अटल सभागार में आयोजित युवा सांसद कार्यक्रम को दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ करती कुलपति प्रो संगीता शुक्ला
CCSU के अटल सभागार में आरएसएस शताब्दी वर्ष के अंतर्गत ‘युवा संवाद’ कार्यक्रम आयोजित
राष्ट्र निर्माण, स्वावलंबन, भारतीय संस्कृति और सकारात्मक जीवन मूल्यों पर युवाओं से संवाद
मेरठ । चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU), मेरठ के अटल सभागार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत ‘युवा संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने की। कार्यक्रम में युवाओं को राष्ट्र निर्माण, स्वावलंबन, संस्कार, भारतीय संस्कृति और सकारात्मक जीवन मूल्यों से जोड़ने से जुड़े विषयों पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
हरीश रौतेला ने युवाओं से ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना अपनाने का किया आह्वान
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र संपर्क प्रमुख श्री हरीश रौतेला रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में ग्रामोदय विश्वविद्यालय, चित्रकूट के पूर्व कुलपति एवं मेरठ विभाग के विभाग सह संघ चालक प्रो. एन.सी. गौतम और विनोद भारतीय उपस्थित रहे। युवाओं को संबोधित करते हुए श्री हरीश रौतेला ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उनके विद्यार्थी जीवन और राष्ट्र के प्रति उनके विचारों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार ने कोलकाता के नेशनल मेडिकल कॉलेज में अध्ययन के दौरान विभिन्न युवाओं के संपर्क में रहते हुए राष्ट्रहित को अपने जीवन के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल किया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि शिक्षा को केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम न मानते हुए इसे जीवन के व्यापक उद्देश्य और समाज एवं राष्ट्र के प्रति दायित्वों से जोड़कर देखना चाहिए।
भारतीय भाषा, संस्कृति और परंपराओं के प्रति स्वाभिमान पर जोर
श्री रौतेला ने कहा कि युवाओं में अपने देश, भाषा, वेशभूषा, संस्कार और परंपराओं के प्रति स्वाभिमान की भावना विकसित होना आवश्यक है। उनके अनुसार किसी भी देश के विकास में उसकी सांस्कृतिक जड़ों और आत्मविश्वास की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि खेल, विज्ञान, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, तकनीक सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारत में नए अवसर और उपलब्धियां सामने आ रही हैं तथा युवा इन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से स्टार्टअप और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने तथा रोजगार प्राप्त करने के साथ रोजगार सृजन की दिशा में भी प्रयास करने का आह्वान किया।
मेजर ध्यानचंद के जीवन का उदाहरण देकर युवाओं को किया प्रेरित
मुख्य वक्ता ने मेजर ध्यानचंद के जीवन का उदाहरण देते हुए युवाओं को लक्ष्य के प्रति समर्पण और निरंतर प्रयास की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहते हुए कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने युवाओं को नशे एवं अन्य व्यसनों से दूर रहने की सलाह देते हुए कहा कि स्वस्थ और सशक्त युवा समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने युवाओं से उपलब्ध अवसरों का सकारात्मक उपयोग करते हुए अपने भविष्य के साथ देश के भविष्य को भी मजबूत करने की दिशा में कार्य करने की अपील की।
प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों ने पूछे विभिन्न सवाल
कार्यक्रम में प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें विद्यार्थियों ने राष्ट्र निर्माण, युवा शक्ति, शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता और सामाजिक दायित्वों से संबंधित विभिन्न प्रश्न मुख्य वक्ता के समक्ष रखे। श्री हरीश रौतेला ने विद्यार्थियों के सवालों का उत्तर देते हुए उनके द्वारा उठाए गए विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
‘युवा शक्ति भारत की महत्वपूर्ण पूंजी’: कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए CCSU की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि भारत की युवा आबादी देश की महत्वपूर्ण शक्ति है। उन्होंने कहा कि आज का युवा केवल भविष्य का आधार नहीं, बल्कि वर्तमान भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा, जिज्ञासा और नवाचार की क्षमता को सही दिशा देना शिक्षण संस्थानों और समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। कुलपति ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना या रोजगार प्राप्त करना नहीं होना चाहिए। शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों में राष्ट्रबोध, सामाजिक उत्तरदायित्व, नैतिक मूल्य, संवेदनशीलता और नेतृत्व क्षमता का विकास भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ ऐसा दृष्टिकोण देने का प्रयास करता है, जिससे वे अपने व्यक्तिगत विकास के साथ समाज और राष्ट्र के विकास में भी योगदान दे सकें।
स्टार्टअप, तकनीक और नवाचार के अवसरों का लाभ उठाने की अपील
प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि वर्तमान समय में तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्टार्टअप, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में नए अवसर सामने आ रहे हैं। ऐसे में युवाओं को अवसरों की प्रतीक्षा करने के बजाय स्वयं अवसर पैदा करने की मानसिकता विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि युवा रोजगार प्राप्त करने के साथ-साथ रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में भी आगे बढ़ें। उनके अनुसार आत्मनिर्भरता और नवाचार की दिशा में युवाओं की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण है।
विश्वविद्यालयों की भूमिका कक्षा और पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल कक्षा और पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है। विश्वविद्यालय ऐसे नागरिक तैयार करने के केंद्र हैं, जो ज्ञानवान होने के साथ चरित्रवान, जिम्मेदार और सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक हों। उन्होंने युवाओं से भारतीय संस्कृति, भाषा, परंपराओं और जीवन मूल्यों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना किसी एक कार्यक्रम तक सीमित न रहकर जीवन के व्यवहार और कार्यों में दिखाई देनी चाहिए। विद्यार्थियों को अध्ययन, अनुसंधान, कार्यक्षेत्र और सामाजिक जीवन में उत्कृष्टता हासिल करने के साथ अपने सामाजिक दायित्वों को भी समझना चाहिए।
नशे और दिशाहीनता से बचने का संदेश
प्रो. संगीता शुक्ला ने युवाओं के सामने मौजूद विभिन्न चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने नशे, निराशा, दिशाहीनता, सोशल मीडिया के अत्यधिक प्रभाव और तात्कालिक सफलता की मानसिकता को युवाओं के सामने आने वाली चुनौतियों में शामिल बताया। उन्होंने विद्यार्थियों से स्पष्ट लक्ष्य, सकारात्मक सोच, अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं में विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व करने की क्षमता है और आवश्यकता इस क्षमता को सही दिशा देने की है। विश्वविद्यालय की ओर से ऐसे संवाद और कार्यक्रम विद्यार्थियों को सामाजिक, राष्ट्रीय एवं वैश्विक विषयों के प्रति जागरूक करने में सहायक हो सकते हैं।
शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को लेकर कुलपति ने व्यक्त किए विचार
कुलपति ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित यह युवा संवाद विद्यार्थियों को राष्ट्र, समाज और स्वयं के प्रति अपने दायित्वों पर विचार करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि कार्यक्रम के दौरान हुई चर्चा विद्यार्थियों को अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करेगी।
शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी रहे मौजूद
कार्यक्रम में सह प्रांत प्रचारक आनंद कुमार, मेरठ विभाग प्रचारक कौशल कुमार, पूर्वी मेरठ महानगर प्रचारक अनिकेत कुमार, प्रो. शिवराज पुंडीर, डॉ. विवेक कुमार सहित विश्वविद्यालय के शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन प्रो. कृष्णकांत शर्मा ने किया। कार्यक्रम के दौरान युवाओं से जुड़े विभिन्न विषयों पर वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए और विद्यार्थियों ने प्रश्नोत्तर सत्र में सहभागिता की।