चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परिषद के तत्वावधान में आयोजित दीक्षोत्सव-2026 के अंतर्गत मंगलवार को एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया जाएगा। इस समारोह में ग्रामीण क्षेत्र के 15 प्राथमिक विद्यालयों के विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 120 मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा। विजेता छात्र-छात्राओं को विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला अपने कर-कमलों से सम्मानित करेंगी।
विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम केवल पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करना, उनकी रचनात्मक क्षमता को पहचान देना तथा शिक्षा के साथ सांस्कृतिक और बौद्धिक विकास को बढ़ावा देना भी है।
15 विद्यालयों में आयोजित हुईं विविध प्रतियोगिताएं
दीक्षोत्सव के अंतर्गत मीरपुर, लालपुर, सिखेड़ा, भदौड़ा, बनवारीपुर, डालमपुर तथा लाहोरपुर क्षेत्र सहित कुल 15 प्राथमिक विद्यालयों में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इनमें चित्रकला, भाषण, लेखन और पारंपरिक खेल प्रतियोगिताएं प्रमुख रहीं।
इन प्रतियोगिताओं में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कुल 120 छात्र-छात्राओं का चयन सम्मान के लिए किया गया है।
कुलपति करेंगी सम्मानित
सम्मान समारोह में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला विजेता विद्यार्थियों को प्रशस्ति-पत्र, स्मृति चिह्न एवं पुरस्कार प्रदान करेंगी। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार के आयोजनों से विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ता है और उनमें आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
रचनात्मकता और सांस्कृतिक चेतना को मिलेगा बढ़ावा
विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मकता, अभिव्यक्ति कौशल, नेतृत्व क्षमता, सांस्कृतिक चेतना तथा भारतीय पारंपरिक खेलों के प्रति रुचि विकसित करना है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को उनकी प्रतिभा के अनुरूप मंच उपलब्ध कराना और उन्हें मुख्यधारा की शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ना भी इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है।
ग्रामीण प्रतिभाओं को मिल रहा मंच
साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परिषद की अध्यक्ष प्रोफेसर नीलू ज्ञान गुप्ता ने बताया कि दीक्षोत्सव के माध्यम से ग्रामीण अंचल के विद्यार्थियों की छिपी हुई प्रतिभाओं को पहचान दिलाने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास के लिए साहित्य, संस्कृति, कला और खेलों का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित होती है, उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे भविष्य में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित होते हैं। विश्वविद्यालय आने वाले समय में भी इसी प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के अधिक से अधिक विद्यार्थियों को अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास करेगा।