कृषि विश्वविद्यालय की सभागार में बैठक करते कुलपति डॉ त्रिवेणी दत्त
मेरठ। सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय युवाओं को रोजगारपरक एवं व्यावसायिक कौशल से जोड़ने के लिए विशेष कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करेगा। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विश्वविद्यालय के कार्यक्षेत्र में आने वाले कृषि विज्ञान केंद्रों तथा विश्वविद्यालय के माध्यम से युवाओं को विभिन्न रोजगारपरक विषयों में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए।
यह पहल उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल के निर्देशों के तहत प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों में युवाओं के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने की दिशा में की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को केवल डिग्री तक सीमित रखने के बजाय उन्हें रोजगार के लिए आवश्यक व्यावसायिक दक्षताओं से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी बनाना है।
कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने बताया कि वर्तमान समय में युवाओं के लिए शैक्षणिक योग्यता के साथ-साथ व्यावहारिक एवं व्यावसायिक कौशल भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए कृषि विश्वविद्यालय की ओर से ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से युवाओं को उनकी रुचि और रोजगार की संभावनाओं के अनुरूप विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जा सके।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के कार्यक्षेत्र में आने वाले कृषि विज्ञान केंद्रों को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा। इन केंद्रों के माध्यम से युवाओं तक प्रशिक्षण कार्यक्रमों की पहुंच बढ़ाई जाएगी, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के युवा भी कौशल विकास के अवसरों का लाभ उठा सकें।
हर वर्ष 500 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य
राज्यपाल सचिवालय के निर्देशों के अनुसार प्रत्येक राज्य विश्वविद्यालय और संस्थान को प्रतिवर्ष 500 महिला एवं पुरुष प्रतिभागियों को विभिन्न रोजगारपरक विषयों में गुणवत्तापूर्ण कौशल विकास प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कृषि विश्वविद्यालय भी इसी दिशा में अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों को व्यवस्थित रूप से संचालित करेगा।
इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य ऐसे युवाओं को आगे लाना है, जो प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद स्वरोजगार शुरू करना चाहते हैं अथवा वेतन आधारित रोजगार के अवसरों से जुड़ना चाहते हैं। युवाओं की व्यावसायिक दक्षता को मजबूत करने के साथ उन्हें रोजगार की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जाएगा।
डिग्री के साथ व्यावसायिक दक्षता पर जोर
कुलपति ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में केवल शैक्षणिक डिग्री प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है। युवाओं के पास संबंधित क्षेत्र में व्यावहारिक ज्ञान और कौशल होना भी आवश्यक है। कौशल विकास प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं को ऐसे व्यावसायिक हुनर से जोड़ा जाएगा, जिनका उपयोग वे रोजगार प्राप्त करने अथवा अपना स्वयं का व्यवसाय शुरू करने में कर सकें।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को उनकी क्षमता के अनुरूप आवश्यक व्यावहारिक जानकारी और तकनीकी दक्षता प्रदान करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इससे प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं के आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और वे रोजगार के क्षेत्र में बेहतर अवसर हासिल कर सकेंगे।
कृषि क्षेत्र से जुड़े युवाओं को भी मिलेगा लाभ
कृषि विश्वविद्यालय और उसके अधीन आने वाले कृषि विज्ञान केंद्रों की विशेषज्ञता को देखते हुए कृषि एवं उससे जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में युवाओं को प्रशिक्षण देने की व्यापक संभावनाएं हैं। ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को आधुनिक कृषि तकनीक, कृषि आधारित गतिविधियों और अन्य रोजगारपरक कौशल से जोड़कर उन्हें स्वरोजगार के लिए तैयार किया जा सकता है।
विश्वविद्यालय की इस पहल से ऐसे युवाओं को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जो कृषि क्षेत्र से जुड़े हैं और पारंपरिक कृषि के साथ आय के नए साधन विकसित करना चाहते हैं।
स्वावलंबी बनाने की दिशा में पहल
कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने कहा कि कौशल विकास प्रशिक्षण का अंतिम उद्देश्य युवाओं को स्वावलंबी, आत्मनिर्भर और रोजगारपरक बनाना है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद युवा अपने कौशल का उपयोग नौकरी प्राप्त करने के साथ-साथ स्वरोजगार अथवा अपना व्यवसाय शुरू करने में कर सकेंगे।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए और अधिक से अधिक पात्र युवाओं को इन कार्यक्रमों से जोड़ने की कार्ययोजना तैयार की जाए।
कृषि विश्वविद्यालय की यह पहल राज्यपाल एवं कुलाधिपति के निर्देशों के अनुरूप युवाओं को शिक्षा के साथ कौशल, रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।