हाउस अरेस्ट नितिन बालियान
मेरठ, 30 अगस्त 2026। मेरठ के कमिश्नरी पार्क में रविवार को आयोजित दलित महापंचायत को लेकर सियासी और सामाजिक गतिविधियां तेज रहीं। भारतीय किसान यूनियन (आजाद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नितिन बालियान ने आरोप लगाया कि महापंचायत में शामिल होने से रोकने के लिए पुलिस-प्रशासन ने उनके आवास पर रात से ही पुलिस बल तैनात कर दिया और निगरानी रखी गई। संगठन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश लगाने की कार्रवाई बताया गया।
रात से घर पर पुलिस तैनाती का दावा
चौधरी नितिन बालियान के मुताबिक, कमिश्नरी पार्क में होने वाली दलित महापंचायत में शामिल होने की जानकारी के बाद से ही उनके घर के बाहर पुलिस बल की मौजूदगी रही। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण कार्यक्रम में भाग लेने से रोकने के लिए किसी व्यक्ति के आवास पर पुलिस का पहरा लगाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिहाज से गंभीर विषय है।
उन्होंने कहा कि यदि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक है, तो उसमें शामिल होने से रोकने की आवश्यकता क्यों महसूस की गई, यह सवाल प्रशासन से पूछा जाना चाहिए।
‘जनता की आवाज से घबरा रही सरकार’
भाकियू (आजाद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों, मजदूरों और दलित समाज की एकजुट आवाज से घबरा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में लोगों को अपनी समस्याएं और मांगें शांतिपूर्ण तरीके से सरकार और प्रशासन के सामने रखने का अधिकार है।
बालियान ने सवाल उठाया कि यदि सरकार को लोकतांत्रिक आंदोलनों और जनता की आवाज से किसी प्रकार की चिंता नहीं है, तो फिर महापंचायत में जाने से रोकने के लिए पुलिस बल की तैनाती क्यों की गई।
हालांकि, पुलिस-प्रशासन की ओर से इस प्रेस विज्ञप्ति में लगाए गए आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं कराई गई है। पुलिस तैनाती का वास्तविक उद्देश्य और प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई का आधिकारिक कारण सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
‘पुलिस दबाव से नहीं टूटेगा संघर्ष’
चौधरी नितिन बालियान ने कहा कि किसानों, मजदूरों और दलित समाज के अधिकारों तथा सम्मान से जुड़े मुद्दों को संगठन लोकतांत्रिक तरीके से उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि पुलिस का दबाव संगठन की आवाज को दबा नहीं सकता और न ही कार्यकर्ताओं के हौसले को कमजोर कर सकता है।
उन्होंने कहा कि संगठन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक माध्यमों से जनता से जुड़े मुद्दों को उठाता रहेगा तथा अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेगा।
दीपक सिरोही समेत कार्यकर्ताओं की मौजूदगी
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस दौरान भारतीय किसान यूनियन (आजाद) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दीपक सिरोही भी मौजूद रहे। उन्होंने संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ खड़े होकर कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों का मनोबल बढ़ाया।
संगठन की ओर से कहा गया कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद संगठन के कार्यकर्ता और पदाधिकारी अपने नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं तथा किसानों, मजदूरों और दलित समाज से जुड़े मुद्दों को लेकर संगठन की गतिविधियां जारी रहेंगी।
‘किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है संघर्ष’
चौधरी नितिन बालियान ने कहा कि संगठन का संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई अन्याय, कथित दमन और ऐसी व्यवस्था के खिलाफ है, जिसमें जनता की आवाज को दबाने का प्रयास किया जाता है।
उन्होंने कहा कि किसानों, मजदूरों और दलितों के अधिकारों एवं सम्मान से जुड़े मुद्दों को आगे भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। संगठन इन मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से जनता के बीच ले जाने और संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखने का काम करता रहेगा।
कमिश्नरी पार्क में दलित महापंचायत को लेकर पुलिस की निगरानी
मेरठ के कमिश्नरी पार्क में 30 अगस्त को दलित महापंचायत आयोजित किए जाने को लेकर पुलिस-प्रशासन की ओर से सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था के मद्देनजर व्यवस्थाएं किए जाने की बात सामने आई है। महापंचायत में विभिन्न संगठनों और सामाजिक समूहों के लोगों के शामिल होने की संभावना के बीच पुलिस प्रशासन की ओर से सतर्कता बरती गई।
भाकियू (आजाद) की ओर से आरोप लगाया गया है कि इसी क्रम में राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नितिन बालियान को महापंचायत में जाने से रोकने के लिए उनके आवास पर पुलिस तैनात की गई। हालांकि, इस आरोप की पुष्टि के लिए पुलिस-प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखने का ऐलान
चौधरी नितिन बालियान ने कहा कि संगठन किसानों, मजदूरों और दलित समाज के अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करता रहेगा। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के प्रशासनिक दबाव के बावजूद जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने का सिलसिला जारी रहेगा।
संगठन ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था से टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि किसानों, मजदूरों और दलित समाज की समस्याओं को लोकतांत्रिक माध्यमों से सामने लाना और उनके समाधान की मांग करना था