कथा व्यास राजेश सेठी जी महाराज
आर्य समाज थापर नगर में हुई आयोजन समिति की बैठक; रविवारीय सत्संग में राजेश सेठी ने समझाया आध्यात्मिक साधना का मार्ग
मेरठ #ANN। अमर हुतात्मा स्वामी श्रद्धानंद बलिदान शताब्दी समारोह आयोजन समिति की बैठक आर्य समाज थापर नगर में हुई। बैठक में आगामी 23 दिसंबर 2026 को जिमखाना मैदान में आयोजित होने वाले बलिदान दिवस शताब्दी समारोह की रूपरेखा तैयार की गई। कार्यक्रम में यज्ञ, आर्य विद्वत सम्मेलन और गुरुकुल सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। आयोजन में लगभग दो हजार लोगों के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए अलग-अलग समितियां तैयारियों में जुटी हैं।
यज्ञ के बाद होगा आर्य विद्वत सम्मेलन
समारोह का शुभारंभ यज्ञ के साथ होगा। इसके बाद आर्य विद्वत सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन में स्वामी आर्यवेश, उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता अश्वनी उपाध्याय, स्वामी सच्चिदानंद, डॉ. वेदपाल, डॉ. पुनीत शास्त्री सहित अन्य वक्ता स्वामी श्रद्धानंद के जीवन, विचारों और उनके महान बलिदान पर प्रकाश डालेंगे। वक्ता जनमानस को स्वामी श्रद्धानंद की निर्भीकता, त्याग और समाज के प्रति उनके समर्पण से परिचित कराएंगे।
गुरुकुल शिक्षा और विद्यार्थियों की प्रस्तुतियां होंगी आकर्षण
मध्याह्नकालीन सत्र गुरुकुल सम्मेलन के रूप में आयोजित किया जाएगा। इसमें विभिन्न गुरुकुलों के ब्रह्मचारी और ब्रह्मचारिणी भाषण, वेद-अंताक्षरी और योगासन सहित विविध प्रस्तुतियां देंगे। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से गुरुकुल शिक्षा के महत्व और उसके संस्कारमय स्वरूप को सामने रखा जाएगा।
इस सत्र में आचार्य वाचस्पति, आचार्य डॉ. सुमेधा और पद्मश्री डॉ. सुकामा का उद्बोधन होगा। गुरुकुल प्रभात आश्रम के कुलपति संत शिरोमणि स्वामी विवेकानंद सरस्वती भी अपने आशीर्वचन देंगे। बैठक में जिला प्रधान जिले सिंह, केंद्रीय आर्य समिति के प्रधान वीरेंद्र आर्य, मंत्री नागेंद्र आर्य, ऋषिपाल आर्य, डॉ. आरपी सिंह, चौधरी अशोक, सुधाकर, योगेश मुवार, मनोज आर्य, यशपाल, चंद्रकांत, प्रीति सेठी, मनीष शर्मा और सुभाष मल्होत्रा सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
सत्संग में बताया—शरीर, प्राण, मन और बुद्धि का संयम ही साधना
आर्य समाज थापर नगर के रविवारीय सत्संग में “कैसे करें आध्यात्मिक साधना” विषय पर उद्बोधन देते हुए राजेश सेठी ने कहा कि परमात्मा और जीवात्मा—दोनों चेतन सत्ताओं को जानना ही अध्यात्म है। उन्होंने कहा कि स्वयं को केवल शरीर न मानकर आत्मा के रूप में पहचानना और उसकी उन्नति के लिए प्रयास करना अध्यात्म का प्रमुख उद्देश्य है।
राजेश सेठी ने बताया कि परमात्मा ने मनुष्य को शरीर, प्राण, मन और बुद्धि प्रदान किए हैं। इन सभी को संयमित और व्यवस्थित कर आत्मा की उन्नति के लिए उपयोग करना ही साधना है। इसके लिए शरीर, वाणी और मन का तप आवश्यक है। उन्होंने कहा कि गीता के 17वें अध्याय में योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इस विषय में उपदेश दिया है।
उन्होंने मन की प्रसन्नता, सौम्यता, आवश्यकता से अधिक न बोलना, ब्रह्मचर्य का पालन, आत्मचिंतन, ईश्वर के प्रति समर्पण और उसके गुणों का चिंतन करने को आध्यात्मिक साधना का मार्ग बताया। उनके अनुसार, इस मार्ग पर चलकर मनुष्य स्वयं को समाधि-अवस्था तक पहुंचने और समाज के कल्याण के लिए समर्पित होने योग्य बना सकता है।
मानव कल्याण के कार्यों से मिलता है आनंद
राजेश सेठी ने कहा कि स्वयं को परमात्मा के प्रति समर्पित कर मानव कल्याण के कार्य करना ही वास्तविक आध्यात्मिक साधना है। साधना के मार्ग पर आगे बढ़ने से व्यक्ति के भीतर आत्मशांति और प्रसन्नता का भाव बढ़ता है। उन्होंने कहा कि आनंद प्रत्येक प्राणी के जीवन का लक्ष्य है और इसे पाने के लिए सभी को निरंतर प्रयास करना चाहिए।
कार्यक्रम में प्रीति सेठी, विमल मरवाह, ऋचा सेठी, सुधा सिंह, सुभाष मल्होत्रा, आशा सिंघल, चांद ग्रोवर और रेखा आर्य ने भजन प्रस्तुत किए। आचार्य सत्य प्रकाश शास्त्री के ब्रह्मत्व में देवयज्ञ संपन्न हुआ। यज्ञ के यजमान श्रीमती सुनीता और मुकेश कन्नौजिया रहे।
सत्संग में आनंद वर्धन झा, विदिश जिंदल, प्रदीप सिंघल, भानु बत्रा, प्रमोद कुमार सिंह, कमलेश चांदना, कृष्ण कुमार वर्मा, विकास शर्मा, विक्रम सोंधी और विजय बंसल सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन मंत्री मनीष शर्मा ने किया।