केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में डेयरी क्षेत्र के विशेषज्ञ, किसान और उद्यमी रहे मौजूद
मेरठ, 28 अक्टूबर। डेयरी व्यवसाय को लाभदायक बनाने के लिए दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ उत्पादन लागत पर नियंत्रण, वैज्ञानिक पशुपालन और बेहतर विपणन पर ध्यान देना जरूरी है। यह बात भाकृअनुप-केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान, मेरठ में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कही। उन्होंने किसानों और डेयरी उद्यमियों को उन्नत नस्ल के पशुओं का चयन, संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य देखभाल और आधुनिक तकनीकों को अपनाने की सलाह दी।
संस्थान के निदेशक डॉ. अशोक कुमार मोहंती के निर्देशन में कार्यशाला का आयोजन इंडियन डेयरी एसोसिएशन (आईडीए), नॉर्थ जोन और वेस्टर्न उत्तर प्रदेश स्टेट चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यशाला का विषय “आत्मनिर्भरता से उद्यमिता तक: डेयरी को एक लाभदायक व्यवसाय में बदलना” था। इसका उद्देश्य किसानों और डेयरी उद्यमियों को वैज्ञानिक तकनीकों और कुशल प्रबंधन के जरिए आय बढ़ाने के तरीकों से परिचित कराना रहा।

उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग जरूरी
आईडीए, नॉर्थ जोन एवं वेस्टर्न उत्तर प्रदेश स्टेट चैप्टर के चेयरमैन डॉ. ए.के. त्रिपाठी ने कहा कि डेयरी व्यवसाय की लाभप्रदता बढ़ाने के लिए उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग और अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण आवश्यक है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की नंद बाबा जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए डेयरी क्षेत्र के विकास में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला।
आईडीए के सेक्रेटरी जनरल हरिओम गुलाटी ने अच्छी नस्ल के पशुओं, संतुलित आहार, उचित रखरखाव और नियमित स्वास्थ्य देखभाल को सफल डेयरी व्यवसाय का आधार बताया। उन्होंने कहा कि किसानों की तकनीकी दक्षता बढ़ाने के साथ किसानों, उद्यमियों और सरकार के बीच बेहतर समन्वय से दुग्ध उत्पादन और आय में सुधार किया जा सकता है।
आनंदा डेयरी के सीएमडी आर.एस. दीक्षित ने पशुओं की उत्पादन क्षमता के अनुसार पोषण और प्रबंधन अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और व्यावसायिक नियोजन से डेयरी उद्यमिता को बढ़ावा मिल सकता है। वहीं, आईडीए के अध्यक्ष सुधीर कुमार सिंह ने दूध की गुणवत्ता और आर्थिक व्यवहार्यता पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि डेयरी से जुड़े निर्णयों में किसान और उपभोक्ता, दोनों के हितों को ध्यान में रखना चाहिए।
लागत प्रबंधन और उद्यमिता पर तकनीकी सत्र
तकनीकी सत्र में पंकज शर्मा ने “दूध से कमाई, समझदारी से समृद्धि: डेयरी उद्यमिता की नई राह” विषय पर जानकारी दी। उन्होंने डेयरी व्यवसाय में लागत के बेहतर प्रबंधन और उद्यमिता की संभावनाओं पर चर्चा की।

पीसीडीएफ के सेवानिवृत्त प्रबंधक डॉ. प्रमोद कुमार ने कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम में सुधार के उपायों के बारे में बताया। संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राजीव रंजन कुमार ने डेयरी फार्म के अपशिष्ट को मूल्यवर्धित उत्पादों में उपयोग करने के अभिनव तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अपशिष्ट प्रबंधन से चक्रीय और लाभदायक मूल्य शृंखला विकसित करने में मदद मिल सकती है।
किसान संवाद में व्यावहारिक समस्याओं पर चर्चा
कार्यशाला के किसान संवाद सत्र में प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के साथ डेयरी व्यवसाय से जुड़े सवालों और व्यावहारिक समस्याओं पर विचार-विमर्श किया। विशेषज्ञों ने पशुपालकों को वैज्ञानिक जानकारी अपनाने, पशुओं की जरूरत के अनुसार आहार और देखभाल की व्यवस्था करने तथा उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में पशुपालन विभाग के अपर निदेशक डॉ. मानव सहित डेयरी क्षेत्र के विशेषज्ञ, किसान और उद्यमी उपस्थित रहे। मंच संचालन सुश्री निवेदिता दुबे ने किया। अंत में टी.टी. रेड्डी ने अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समन्वय केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एस.के. वर्मा ने किया।