साइबर ठगी का खुलासा करते एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले
मेरठ। साइबर सेल और थाना सदर बाजार पुलिस की संयुक्त टीम ने क्रेडिट कार्ड बैंक कर्मचारी बनकर लोगों को कॉल करने और क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के नाम पर ऑनलाइन ठगी करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे 10 मोबाइल फोन, चार कार्ड, दो एनसीएमसी प्रीपेड कार्ड, सिम कार्ड, एक मारुति बलेनो कार समेत अन्य सामान बरामद किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी अब तक 28 साइबर अपराध संबंधी शिकायतों में करीब 20 लाख रुपये की ठगी कर चुके हैं।
प्रतिबिम्ब पोर्टल की जांच में सामने आए मोबाइल नंबर
पुलिस के अनुसार, 18 सितंबर 2026 को साइबर सेल और थाना सदर बाजार पुलिस ने संयुक्त रूप से इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के तहत संचालित प्रतिबिम्ब पोर्टल पर लंबित साइबर फ्रॉड और धोखाधड़ी से संबंधित शिकायतों का निरीक्षण किया। पोर्टल पर दर्ज मामलों में अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर और IMEI नंबर की ट्रेसिंग की गई। जांच के दौरान कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबरों की सक्रियता थाना सदर बाजार क्षेत्र में पाई गई।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश और पुलिस अधिकारियों के पर्यवेक्षण में साइबर सेल तथा थाना सदर बाजार की संयुक्त टीम ने संदिग्धों की तलाश शुरू की। जांच और कार्रवाई के बाद पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
दोनों आरोपियों की हुई गिरफ्तारी
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शिवांश कुमार शर्मा पुत्र स्वर्गीय विजय शर्मा, निवासी बी-5/4 दिलीप पार्क, मोदीनगर, थाना मोदीनगर, जनपद गाजियाबाद और अर्जुन टांक पुत्र मुनेश कुमार, निवासी सी-23बी, गली नंबर-2, चंद्र विहार, मंडावली, थाना मंडावली, पूर्वी दिल्ली के रूप में हुई है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 10 मोबाइल फोन, चार डेबिट कार्ड, दो एनसीएमसी प्रीपेड कार्ड, सिम कार्ड और एक मारुति बलेनो कार समेत अन्य सामग्री बरामद की है। पुलिस ने बरामदगी और गिरफ्तारी के आधार पर थाना सदर बाजार में मुकदमा अपराध संख्या 226/2026 के तहत धारा 318(4), 319(2) बीएनएस और धारा 66डी आईटी एक्ट में मुकदमा दर्ज किया है। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया जा रहा है।
बैंक कर्मचारी बनकर करते थे फोन
पुलिस की जांच में आरोपियों के साइबर ठगी करने का तरीका भी सामने आया है। आरोपियों के पास क्रेडिट कार्ड धारकों से संबंधित डेटा कथित तौर पर व्हाट्सऐप नंबर के माध्यम से पहुंचता था। इस डेटा में उपलब्ध मोबाइल नंबरों पर आरोपी बैंक कर्मचारी बनकर फोन करते थे।
फोन पर क्रेडिट कार्ड धारकों को उनकी क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने, विशेष ऑफर देने या अन्य आकर्षक सुविधाओं का झांसा दिया जाता था। जब कोई ग्राहक लिमिट बढ़वाने या ऑफर का लाभ लेने में रुचि दिखाता था, तो आरोपी उसके व्हाट्सऐप नंबर पर एक लिंक भेजते थे।
लिंक खोलते ही हासिल कर लेते थे कार्ड की जानकारी
पुलिस के अनुसार, आरोपी ग्राहकों को भेजे गए लिंक पर अपनी जानकारी भरने के लिए कहते थे। जैसे ही क्रेडिट कार्ड धारक लिंक खोलकर उसमें अपनी जानकारी दर्ज करता था, उसके क्रेडिट कार्ड से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी और ओटीपी आरोपियों तक पहुंच जाता था।
इसके बाद आरोपी कथित तौर पर प्राप्त जानकारी और ओटीपी का इस्तेमाल कर क्रेडिट कार्ड से खरीदारी करते थे। इस तरह क्रेडिट कार्ड धारकों के साथ साइबर फ्रॉड किया जाता था। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों से जुड़े अब तक 28 NCRP शिकायतों में करीब 20 लाख रुपये की साइबर ठगी की जानकारी सामने आई है। पुलिस अन्य मामलों की भी जांच कर रही है।
लोकेशन बदलने के लिए कार का करते थे इस्तेमाल
पुलिस के अनुसार, आरोपी साइबर ठगी से संबंधित गतिविधियों के लिए अपनी स्थायी लोकेशन से दूर जाकर काम करते थे। इसके लिए वे मारुति बलेनो कार संख्या DL7C1734 का इस्तेमाल करते थे। आरोपी कथित तौर पर अलग-अलग स्थानों पर जाकर कार के अंदर बैठकर साइबर फ्रॉड से संबंधित गतिविधियां संचालित करते थे।
पुलिस का कहना है कि ऐसा करने के पीछे उनका उद्देश्य अपनी स्थायी लोकेशन का पता चलने से बचना था। आरोपी अपने साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल फोन और अन्य सामान भी कार में रखते थे।
साइबर सेल ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने, कैशबैक, रिवॉर्ड प्वाइंट या किसी अन्य बैंकिंग ऑफर के नाम पर आने वाले अनजान कॉल और व्हाट्सऐप लिंक से सावधान रहें। किसी भी संदिग्ध लिंक पर अपनी बैंकिंग अथवा क्रेडिट कार्ड संबंधी जानकारी दर्ज न करें और किसी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी साझा न करें।