांग की गई। आवारा पशुओं और जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था, गोशालाओं को दुरुस्त करने और फसल नुकसान पर उचित मुआवजा देने की मांग भी शामिल रही।
किसानों की सामाजिक सुरक्षा और कृषि ऋण पर राहत की मांग
यूनियन ने लघु एवं सीमांत किसानों को आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुरक्षा देने और 60 वर्ष से अधिक आयु के किसानों के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन की व्यवस्था करने की मांग की। मांगपत्र में भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशों के अनुसार दो लाख रुपये तक के कृषि ऋण पर जमीन बंधक या अन्य संपार्श्विक प्रतिभूति मांगने पर रोक लगाने और निर्देशों का उल्लंघन करने वाले बैंकों की जवाबदेही तय करने की बात कही गई।
संगठन ने प्रमुख फसलों की सरकारी खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सुनिश्चित करने, दलहन और तिलहन की खरीद व्यवस्था बढ़ाने तथा खरीद केंद्रों पर बिचौलियों के बजाय वास्तविक किसानों को प्राथमिकता देने की मांग की। कृषि आधारित उद्योगों, खाद्य प्रसंस्करण और ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने के साथ कृषि नीति बनाने में किसान संगठनों और वास्तविक किसान प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील भी की गई।
मंडलायुक्त कार्यालयों पर प्रदर्शन का आह्वान
मांगपत्र में गंगा संरक्षण आदेश की व्यावहारिक कठिनाइयों और किसानों पर पड़ने वाले प्रभावों की समीक्षा करने तथा सहकारी और सरकारी चीनी मिलों को उनकी वास्तविक पेराई क्षमता के अनुसार गन्ना आवंटित करने की मांग भी शामिल है। भूमि अभिलेखों में अंश निर्धारण की गलतियां ठीक कराने के लिए तहसील स्तर पर राजस्व अधिकारियों की चौपाल लगाने और मौके पर ही किसानों की समस्याओं का निस्तारण करने की बात कही गई।
यूनियन ने मुख्यमंत्री से किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश देने और प्रत्येक मांग के समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाने की अपील की। संगठन का कहना है कि किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और खेती को लाभकारी बनाए बिना किसान परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं हो सकती।
धरना-प्रदर्शन में बुलंदशहर से गुड्डू प्रधान, जिला अध्यक्ष शैलेंद्र आर्य और हरवीर सिंह, गौतमबुद्ध नगर से गया प्रधान, सूरज सिंह, प्रदीप कौर सहित विभिन्न जिलों के किसान पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।